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कानपुर में महिला की मौत के बाद हाईवे पर उग्र प्रदर्शन, पथराव में इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिसकर्मी घायलउत्तर प्रदेश
30 अग॰ 2026, 11:38 pm (13 दिन पहले)· 2

कानपुर में महिला की मौत के बाद हाईवे पर उग्र प्रदर्शन, पथराव में इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिसकर्मी घायल

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक महिला के शव के साथ कानपुर-प्रयागराज हाईवे पर जाम लगा रहे लोगों ने पुलिस टीम पर पथराव कर दिया, जिससे एक इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के महाराजपुर थाना क्षेत्र में रविवार शाम एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद भारी हंगामा देखने को मिला। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मृतका के मायके वाले उसके शव को लेकर घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में ससुराल पक्ष के लोगों के साथ उनका गंभीर विवाद हो गया। इसी रंजिश और हंगामे के चलते परिजनों तथा स्थानीय लोगों ने कानपुर-प्रयागराज हाईवे पर शव को बीच सड़क पर रखकर यातायात पूरी तरह से बाधित कर दिया। सड़क पर जाम लगने से वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और दोनों तरफ आवाजाही ठप हो गई।

शव रखकर प्रदर्शन और पुलिस पर हमला

जब स्थानीय पुलिस को इस सड़क जाम की सूचना मिली, तो अधिकारियों का दल तुरंत मौके पर पहुंचा और प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने का प्रयास शुरू किया। पुलिस ने लोगों से आग्रह किया कि वे शव को सड़क से हटा लें ताकि सुचारू रूप से यातायात बहाल किया जा सके। हालांकि, स्थिति उस समय नियंत्रण से बाहर हो गई जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प और बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते भीड़ में शामिल उग्र लोगों ने पुलिस बल पर ईंट-पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। इस अचानक हुए पथराव की घटना से मौके पर अफरातफरी मच गई और दो इंस्पेक्टरों समेत कुल तीन पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।

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घटना की पृष्ठभूमि और पारिवारिक विवाद

यह पूरा विवाद शेखपुर गांव की रहने वाली 32 वर्षीय महिला माला की मौत से जुड़ा हुआ है। मृतका की शादी लगभग आठ वर्ष पूर्व लालूपुर गांव निवासी मुन्ना निषाद के साथ संपन्न हुई थी और दंपति के दो बच्चे भी हैं। परिजनों के अनुसार, शनिवार को माला की तबियत खराब हो गई थी, जिसके बाद उनके एक रिश्तेदार शनि ने उन्हें दवा दिलवाई और दोपहर करीब 3 बजे ससुराल छोड़कर वापस चले गए। इसके करीब एक घंटे बाद मृतका के पति ने मायके पक्ष को फोन करके सूचना दी कि महिला ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है। इस मनहूस खबर को सुनकर मायके वाले तुरंत ससुराल पहुंचे, जहां उन्होंने माला का शव घर के अंदर फंदे से लटका हुआ पाया। इसके बाद पुलिस और फॉरेंसिक यूनिट को सूचित किया गया, जिन्होंने घटनास्थल की बारीकी से जांच-पड़ताल करने के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था।

भारी पुलिस बल की तैनाती और लाठीचार्ज

रविवार की शाम जब पोस्टमार्टम के बाद शव को वापस लाया जा रहा था, तब मायके पक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस ने ससुराल वालों के खिलाफ कोई सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की है। इसी आक्रोश में उन्होंने हाईवे पर शव रखकर प्रदर्शन किया। पुलिसकर्मियों पर हुए हमले की खबर मिलते ही एडीसीपी शिवा सिंह और एसीपी आशुतोष सिंह समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। हालात की गंभीरता को भांपते हुए चार थानों की फोर्स के साथ-साथ पीएसी की एक टुकड़ी को भी तुरंत बुलाया गया। बिगड़ते हालातों को काबू में करने के लिए पुलिस ने अंततः लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया और भीड़ को तितर-बितर कर हाईवे से खदेड़ दिया, जिसके बाद यातायात को सुचारु कराया जा सका।

