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कम बारिश की मार झेल रहे पाली और पश्चिमी राजस्थान के किसानों के लिए जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय ने खोजी बाजरा और मूंग की नई राहराजस्थान
26 अग॰ 2026, 8:28 pm (29 दिन पहले)· 3

कम बारिश की मार झेल रहे पाली और पश्चिमी राजस्थान के किसानों के लिए जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय ने खोजी बाजरा और मूंग की नई राह

पश्चिमी राजस्थान में अगस्त के अंतिम सप्ताह तक बारिश न होने से फसल बुआई प्रभावित हुई है, जिसके समाधान के लिए जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय ने कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली बाजरा, मूंग, तिल और ग्वार की नई किस्में विकसित की हैं।

पश्चिमी राजस्थान के पाली समेत कई जिलों में अगस्त महीने के आखिरी चरण तक मानसून की बेरुखी ने कृषि गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। समय पर पर्याप्त वर्षा न होने के कारण विस्तृत ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों की बुआई का काम अटका हुआ है, जिससे स्थानीय अन्नदाताओं की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस मौसमी संकट और सूखे के अंदेशे के बीच जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत का मार्ग प्रशस्त किया है। कृषि विशेषज्ञों ने अपने निरंतर शोध के माध्यम से बाजरा, मूंग, तिल और ग्वार की ऐसी नई सूखा प्रतिरोधी किस्में विकसित की हैं, जो न्यूनतम पानी में भी बेहतर उपज देने की क्षमता रखती हैं। यदि अगस्त के अंतिम दिनों में हल्की या मध्यम बारिश भी होती है, तो किसान इन उन्नत किस्मों के बीजों की बुआई करके अपने मौसमी नुकसान से बच सकते हैं।

पश्चिमी राजस्थान में मानसून की कमी से उत्पन्न हुआ कृषि संकट

पश्चिमी राजस्थान का एक बड़ा भूभाग कृषि के लिए पूरी तरह से मानसून की बारिश पर निर्भर रहता है। वर्ष के इस चरण में अगस्त का आखिरी सप्ताह शुरू हो चुका है, लेकिन उम्मीद के मुताबिक बादल न बरसने से कई इलाकों में बुआई का रकबा काफी घट गया है। पर्याप्त नमी के अभाव में खेत खाली पड़े हैं और फसल चक्र बिगड़ने की आशंका से किसान परेशान हैं। मौसम में आ रहे इन अचानक बदलावों को देखते हुए जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के शोधकर्ता लगातार मैदान में डटे हुए हैं। वैज्ञानिकों का प्राथमिक लक्ष्य ऐसी फसलों के बीज तैयार करना रहा है जो कम सिंचाई में पक सकें और जिनका जीवन चक्र पारम्परिक बीजों की तुलना में काफी छोटा हो, ताकि कम समय में फसल काटकर खेत खाली किए जा सकें।

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कम समय और सीमित पानी में पकने वाली उन्नत फसल किस्में

जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान विभाग ने बाजरा, मूंग, तिल और ग्वार की दो से तीन ऐसी विशेष किस्में तैयार की हैं जो बेहद कम समय में पककर तैयार हो जाती हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की योजना इन बीजों को जल्द से जल्द अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने की है। आमतौर पर देर से होने वाली बारिश के बाद पारम्परिक फसलों की बुआई करना जोखिम भरा माना जाता है, क्योंकि वे पकने में अधिक समय लेती हैं और सर्दियों की आहट तक पानी की कमी से सूखने लगती हैं। इसके विपरीत, वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई ये नई किस्में कम अवधि में परिपक्व हो जाती हैं। इस वैज्ञानिक नवाचार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पानी की कमी के बावजूद किसान अपनी भूमि से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हासिल कर सकें और उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित न हो।

विश्वविद्यालय नेतृत्व का संदेश और किसानों के लिए मार्गदर्शन

जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वीरेंद्र सिंह जैतावत ने वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए कहा कि मौसम के बदलते मिजाज के कारण अगस्त के अंत तक पर्याप्त बारिश न होना चिंताजनक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने सूखा प्रतिरोधी अनुसंधान को तेज किया था। वैज्ञानिकों द्वारा विकसित बाजरा, मूंग, तिल और ग्वार की ये नई दो से तीन किस्में कम पानी में भी तेजी से बढ़ती हैं। इन उन्नत किस्मों के बीज किसानों के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यदि अगस्त के अंतिम दिनों में क्षेत्र में मानसून की वापसी होती है या राहत की बौछारें पड़ती हैं, तो किसान बिना समय गंवाए इन फसलों की बुआई कर सकते हैं, जिससे उन्हें कम समय में तैयार फसल का पूरा लाभ मिल सकेगा।

सवाल-जवाब

पश्चिमी राजस्थान में फसलों की बुआई में देरी क्यों हुई है?
अगस्त महीने के अंतिम सप्ताह तक पर्याप्त मानसूनी बारिश न होने के कारण खेतों में नमी की कमी हो गई, जिससे बड़े पैमाने पर फसलों की बुआई नहीं हो पाई।
जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय ने किन फसलों की नई किस्में विकसित की हैं?
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बाजरा, मूंग, तिल और ग्वार की दो से तीन नई सूखा प्रतिरोधी और कम अवधि वाली किस्में विकसित की हैं।
इन नई फसल किस्मों की मुख्य खासियत क्या है?
ये नई किस्में बहुत कम पानी और कम समय में पककर तैयार हो जाती हैं, जिससे देर से होने वाली बारिश में भी बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है।
जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति ने किसानों को क्या सलाह दी है?
कुलपति प्रो. वीरेंद्र सिंह जैतावत ने सलाह दी है कि यदि अगस्त के अंत में बारिश होती है, तो किसान बिना देरी किए इन कम अवधि वाली किस्मों की बुआई कर नुकसान से बचें।
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