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कानपुर में लेजर मशीन से कम शुद्धता वाले सोने पर नकली हॉलमार्क लगाने की साजिश बेनकाबउत्तर प्रदेश
12 अक्तू॰ 2026, 3:07 pm (17 दिन पहले)· 2

कानपुर में लेजर मशीन से कम शुद्धता वाले सोने पर नकली हॉलमार्क लगाने की साजिश बेनकाब

कानपुर के चौक सर्राफा बाजार में लेजर मशीन से कम कैरेट के सोने पर फर्जी हॉलमार्क बनाने के मामले का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। गहने बेचने पहुंची महिला की सतर्कता के बाद पुलिस ने उपकरण जब्त कर केस दर्ज कर लिया है।

कानपुर के प्रसिद्ध चौक सर्राफा बाजार में कम शुद्धता वाले सोने के आभूषणों पर लेजर मशीन से हूबहू हॉलमार्क जैसा निशान बनाकर बेचने और गिरवी रखने के गंभीर मामले का खुलासा हुआ है। फीलखाना थाना क्षेत्र में सामने आई इस घटना में पुलिस ने मौके से लेजर कटिंग मशीन को अपने कब्जे में ले लिया है। इस फर्जीवाड़े में शामिल आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पूरे नेटवर्क की तह तक जाने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

ज्वेलर्स की दुकान पर जब जांच में खुली पोल

इस पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई जब एक महिला फीलखाना इलाके में स्थित एक ज्वेलर्स की दुकान पर अपने सोने के जेवर बेचने पहुंची। सुनार ने जब सोने की शुद्धता परखने के लिए आभूषणों की बारीकी से जांच की, तो पता चला कि उनमें सोने की मात्रा काफी कम थी। इसके बावजूद उन जेवरों पर आधिकारिक हॉलमार्क जैसा दिखने वाला निशान छपा हुआ था। शक गहराने पर ज्वेलर्स ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी।

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पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जब मामले की पड़ताल की, तो पता चला कि यह साधारण मिलावट का मामला नहीं बल्कि संगठित तरीके से सरकारी निशान की नकल कर ग्राहकों को चूना लगाने का खेल था। पूछताछ में सामने आया कि अक्षय गुप्ता नाम के एक व्यक्ति ने महिला को ये आभूषण दिए थे। इन कम शुद्धता वाले जेवरों के बदले अक्षय गुप्ता ने महिला से 40 हजार रुपये की रकम ली थी।

चौक सर्राफा की दुकान में चल रहा था लेजर का खेल

पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि चौक सर्राफा क्षेत्र में स्थित दिनेश वर्मा की दुकान पर लेजर कटिंग मशीन का अवैध रूप से इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी उपकरण के जरिए कम कैरेट वाले हल्के सोने के आभूषणों पर फर्जी हॉलमार्क उकेरा जा रहा था, ताकि वे बाजार में सामान्य खरीदारों को पूरी तरह खरे और अधिक कैरेट के दिखें।

आरोप है कि इस तरीके का इस्तेमाल कम शुद्धता वाले सोने को अधिक कैरेट का बताकर खुले बाजार में खपाने और वित्तीय संस्थानों या लोगों के पास गिरवी रखने के लिए किया जा रहा था। किसी भी सोने के आभूषण पर हॉलमार्क इसलिए लगाया जाता है ताकि आम खरीदार को उसकी शुद्धता की पुख्ता और आधिकारिक गारंटी मिल सके। जब कम कैरेट वाले जेवर पर लेजर तकनीक से फर्जी मुहर लगा दी जाती है, तो आम ग्राहकों को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ता है और पूरे सर्राफा कारोबार की साख पर गहरा असर पड़ता है।

मशीन जब्त कर नेटवर्क की पड़ताल में जुटी पुलिस

कानून व्यवस्था की टीम ने कार्रवाई करते हुए फर्जी हॉलमार्क बनाने के काम में लाई जा रही लेजर कटिंग मशीन को जब्त कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दर्ज प्राथमिकी के आधार पर सभी आरोपियों की पहचान पूरी हो चुकी है। अब जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इस मशीन से अब तक कितने गहनों पर फर्जी निशान बनाए जा चुके थे और इस खेल के जरिए कितने खरीदारों को निशाना बनाया गया है। आभूषणों की वास्तविक शुद्धता की जांच के साथ पूरे सिंडिकेट पर सख्त कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।

सवाल-जवाब

कानपुर में पुलिस ने किस इलाके से फर्जी हॉलमार्क बनाने की मशीन पकड़ी?
पुलिस ने कानपुर के चौक सर्राफा इलाके में दिनेश वर्मा की दुकान से यह लेजर कटिंग मशीन जब्त की है।
इस फर्जीवाड़े की जानकारी पुलिस तक कैसे पहुंची?
एक महिला जब फीलखाना क्षेत्र की दुकान पर जेवर बेचने पहुंची, तो सुनार ने जांच में सोने की शुद्धता कम पाकर पुलिस को सूचना दी।
आरोपी ने महिला को गहने देकर कितने रुपये लिए थे?
जांच में पता चला कि अक्षय गुप्ता नामक व्यक्ति ने महिला को ये कम शुद्धता वाले आभूषण देकर 40 हजार रुपये लिए थे।
कम शुद्धता वाले सोने पर फर्जी हॉलमार्क लगाने का क्या मकसद था?
इसका मुख्य मकसद कम कैरेट के सोने को अधिक शुद्ध बताकर खुले बाजार में बेचना और अधिक रकम पर गिरवी रखना था।
पुलिस ने मामले में अब तक क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने लेजर कटिंग मशीन जब्त कर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·15 दिन पहले

सर्राफा बाजार में लेजर मशीन से ऐसा खेल चल रहा है, तो आम ग्राहक कैसे बचाएगा खुद को। पटना और मुजफ्फरपुर के बाजारों में भी ऐसी जांच होनी चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·15 दिन पहले

कानपुर के चौक सर्राफा में कुछ साल पहले मेरी एक रिश्तेदार के साथ भी ऐसा ही धोखा हुआ था जब उन्होंने कम शुद्धता वाले जेवर पर भरोसा कर लिया था। तकनीक का ऐसा गलत इस्तेमाल आम आदमी की गाढ़ी कमाई पर सीधा डाका डालता है, पुलिस को इस पूरे सिंडिकेट का कड़ाई से पर्दाफाश करना चाहिए।

Ravikash Gupta@ravikash·15 दिन पहले

अर्जुन जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या पुलिस को यह पता चला कि इस लेजर मशीन से अब तक कितने लोगों को ऐसे नकली जेवर बेचे जा चुके हैं?

Rohan Verma@rohan-verma·16 दिन पहले

चौक सराफा में ऐसा फ्रॉड पकड़ना अच्छी बात है, पर लगता नहीं कि सिर्फ एक मशीन और दो लोग ही इसमें शामिल होंगे। छोटे सुनार की दुकान पर लेजर मशीन ऐसे ही थोड़ी लग जाएगी, पीछे कोई बड़ा खिलाड़ी जरूर होना चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 दिन पहले

रोहन भाई, बिल्कुल सही पकड़े। क्या पुलिस अब उन लोगों के नाम भी निकालेगी जिन्होंने इस मशीन से बने जेवर गिरवी रखकर बैंक या लोगों से पैसे निकाले हैं?

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