राजस्थान के खैरथल-तिजारा में साइबर ठगी की जांच के दौरान बड़ा हादसा, पुलिस की मौजूदगी में युवक ने लगाया फंदाउत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026: भाजपा ने बनाई बढ़त, सपा ने दी कड़ी टक्कर; सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी बधाईपारे की सतह पर सोना बनाने का दावा, राजस्थान के वैज्ञानिक लाल बहादुर के प्रयोग की शुरू हुई वैज्ञानिक जांचफरीदाबाद में फर्जी जॉब ऑफर के ज़रिए 89750 रुपये की साइबर ठगी, गाजियाबाद के 3 आरोपी गिरफ्तारराजस्थान के डीग में पंचायत चुनाव के दौरान भड़की हिंसा, सरपंच प्रत्याशियों के गुटों में पथराव से कई घायलयूडीपी से पाला बदलकर एनपीपी में शामिल हुए दो विधायक, मेघालय में बदला राजनीतिक गणित500 करोड़ के ऑडियो क्लिप मामले पर बोले मनोज जरांगे, जांच न होने पर 29 तारीख को दी सीधे टकराव की चेतावनीइलाहाबाद हाई कोर्ट दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम पर आदेश सुरक्षित करने के बाद निर्णय देगा29 अक्टूबर को चंद्रमा का मिथुन राशि में प्रवेश, इन 7 राशियों के खुलेंगे उन्नति के द्वारमैनपुरी विधानसभा सीट का तीन दशक का इतिहास और 2027 के भावी सियासी समीकरण
कानपुर चिड़ियाघर को मिली ऐतिहासिक सफलता, पहली बार पैदा हुए नौ दुर्लभ गैंगेटिक घड़ियालउत्तर प्रदेश
24 सित॰ 2026, 10:03 am (35 दिन पहले)· 1

कानपुर चिड़ियाघर को मिली ऐतिहासिक सफलता, पहली बार पैदा हुए नौ दुर्लभ गैंगेटिक घड़ियाल

कानपुर प्राणि उद्यान के 52 वर्षों के सफर में पहली बार 9 दुर्लभ गैंगेटिक घड़ियाल शावकों का जन्म हुआ है, जिनकी विशेष देखभाल अस्पताल परिसर में की जा रही है।

कानपुर प्राणि उद्यान में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। चिड़ियाघर की स्थापना के 52 वर्षों के लंबे इतिहास में पहली बार नौ दुर्लभ गैंगेटिक घड़ियाल शावकों का सुरक्षित जन्म हुआ है। जन्म के बाद शुरुआती तीन महीने तक ये नन्हे शावक बाड़े में अपनी मां की निगरानी में रहे, लेकिन शिकारियों और परभक्षी पक्षियों के खतरे को ध्यान में रखते हुए अब इन्हें अस्पताल परिसर के सुरक्षित वातावरण में स्थानांतरित कर दिया गया है। वहां विशेष रूप से तैयार किए गए पानी के बाथ टब में ये नन्हे जीव खूब सक्रियता दिखा रहे हैं और उनकी हर गतिविधि पर पशु चिकित्सकों की टीम पैनी नजर बनाए हुए है।

बाथ टब में अठखेलियां और अस्पताल क्षेत्र में विशेष निगरानी

चिड़ियाघर के अस्पताल क्षेत्र में इन शावकों की परवरिश के लिए खास व्यवस्था की गई है। घर में छोटे बच्चों की तरह ये नन्हे घड़ियाल टब के पानी में तैरते हैं, चहलकदमी करते हैं और नियमित रूप से धूप सेंकते हैं। अगले चार से पांच महीने तक इन्हें इसी संरक्षित चिकित्सा निगरानी क्षेत्र में रखने की पूरी योजना तैयार की गई है। जब ये शावक शारीरिक रूप से मजबूत और परिपक्व हो जाएंगे, तब उनके रहने के लिए एक बिल्कुल अलग और सुरक्षित आवास तैयार किया जाएगा। चिकित्सकों का कहना है कि सुरक्षा और पौष्टिक आहार मिलने की वजह से शावकों के व्यवहार में भी जबरदस्त ऊर्जा देखी जा रही है।

