पारंपरिक खेती की लागत को कम करने के लिए बोकारो के एक किसान ने एक बेहद किफायती और अनोखा तरीका अपनाया है। उन्होंने महंगे बांस खरीदने के बजाय आसपास के पेड़ों की सूखी टहनियों से ही मचान तैयार कर डाली, जिससे उनकी खेती का खर्च काफी हद तक घट गया और उन्हें नेनुआ की फसल से बंपर कमाई हासिल हुई। खेती-किसानी के क्षेत्र में यह अनूठा प्रयोग अब आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और अन्य किसानों के लिए भी एक मिसाल पेश कर रहा है।
पारंपरिक खेती और कम लागत का गणित
बोकारो जिले के रहने वाले किसान कंचन गोराई का संबंध एक ऐसे परिवार से है, जहां पीढ़ियों से खेती की जाती आ रही है। उन्होंने करीब 70 डिसमिल जमीन पर मचान विधि का उपयोग करते हुए नेनुआ की फसल उगाई है। कंचन गोराई ने इसी साल जून के महीने में खेतों में नेनुआ के बीजों की रोपाई की थी। सामान्य तौर पर इस फसल को तैयार होने में लगभग 40 से 45 दिनों का समय लगता है। इस पूरी 70 डिसमिल जमीन पर खेती करने में उनकी कुल लागत महज 10 हजार रुपये के आसपास आई। सबसे खास बात यह रही कि बांस के महंगे होने के कारण उन्होंने बांस का विकल्प ढूंढते हुए पुराने पेड़ों की टहनियों का इस्तेमाल किया, जिससे उन्हें सीधे तौर पर लगभग 5000 रुपये की बड़ी बचत करने में मदद मिली।
मचान विधि अपनाने के फायदे
मचान खेती के फायदों पर प्रकाश डालते हुए कंचन गोराई ने बताया कि मानसून के मौसम में खेतों में नमी और जलभराव की समस्या आम हो जाती है। ऐसी स्थिति में जमीन पर फैलने वाली सब्जियों की फसलों के सड़ने या खराब होने की आशंका काफी ज्यादा बढ़ जाती है। यही वजह है कि नेनुआ जैसी बेल वाली फसलों के लिए मचान विधि बेहद उपयोगी और कारगर साबित होती है। इस तकनीक की मदद से नेनुआ के पौधों को जमीन के सीधे संपर्क में आने से बचाया जा सकता है, जिससे फल साफ-सुथरे रहते हैं और पौधों का फैलाव भी बहुत ही बेहतरीन तरीके से होता है।
उत्पादन और बंपर कमाई का पूरा हिसाब
करीब 70 डिसमिल के भूभाग पर नेनुआ की खेती करने पर औसतन 50 से 60 क्विंटल तक का बंपर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। मौजूदा समय में बाजार में नेनुआ का भाव लगभग 25 रुपये प्रति किलो तक चल रहा है। यदि न्यूनतम 50 क्विंटल उत्पादन को भी 25 रुपये प्रति किलो के औसत भाव से बाजार में बेचा जाए, तो कुल बिक्री का आंकड़ा लगभग 1.25 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। इस कुल आमदनी में से करीब 10 हजार रुपये की कुल लागत को घटा दिया जाए, तो किसान कंचन गोराई को लगभग 1.15 लाख रुपये का शुद्ध सकल लाभ प्राप्त होता है।
कीट नियंत्रण और खेती की जरूरी सलाह
अपनी इस सफल खेती के अनुभव को साझा करते हुए किसान कंचन गोराई ने अन्य किसानों को भी कुछ जरूरी सलाह दी है। उनका कहना है कि नेनुआ की फसल में अक्सर पत्तियों के ऊपर कीटों का प्रकोप बहुत ज्यादा देखने को मिलता है। इससे फसल को बचाने के लिए जरूरी है कि समय रहते कृषि विशेषज्ञों से परामर्श लिया जाए और उनकी सलाह के अनुसार सही समय पर जैविक कीटनाशकों का छिड़काव किया जाए ताकि फसल सुरक्षित रहे और बंपर पैदावार मिलती रहे।



