प्रशासनिक कार्रवाई और हिरासत

पूर्वी जोन के डीसीपी सत्यजीत गुप्ता ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग, जिनमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल थे, कथित तौर पर नशे की हालत में थे। इसी भीड़ ने पुलिस टीम पर अचानक पथराव कर दिया जिसमें दो से तीन पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। घायल सभी पुलिसकर्मियों को तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए कांशीराम अस्पताल भेजा गया, जहां से इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। पुलिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए मौके से पांच संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है। मृतका के परिवार की औपचारिक शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और वीडियो फुटेज के आधार पर पथराव तथा हाईवे जाम करने वाले अन्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।

सवाल-जवाब

यह घटना किस स्थान पर हुई?
यह घटना उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के महाराजपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत कानपुर-प्रयागराज हाईवे पर हुई।
मृत महिला का नाम और उम्र क्या थी?
मृत महिला का नाम माला था और उनकी उम्र 32 वर्ष थी।
पुलिसकर्मियों पर हमला क्यों हुआ?
जब पुलिस टीम हाईवे से शव हटवाकर यातायात बहाल करने का प्रयास कर रही थी, तब उग्र भीड़ ने तीखी बहस के बाद पथराव शुरू कर दिया।
इस घटना में कितने पुलिसकर्मी घायल हुए?
इस हिंसक पथराव में दो इंस्पेक्टरों समेत कुल तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने लाठीचार्ज करके भीड़ को हटाया, पांच लोगों को हिरासत में लिया और परिवार की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·12 दिन पहले

यह घटना घरेलू विवाद और पुलिस-जनता के बीच बढ़ते अविश्वास का गंभीर उदाहरण है। इस प्रकार की त्रासदियों से निपटने के लिए पुलिस को संवेदनशीलता और संवाद बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि आक्रोश हिंसा में न बदले और कानून व्यवस्था सुरक्षित रहे।

Ravikash Gupta@ravikash·12 दिन पहले

कानपुर की यह घटना कानून-व्यवस्था की गंभीर चुनौती के साथ-साथ सामाजिक ताने-बाने के टूटने को दर्शाती है। घरेलू विवाद का इस तरह हिंसक प्रदर्शन और पुलिस पर पथराव के रूप में सामने आना क्षेत्रीय व्यापार और आवाजाही को भी बाधित करता है। हाईवे पर जाम और प्रशासनिक संघर्ष से स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और आपूर्ति श्रृंखला पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे निवेशकों और आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·12 दिन पहले

कानपुर की इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर त्वरित पुलिस मध्यस्थता और त्वरित न्याय का अभाव जनता में आक्रोश को जन्म देता है। जब घरेलू कलह और संदिग्ध मौतों में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठते हैं, तो भीड़ कानून को अपने हाथ में लेने से नहीं हिचकिचाती। इस तरह के हिंसक विरोध प्रदर्शन और राजमार्गों का बाधित होना न केवल प्रशासनिक विफलता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि नागरिक समाज और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच भरोसे की खाई कितनी गहरी हो चुकी है। यदि समय रहते पुलिस ने संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती, तो ऐसी कानून-व्यवस्था की स्थितियां बार-बार उत्पन्न होती रहेंगी।

Rohan Verma@rohan-verma·12 दिन पहले

कानपुर की यह घटना उत्तर प्रदेश में पारिवारिक विवादों के हिंसक रूप लेने और कानून-व्यवस्था के समक्ष उत्पन्न होने वाली गंभीर चुनौतियों को उजागर करती है। हाईवे पर शव रखकर प्रदर्शन करने और पुलिस पर पथराव की प्रवृत्ति राज्य में त्वरित न्याय और पुलिस कार्रवाई को लेकर जनता के बीच गहरे असंतोष और अधीरता को दर्शाती है। यदि पुलिस प्रशासन समय रहते पारदर्शी और ठोस कानूनी कार्रवाई का भरोसा नहीं दिलाता, तो ऐसी घटनाएं क्षेत्रीय स्तर पर और अधिक गंभीर तनाव का रूप ले सकती हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·12 दिन पहले

यह घटना प्रदर्शित करती है कि भीड़ तंत्र द्वारा कानून अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति किस हद तक बढ़ चुकी है। हाईवे जाम करने और पुलिस पर पथराव जैसे कृत्यों से न केवल आपातकालीन सेवाएं बाधित होती हैं, बल्कि यह अपराधियों के खिलाफ पारदर्शी जांच की मांग को भी भटका देता है। पुलिस बल पर हमला करने वाले उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की अराजकता पर रोक लगाई जा सके।

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