सूखे की मार झेल रहे कर्नाटक के किसान एक बार फिर कावेरी नदी के पानी को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। दिल्ली में हुई कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया, और इस आदेश ने राज्यभर के किसान संगठनों को गुस्से में ला खड़ा किया है। खास बात यह है कि अब तक इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार को घेरता रहा है, लेकिन इस बार खुद किसान अपनी ही कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। मांड्या, श्रीरंगपट्टना और मैसूर जैसे इलाकों में प्रदर्शन इतने तीखे हुए कि कहीं टायर जलाने की कोशिश हुई तो कहीं प्रदर्शनकारी खुद को नुकसान पहुंचाने की हद तक चले गए।
सूखे के बीच पानी छोड़ने के आदेश से उबाल
किसानों की दलील है कि जब कर्नाटक के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात हैं और कहीं-कहीं पीने के पानी तक की किल्लत हो रही है, तब तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ना राज्य के हितों के साथ सीधा खिलवाड़ होगा। दूसरी तरफ राज्य सरकार की मुश्किल यह है कि उसे कानूनी दायित्व और अदालती आदेशों के बीच संतुलन बनाना है। लेकिन किसान इस संतुलन को मानने को तैयार नहीं हैं, यही वजह है कि मांड्या, श्रीरंगपट्टना और मैसूर में विरोध की आग तेजी से फैल गई। किसान संगठनों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ा गया तो आंदोलन और उग्र रूप ले लेगा। इसका सीधा असर कांग्रेस सरकार पर बढ़ते राजनीतिक दबाव के रूप में दिख रहा है।
मांड्या में नारेबाजी से लेकर टायर और डीजल तक पहुंचा गुस्सा
प्राधिकरण की उच्चस्तरीय बैठक के फैसले के सामने आते ही मांड्या समेत कई जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। किसानों का आरोप है कि सूखे की स्थिति में सबसे पहले राज्य के लोगों और किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मांड्या के संजय सर्कल में किसानों ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसी दौरान एक प्रदर्शनकारी ने टायर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने वक्त रहते टायर जब्त कर लिया। मामला यहीं नहीं थमा, इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारी इतने आक्रोशित हो गए कि उन्होंने खुद पर डीजल डालने की कोशिश की। पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर डीजल की बोतल जब्त कर ली और प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की सलाह दी। इसी बीच श्रीरंगपट्टना में किसान सीधे नदी किनारे उतर गए और स्नान घाट के पास प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।
'एक बूंद पानी भी मत छोड़िए', किसान नेता की सख्त मांग
किसान नेता कुरुबुरु शांतकुमार ने राज्य सरकार से बिना देरी सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा, "पानी की एक बूंद भी नहीं छोड़ी जानी चाहिए, राज्य सरकार को तुरंत सर्वोच्च न्यायालय जाना चाहिए।" उनका कहना था कि राज्य में पीने के पानी का संकट पहले से गहरा चुका है और सूखे के हालात किसानों के लिए मुश्किल खड़ी कर रहे हैं, ऐसे में उन्होंने अगले दिन से सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन जारी रखने की बात भी कही। शांतकुमार के मुताबिक राज्य सरकार को किसानों के हितों की रक्षा करते हुए कानूनी लड़ाई लड़नी चाहिए और कावेरी जल नियमन समिति (CWRC) के आदेश को अदालत में चुनौती देनी चाहिए। किसान संगठनों का मानना है कि मौजूदा हालात में पानी छोड़ने का फैसला राज्य के लाखों किसानों के साथ सरासर अन्याय होगा।
मैसूर में भी उग्र आंदोलन की चेतावनी, सरकार की चिंता बढ़ी
विरोध की यह आंच मैसूर तक भी पहुंच गई, जहां कर्नाटक रक्षा वेदिका स्वाभिमानी बलगा के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के खिलाफ जमकर नारे लगाए। संगठन ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ा गया तो आंदोलन और भड़केगा। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि सरकार किसानों की भावनाओं को समझे और किसी भी परिस्थिति में राज्य के जल अधिकारों से समझौता न करे। इस तरह की चेतावनियों ने कांग्रेस सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, क्योंकि एक तरफ अदालती आदेश का पालन करने का दबाव है तो दूसरी तरफ अपने ही किसान वोट बैंक की नाराजगी झेलने की चुनौती है।
सरकार कानूनी विकल्पों पर मंथन में जुटी
बढ़ते विरोध के बीच उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कावेरी विवाद को लेकर कानूनी विशेषज्ञों से टेलीफोन पर बातचीत की और आगे की रणनीति पर चर्चा की। मिली जानकारी के मुताबिक सरकार ने फिलहाल रविवार तक पानी नहीं छोड़ने का फैसला किया है। इसके बाद एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें सभी दलों की राय लेकर अगला कदम तय किया जाएगा। यह भी माना जा रहा है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है, ताकि कावेरी जल नियमन समिति के आदेश के खिलाफ कानूनी राहत हासिल की जा सके।
'अधिकारी हमेशा तमिलनाडु के पक्ष में', कांग्रेस विधायक का भी आरोप
हैरानी की बात यह है कि सत्तारूढ़ कांग्रेस के अपने विधायक रवि गनिगा ने भी कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के फैसले पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, "कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारी हमेशा तमिलनाडु के पक्ष में रहे हैं।" गनिगा ने आगे कहा कि उनकी सरकार को किसी भी कारण से पानी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो उन्हें भी किसानों के साथ हाथ मिलाना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु के बांध में कर्नाटक से कहीं ज्यादा पानी मौजूद है। उन्होंने बताया कि वे मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पानी न छोड़ने का अनुरोध करेंगे, साथ ही यह भी आरोप लगाया कि प्राधिकरण के सभी अधिकारी तमिलनाडु के हैं और वे हमेशा उसी राज्य के पक्ष में फैसले लेते आए हैं। अपनी ही पार्टी के विधायक के इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया है। अब सबकी नजरें सरकार की अगली रणनीति, संभावित कानूनी कदम और आने वाली सर्वदलीय बैठक के नतीजों पर टिकी हैं।



