ये भी पढ़ें

रेत के टीले में छिपाए थे अंडे, 70 दिनों में बाहर आए नन्हे शावक

चिड़ियाघर के डॉक्टर नासिर ने इस पूरी प्रजनन प्रक्रिया का ब्योरा साझा करते हुए बताया कि लगभग तीन महीने पहले बाड़े की नियमित निगरानी के दौरान मादा घड़ियाल ने रेत का एक बड़ा टीला तैयार किया था। वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस संकेत से तुरंत समझ लिया कि मादा अंडे देने की तैयारी में है, क्योंकि घड़ियाल अपने अंडों को हमेशा रेत की गहराई में छिपाकर सुरक्षित रखते हैं। इसके बाद करीब 60 से 70 दिनों तक अंडों से बच्चे बाहर आने की प्राकृतिक प्रक्रिया चली। जब नौ स्वस्थ शावक अंडों से बाहर निकले, तो शुरुआत में उन्हें बाड़े में मां के पास ही रहने दिया गया था।

हालांकि, शावकों का आकार बेहद छोटा होने के कारण खुले बाड़े में चील, बाज और कौवे जैसे परभक्षी पक्षियों से उन पर लगातार जानलेवा हमला होने की आशंका बनी हुई थी। नन्हे जीवों की पुख्ता सुरक्षा और उनके सुचारू शारीरिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधन ने उन्हें तत्काल अस्पताल वार्ड में शिफ्ट करने का निर्णय लिया।

बीस दिनों में दर्ज हुई तेज शारीरिक बढ़त, मांगुर मछली बनी मुख्य खुराक

अस्पताल वार्ड के बाथ टब में आने के बाद इन नौ शावकों के व्यवहार में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किया गया है। डॉक्टर नासिर के अनुसार, जब तक ये मां के पास खुले बाड़े में थे, तब तक काफी शांत और सहमे रहते थे, लेकिन टब के सुरक्षित माहौल में पहुंचते ही इनकी सक्रियता कई गुना बढ़ गई है। कुछ शावक पूरे टब में तेजी से तैरते रहते हैं, तो कुछ किनारे चढ़कर बाहर निकलने का प्रयास करते दिखाई देते हैं।

इनकी नियमित डाइट में मांगुर मछली के साथ-साथ अन्य छोटी मछलियां दी जा रही हैं, जिन्हें ये बड़े चाव से खा रहे हैं। धूप सेंकने के साथ-साथ तैरने की पूरी सुविधा मिलने से महज 20 दिनों के भीतर इन शावकों के वजन और लंबाई दोनों में काफी अच्छी वृद्धि देखी गई है। इसी सकारात्मक शारीरिक विकास को देखते हुए जू प्रशासन ने इन्हें अगले कुछ और महीनों तक डॉक्टरों की सीधी देखरेख में रखने का फैसला बरकरार रखा है।

मगरमच्छ से बिल्कुल अलग होती है घड़ियाल की शारीरिक बनावट

प्राणि उद्यान के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर फिरोज खान ने बताया कि आम लोग अक्सर घड़ियाल को देखकर उसे साधारण मगरमच्छ समझने की भूल कर बैठते हैं, लेकिन दोनों जीवों की बनावट में गहरा अंतर होता है। घड़ियाल की सबसे विशिष्ट पहचान उसकी अत्यधिक लंबी और संकरी थूथन होती है। इसके अलावा, नर घड़ियाल जब वयस्क हो जाता है, तो उसकी थूथन के छोर पर एक घड़े के आकार का उभार विकसित हो जाता है, जिसके कारण ही इसका नाम घड़ियाल पड़ा है।

ये जलीय जीव अपना अधिकांश समय गहरे पानी में बिताते हैं और पानी से बाहर निकलकर नदी किनारे या बाड़े की रेत पर धूप सेंकना पसंद करते हैं। मछलियों का शिकार करने के लिए इनके जबड़ों में बेहद तेज और नुकीले दांत होते हैं, जिनकी मदद से ये पानी में फिसलने वाली मछलियों को आसानी से जकड़ लेते हैं। घड़ियालों की औसत जीवन अवधि लगभग 30 वर्ष तक होती है। शारीरिक आकार की बात करें तो नर घड़ियाल की कुल लंबाई 16 से 20 फीट के बीच हो सकती है, जबकि मादा घड़ियाल सामान्यतः 11.5 से 15 फीट लंबी होती है।

