सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश की बड़ी जीत, बीबीएमबी विवाद सुलझा, सालाना 1000 करोड़ तक का होगा फायदातकनीकी दबाव में फिसला यूरो, अमेरिकी डॉलर के सामने 1.1200 का अहम स्तर टूटामहज 100 रुपये से शुरू किया कारोबार, अब लाखों की कमाई कर रहे हैं मुरादाबाद के मोहम्मद फिरोजओबीसी क्रीमी लेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, केंद्र सरकार की अर्जी खारिजहिमाचल के सम्मू गांव में दिवाली पर क्यों पसरा रहता है सन्नाटा, जानिए सात पीढ़ियों से चली आ रही अनूठी परंपराराजस्थान में बीजेपी की स्थाई सत्ता का मदन राठौड़ ने जताया भरोसा, डोटासरा और गहलोत पर किए तीखे प्रहारझालावाड़ में मिलावट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, तीन हजार किलो संदिग्ध मावा सीज और मिठाइयां नष्टअमेज़न पर ₹699 की शुरुआती कीमत से मिल रहे रूम हीटर, ओरिएंट इलेक्ट्रिक और फास्ट्रॉन के मॉडलों पर भारी छूटबल्लभगढ़ बस स्टैंड पर बढ़ी बसों की संख्या, आगरा और अलीगढ़ जाने वालों के लिए राहतदिवाली 2026 पर संडे को होगी मुहूर्त ट्रेडिंग और 10 नवंबर को बंद रहेगा शेयर बाजार, नया शेड्यूल जारी
कांगड़ा के ज्वालामुखी अस्पताल में प्रसव के बाद 23 वर्षीय महिला ने तोड़ा दम, परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोपहिमाचल प्रदेश
25 सित॰ 2026, 9:41 am (42 दिन पहले)· 0

कांगड़ा के ज्वालामुखी अस्पताल में प्रसव के बाद 23 वर्षीय महिला ने तोड़ा दम, परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप

कांगड़ा के ज्वालामुखी अस्पताल में बेटे को जन्म देने के बाद अधिक रक्तस्राव से पीड़ित 23 वर्षीय महिला की टांडा मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में देरी और लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले स्थित ज्वालामुखी नागरिक अस्पताल में प्रसव के कुछ ही घंटों बाद एक 23 वर्षीय महिला की अचानक तबीयत बिगड़ने और फिर टांडा मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ने का दुखद मामला सामने आया है। जच्चा की जान जाने के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के बाहर जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रशासन और ड्यूटी पर मौजूद कर्मियों के खिलाफ नारेबाजी की। पीड़ित परिवार ने उपचार में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।

बुधवार सुबह अस्पताल में भर्ती हुई थी महिला, शाम को हुआ था प्रसव

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मृतका की शिनाख्त 23 वर्षीय त्रिकला देवी के तौर पर हुई है, जो मझीन क्षेत्र के तरीड़ी गांव निवासी दीपक डोगरा की पत्नी थीं। परिजनों ने बताया कि त्रिकला देवी को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद बुधवार सुबह करीब 5 बजे ज्वालामुखी अस्पताल लाया गया था, जहां उन्हें भर्ती कर लिया गया। पूरे दिन चले चिकित्सकीय परीक्षण के उपरांत शाम लगभग साढ़े 3 बजे सामान्य प्रक्रिया से महिला की डिलीवरी हुई। महिला ने एक पूर्णतः स्वस्थ नवजात बेटे को जन्म दिया, जिससे परिवार में उत्सव का माहौल बन गया था।

ये भी पढ़ें

शिशु के जन्म के तुरंत बाद तय नियमों के तहत प्रसूता को निगरानी कक्ष में शिफ्ट किया गया। परिजनों और अस्पताल के बयानों के अनुसार, प्रसव के लगभग एक घंटे बाद अचानक महिला के शरीर से अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। देखते ही देखते उसकी शारीरिक स्थिति तेजी से गिरने लगी, जिसके बाद अस्पताल में मौजूद मेडिकल टीम ने उसे संभालने की प्रक्रिया शुरू की।

रेफर करने में देरी का आरोप, परिजनों ने खड़े किए गंभीर सवाल

मृतका के परिजनों का सीधा आरोप है कि डिलीवरी के बाद महिला का खून बहना लगातार जारी रहा, लेकिन स्थानीय स्तर पर स्थिति पर काबू नहीं पाया जा सका। परिजनों का तर्क है कि यदि ज्वालामुखी अस्पताल के पास ऐसे गंभीर रक्तस्राव को नियंत्रित करने के समुचित संसाधन या विशेषज्ञ नहीं थे, तो महिला को समय रहते उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए क्यों नहीं भेजा गया।

परिजनों का कहना है कि जब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई, तब जाकर आनन-फानन में महिला को डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा रेफर किया गया। वहां पहुंचने के बाद उपचार के दौरान डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद महिला ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिजनों का सब्र टूट गया और उन्होंने स्वास्थ्य प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

बीएमओ बोले- डिलीवरी के बाद हुआ पोस्टपार्टम हैमरेज, लिखित शिकायत पर शुरू हुई जांच

ज्वालामुखी अस्पताल के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. पवन शर्मा ने मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि महिला की डिलीवरी शाम करीब साढ़े 3 बजे हुई थी और उसके बाद उसे निर्धारित निगरानी में रखा गया था। प्रसव के करीब एक घंटे बाद उसे अचानक भारी ब्लीडिंग शुरू हुई, जिसे चिकित्सकीय भाषा में पोस्टपार्टम हैमरेज (PPH) कहा जाता है।

बीएमओ ने स्पष्ट किया कि जब किसी प्रसूता की हालत अचानक बिगड़ती है, तो प्रोटोकॉल के मुताबिक पहले स्थानीय अस्पताल में जरूरी दवाएं देकर उसे स्थिर करने का हरसंभव प्रयास किया जाता है ताकि मरीज रास्ते में झटके झेल सके। स्टाफ और डॉक्टरों ने ब्लीडिंग रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन रक्तस्राव न थमने के कारण मरीज को बेहतर आपातकालीन सेवाओं के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था।

डॉ. पवन शर्मा ने आगे बताया कि परिजनों की मांग पर उनसे लिखित शिकायत प्राप्त कर ली गई है और उन्हें उचित कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। डिलीवरी कक्ष से लेकर रेफरल तक के पूरे घटनाक्रम, महिला को दिए गए इंजेक्शन और दवाओं, उसकी शारीरिक स्थिति और रेफर करने के समय के सभी मेडिकल रिकॉर्ड्स की गहनता से तकनीकी जांच की जाएगी।

दो साल पहले हुई थी शादी, नवजात के सिर से उठा मां का साया

पारिवारिक पृष्ठभूमि के अनुसार, त्रिकला देवी की शादी लगभग दो वर्ष पूर्व दीपक डोगरा के साथ हुई थी। दीपक पेशे से दिहाड़ी मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पहले बच्चे के रूप में बेटे के जन्म से घर में अपार खुशियां आई थीं, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर मां की असमय मृत्यु ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। नवजात शिशु के जन्म लेते ही उसके सिर से ममता का साया उठ गया है। पुलिस जिला देहरा के संदीप धवल ने मामले की पुष्टि करते हुए आश्वस्त किया है कि परिजनों के आरोपों और मेडिकल रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कर कानूनी पहलुओं को स्पष्ट किया जाएगा।

सवाल-जवाब

ज्वालामुखी अस्पताल में किस महिला की मृत्यु हुई है?
मृतका की पहचान 23 वर्षीय त्रिकला देवी के रूप में हुई है, जो मझीन क्षेत्र के तरीड़ी गांव निवासी दीपक डोगरा की पत्नी थीं।
महिला को अस्पताल में कब भर्ती कराया गया था और प्रसव कब हुआ?
त्रिकला देवी को बुधवार सुबह लगभग 5 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था और शाम करीब 3:30 बजे उन्होंने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।
प्रसव के बाद महिला की तबीयत कैसे बिगड़ी?
डिलीवरी के लगभग एक घंटे बाद महिला को अचानक अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया, जिसे डॉक्टरों ने पोस्टपार्टम हैमरेज बताया।
परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर क्या आरोप लगाए हैं?
परिजनों का आरोप है कि अत्यधिक ब्लीडिंग के बावजूद महिला को समय रहते उच्च संस्थान रेफर नहीं किया गया और इलाज में लापरवाही बरती गई।
अस्पताल के बीएमओ डॉ. पवन शर्मा का क्या पक्ष है?
बीएमओ ने बताया कि स्टाफ ने ब्लीडिंग रोकने और मरीज को स्थिर करने का प्रयास किया था, जिसके बाद उसे टांडा रेफर किया गया और मामले की जांच की जा रही है।
पुलिस और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठा रहे हैं?
पुलिस जिला देहरा के संदीप धवल ने पुष्टि की है कि परिजनों की लिखित शिकायत और मेडिकल रिकॉर्ड्स की निष्पक्ष जांच की जाएगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·42 दिन पहले

सुबह पांच बजे अस्पताल लाई गई महिला का प्रसव दोपहर साढ़े तीन बजे हुआ। इतने लंबे समय तक सिर्फ इंतजार करना ही शायद उस परिवार की सबसे बड़ी बदनसीबी बन गया।

Arjun Mehta@arjun-mehta·42 दिन पहले

सरकारी अस्पतालों का हाल देखकर डर लगता है। पिछले साल मेरी बहन के यहाँ भी डिलीवरी के वक्त ऐसा ही ड्रामा हुआ था, डॉक्टर वक्त पर कुछ नहीं बताते।

Ravikash Gupta@ravikash·42 दिन पहले

अर्जुन, आपकी बात डरावनी है। पर क्या टांडा भेजने से पहले सच में कोई और रास्ता नहीं था?

Rohan Verma@rohan-verma·42 दिन पहले

डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग तो कई बार अचानक शुरू हो जाती है, डॉक्टरों को तुरंत दोषी मानना ठीक नहीं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·42 दिन पहले

रोहन, ब्लीडिंग अचानक शुरू होना एक मेडिकल इमरजेंसी है, पर क्या डॉक्टर को तुरंत टांडा रेफर नहीं करना चाहिए था जब हालत बिगड़ने लगी थी?

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp