सार्वजनिक रास्तों पर तेज रफ्तार में जानलेवा स्टंटबाजी करने और बीच सड़क पर केक काटकर उपद्रव मचाने की बढ़ती हरकतों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य शासन को निर्देश जारी किया है कि इस तरह के उपद्रव और उपद्रवियों से निपटने के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किया जाए। अदालत ने दो टूक शब्दों में रेखांकित किया कि सिर्फ मौखिक हिदायतें या सामान्य आदेश जारी कर देने भर से सड़क सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। जब तक एक स्पष्ट और लिखित नियमावली मौजूद नहीं होगी, तब तक मैदानी पुलिस और प्रशासनिक अमले के सामने कार्रवाई के दौरान उलझन बनी रहेगी।
स्पष्ट नियमों के अभाव में कार्रवाई पर पड़ता है असर
अदालत का मानना है कि जब तक नियम और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी तरह पारदर्शी नहीं होंगी, तब तक सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर उपद्रव मचाने वाले तत्वों पर सटीक कानूनी शिकंजा कसना संभव नहीं है। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को मौके पर सख्त कदम उठाने के लिए पूर्ण अधिकार और स्पष्ट प्रक्रिया की जरूरत होती है। एक सुव्यवस्थित गाइडलाइन लागू होने के बाद पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था लागू करने वाले अमले को यह साफ पता रहेगा कि ऐसे मामलों में क्या धाराएं लगानी हैं, जब्ती कैसे होगी और आरोपियों पर किस तरह का वैधानिक शिकंजा कसा जाना चाहिए।
बिलासपुर में 13 महीनों का चौंकाने वाला लेखा-जोखा
अदालत के समक्ष प्रस्तुत जनहित याचिका में बिलासपुर शहर के गंभीर आंकड़े रखे गए। बिलासपुर में पिछले 13 महीनों के अंतराल में इस तरह के 26 से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इन आंकड़ों के बारीक विश्लेषण से पता चलता है कि इनमें से 19 मामले सड़कों पर जानलेवा स्टंटबाजी और खतरनाक ड्राइविंग से जुड़े हुए थे। वहीं दूसरी तरफ, रात में या व्यस्त रास्तों पर गाड़ियों की बोनट पर केक काटकर जन्मदिन मनाने और हुड़दंग करने से जुड़े 8 मामले सामने आए हैं।
दर्जनों गाड़ियां जब्त और 80 से अधिक लोगों पर कानूनी शिकंजा
सड़क पर उत्पात मचाने वालों के खिलाफ पुलिस ने अभियान चलाकर कार्रवाई भी की है। बिलासपुर में दर्ज मामलों के तहत अब तक 47 वाहनों को जब्त किया गया है। इसके अलावा 80 से ज्यादा आरोपी पुलिस की कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं। यह कार्रवाई यह साबित करती है कि स्थानीय स्तर पर पुलिस समस्या की गंभीरता को समझ रही है, लेकिन अदालत का जोर इस बात पर है कि यह सख्ती केवल एक शहर तक सीमित न रहे बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में एक समान, पारदर्शी और निरंतर व्यवस्था के रूप में लागू हो।
यातायात बाधित होने और हादसों के खतरे पर अदालत की चिंता
सार्वजनिक मार्ग पर स्टंटबाजी करना या बीच सड़क पर गाड़ियों का काफिला रोककर जश्न मनाना न केवल सामान्य आवाजाही को बुरी तरह ठप करता है, बल्कि अन्य राहगीरों की जान को भी भारी खतरे में डाल देता है। ऐसे गैर-जिम्मेदाराना कारनामों के चलते कई बार भीषण सड़क दुर्घटनाएं घटित हो जाती हैं, जिससे बेकसूर नागरिक अपनी जान गंवा बैठते हैं। इसी गंभीर स्थिति को भांपते हुए अदालत ने शासन को नीतिगत स्तर पर दखल देने का फरमान सुनाया है। अब राज्य सरकार को नई गाइडलाइन बनाकर यह तय करना होगा कि पुलिस को क्या विशेष अधिकार मिलेंगे और ऐसे हुड़दंगियों पर किस तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।























