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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीपक बाबरिया का शनिवार को निधन, कई राज्यों में संभाली थी संगठन की कमानहरियाणा
10 अक्तू॰ 2026, 12:49 pm (27 दिन पहले)· 3

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीपक बाबरिया का शनिवार को निधन, कई राज्यों में संभाली थी संगठन की कमान

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हरियाणा व मध्य प्रदेश के पूर्व प्रभारी दीपक बाबरिया का 10 अक्टूबर को निधन हो गया। उन्होंने संगठन में विभिन्न राज्यों के स्तर पर केंद्रीय नेतृत्व और प्रादेशिक इकाइयों के बीच समन्वय की अहम जिम्मेदारी निभाई थी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के पूर्व प्रभारी दीपक बाबरिया का शनिवार, 10 अक्टूबर को निधन हो गया। उनके निधन से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल है। बाबरिया ने अपने राजनीतिक जीवन में कांग्रेस संगठन के भीतर कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं और विभिन्न राज्यों में पार्टी की संगठनात्मक संरचना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्वहन

दीपक बाबरिया कांग्रेस के उन अनुभवी नेताओं में गिने जाते थे, जिन्हें पार्टी आलाकमान समय-समय पर अलग-अलग राज्यों में संगठन के कामकाज और समन्वय को दुरुस्त करने का जिम्मा सौंपता था। मध्य प्रदेश में भी वह कांग्रेस के प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्य स्तर के नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और सांगठनिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर काम किया।

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जून 2023 में मिली थी हरियाणा और दिल्ली की कमान

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जून 2023 में दीपक बाबरिया को हरियाणा और दिल्ली का पार्टी प्रभारी नियुक्त किया था। इस दोहरी जिम्मेदारी के तहत उन्हें दोनों प्रमुख राज्यों में संगठन की कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित करने और स्थानीय नेतृत्व के साथ केंद्रीय नेतृत्व का संवाद साधने का दायित्व दिया गया था। कांग्रेस व्यवस्था में राज्य प्रभारी का पद बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि वे प्रदेश इकाई और राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच मुख्य सेतु के रूप में कार्य करते हैं।

विधानसभा चुनाव के बाद इस्तीफे की पेशकश

हरियाणा में प्रभारी पद पर रहते हुए दीपक बाबरिया विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारियों और संगठनात्मक फैसलों में पूरी तरह सक्रिय रहे। हालांकि, अक्टूबर 2024 में जब हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे आए और कांग्रेस को जीत नहीं मिल सकी, तब उन्होंने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। उन्होंने अपने खराब स्वास्थ्य और चुनावी परिणामों की नैतिक जिम्मेदारी को इस कदम की मुख्य वजह बताया था। बाबरिया ने पार्टी नेतृत्व से आग्रह किया था कि उनकी जगह किसी अन्य नेता को यह प्रभार सौंपा जा सकता है और इस संबंध में अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ दिया था।

कांग्रेस संगठन में लंबा और समर्पित अनुभव

दीपक बाबरिया की पहचान कांग्रेस संगठन में गहराई से जुड़े एक समर्पित नेता के रूप में थी। अलग-अलग राज्यों में महत्वपूर्ण दायित्व संभालने के कारण उन्हें जमीनी राजनीति और संगठनात्मक ढांचे का व्यापक अनुभव था। हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे अहम राज्यों में उनके काम की वजह से वह राज्य स्तरीय राजनीति और पार्टी के आंतरिक गलियारों में एक प्रमुख चेहरा बने रहे।

सवाल-जवाब

दीपक बाबरिया का निधन कब हुआ?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीपक बाबरिया का निधन शनिवार, 10 अक्टूबर को हुआ।
दीपक बाबरिया को जून 2023 में कांग्रेस ने क्या जिम्मेदारी दी थी?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जून 2023 में उन्हें हरियाणा और दिल्ली का पार्टी प्रभारी नियुक्त किया था।
दीपक बाबरिया ने किन अन्य प्रमुख राज्यों में पार्टी प्रभारी के रूप में काम किया था?
उन्होंने हरियाणा और दिल्ली के अलावा मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस संगठन के प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी निभाई थी।
दीपक बाबरिया ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश क्यों की थी?
उन्होंने अक्टूबर 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद अपने खराब स्वास्थ्य और नैतिक जिम्मेदारी के चलते पद छोड़ने की पेशकश की थी।
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टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·26 दिन पहले

दीपक बाबरिया के निधन से कांग्रेस संगठन को बड़ा झटका लगा है। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद उन्होंने आखिरी समय तक जिम्मेदारी निभाई, लेकिन क्या पार्टी अब उनकी कमी को समय पर पूरा कर पाएगी?

Ravikash Gupta@ravikash·26 दिन पहले

दीपक बाबरिया जी का जाना कांग्रेस संगठन के लिए बड़ा नुकसान है। उन्होंने खराब सेहत के बावजूद हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे अहम राज्यों में पूरी निष्ठा से काम किया। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·26 दिन पहले

रविकेश जी, बात सही है आपकी, पर मुझे थोड़ा शक है कि सिर्फ खराब सेहत या नैतिक जिम्मेदारी ही वजह थी। चुनाव के बाद पार्टी के अंदरखाने का दबाव भी तो रहा होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·26 दिन पहले

दीपक जी से कुछ साल पहले लखनऊ में एक संगठनात्मक बैठक के दौरान मिलने का मौका मिला था। तब उनकी सादगी और कार्यकर्ताओं की बात सुनने का तरीका देखकर बहुत अच्छा लगा था। आज उनके जाने की खबर सुनकर वाकई बहुत दुख हुआ, राजनीति में ऐसे जमीन से जुड़े नेता अब कम ही मिलते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 दिन पहले

रोहन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। ज़मीनी और सहज नेताओं का यूं जाना संगठन के लिए बहुत बड़ा नुक़सान है।

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