संरक्षण के नक्शे पर कानपुर चिड़ियाघर की बड़ी कामयाबी

चिड़ियाघर के निदेशक कन्हैया पटेल ने बताया कि इस समय प्राणि उद्यान में 100 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के 1000 से भी ज्यादा वन्यजीव मौजूद हैं। इसके बावजूद, चिड़ियाघर के इतिहास में पहली बार गैंगेटिक घड़ियाल का सफल प्रजनन होना अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है। नन्हे शावकों की 24 घंटे सुरक्षा और पोषण के लिए कड़े प्रबंध किए गए हैं। जू प्रशासन को पूरा विश्वास है कि अगर ये नौ शावक पूरी तरह स्वस्थ होकर वयस्क बनते हैं, तो यह उपलब्धि देश और प्रदेश में घड़ियालों के संवर्धन और संरक्षण के प्रयासों को बड़ा संबल प्रदान करेगी।

आंकड़ों के संदर्भ में देखें तो मौजूदा समय में पूरे भारत में लगभग 3000 से अधिक गैंगेटिक घड़ियाल मौजूद हैं, जिनमें से 2000 से अधिक घड़ियाल अकेले उत्तर प्रदेश के जल क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ऐसे में कानपुर में पहली बार जन्मे ये नौ शावक राज्य के संरक्षण रिकॉर्ड के लिए बेहद मूल्यवान साबित होंगे।

सवाल-जवाब

कानपुर चिड़ियाघर में कितने गैंगेटिक घड़ियाल शावकों का जन्म हुआ है?
चिड़ियाघर के 52 साल के इतिहास में पहली बार कुल 9 दुर्लभ गैंगेटिक घड़ियाल शावकों का जन्म हुआ है।
घड़ियाल के अंडों से बच्चे निकलने में कितना समय लगा?
मादा घड़ियाल द्वारा बालू के टीले में छिपाए गए अंडों से लगभग 60 से 70 दिनों की प्रक्रिया के बाद शावक बाहर निकले।
शावकों को बाड़े से निकालकर अस्पताल के बाथ टब में क्यों रखा गया?
छोटे आकार के कारण उन पर चील, कौवे और बाज जैसे परभक्षी पक्षियों का खतरा था, इसलिए सुरक्षा और बेहतर विकास के लिए उन्हें अस्पताल में शिफ्ट किया गया।
अस्पताल में इन नन्हे घड़ियालों को खाने में क्या दिया जा रहा है?
शावकों को आहार के रूप में मांगुर मछली सहित अन्य छोटी मछलियां दी जा रही हैं, जिससे 20 दिनों में उनकी लंबाई और वजन में अच्छी वृद्धि हुई है।
घड़ियाल और मगरमच्छ की पहचान में मुख्य अंतर क्या होता है?
घड़ियाल की मुख्य पहचान उसकी लंबी और पतली थूथन होती है, और वयस्क नर घड़ियाल की नाक पर घड़े जैसी आकृति बन जाती है।
वर्तमान में भारत और उत्तर प्रदेश में घड़ियालों की अनुमानित संख्या कितनी है?
पूरे भारत में 3000 से अधिक गैंगेटिक घड़ियाल हैं, जिनमें से 2000 से ज्यादा घड़ियाल अकेले उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·33 दिन पहले

चिड़ियाघर में घड़ियालों का जन्म अच्छी खबर है, पर खुले बाड़े से उठाकर अस्पताल के टब में रखना समझ नहीं आया। क्या प्राकृतिक माहौल से निकालकर उन्हें चार महीने तक शीशे या टाइल्स के बीच रखना सही है?

Ravikash Gupta@ravikash·34 दिन पहले

अंडे तो सुरक्षित निकाल लिए, पर क्या 52 साल में पहली बार घड़ियाल होना थोड़ा अजीब नहीं है?

Arjun Mehta@arjun-mehta·34 दिन पहले

रविकेश, 52 साल लंबा वक्त है भाई, पर हर ज़ू में हर जानवर आसानी से ब्रीड नहीं करता।

Karan Malhotra@karan-malhotra·34 दिन पहले

चिड़ियाघर में घड़ियालों का जन्म अच्छी खबर है, पर डॉक्टरों का यह दावा थोड़ा अजीब लगा कि मां के पास शावक सहमे रहते थे और अस्पताल के टब में आते ही अचानक बहादुर हो गए। क्या वाकई जीवों की मानसिकता इतनी जल्दी बदल जाती है?

Rohan Verma@rohan-verma·34 दिन पहले

करण, बात मानसिकता की नहीं बल्कि माहौल की है। खुले बाड़े में पक्षियों का खतरा रहता है, इसलिए वे छिपते होंगे और अस्पताल के टब में सुरक्षित महसूस कर रहे होंगे।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp