साल 2026 में कब है गणेश चतुर्थी, जानिए महाराष्ट्र के अलावा देश के 8 राज्यों में कैसे मनाई जाती है बप्पा की आराधनाअजमेर के खोड़ा गणेश मंदिर का है अनोखा इतिहास, तालाब के पास ऐसे प्रकट हुई थी प्रतिमाग्लोबल साउथ क्या है और ब्रिक्स देशों के लिए इसकी मांगें क्यों हैं इतनी अहम?मूलांक 4 राशिफल 13 सितंबर 2026: छोटी अड़चनों को न करें नजरअंदाज, समझदारी और संयम से सुलझाएं दिनभर के कामकर्मचारी चयन आयोग ने एसएससी सीजीएल 2026 के लिए शेड्यूल जारी किया, परीक्षा नियमों में बड़े बदलावरांची में आज 12 घंटे नहीं मिलेगा पानी, हटिया पाइपलाइन की मरम्मत के कारण इन इलाकों में सप्लाई ठपलाइव: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में परमाणु संकट और संघर्ष की बढ़ती आशंकाओं पर वैश्विक नेताओं की चिंताबरसात में टेरेस गार्डन के पौधों को सफेद कीड़ों और सड़न से कैसे बचाएं? आजमाएं ये आसान घरेलू तरीकेदार्जिलिंग की रितु चौधरी कैसे बनीं 'परदेस गर्ल' महिमा चौधरी, जानें एक हादसे ने कैसे बदली उनकी किस्मतउत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी से समय से पहले ठंड की दस्तक, देहरादून समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
बोकारो के किसान ने खोजा नायाब तरीका, पेड़ की टहनियों से मचान बनाकर नेनुआ की खेती में कमाया बंपर मुनाफाझारखंड
13 सित॰ 2026, 7:39 am (1 घंटे पहले)· 0

बोकारो के किसान ने खोजा नायाब तरीका, पेड़ की टहनियों से मचान बनाकर नेनुआ की खेती में कमाया बंपर मुनाफा

बोकारो के एक किसान ने कंचन गोराई ने पारंपरिक बांस की जगह पेड़ों की पुरानी टहनियों का इस्तेमाल करके कम लागत में नेनुआ की खेती की है और महज 10 हजार रुपये लगाकर 1.15 लाख रुपये का शानदार मुनाफा कमाया है।

पारंपरिक खेती की लागत को कम करने के लिए बोकारो के एक किसान ने एक बेहद किफायती और अनोखा तरीका अपनाया है। उन्होंने महंगे बांस खरीदने के बजाय आसपास के पेड़ों की सूखी टहनियों से ही मचान तैयार कर डाली, जिससे उनकी खेती का खर्च काफी हद तक घट गया और उन्हें नेनुआ की फसल से बंपर कमाई हासिल हुई। खेती-किसानी के क्षेत्र में यह अनूठा प्रयोग अब आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और अन्य किसानों के लिए भी एक मिसाल पेश कर रहा है।

पारंपरिक खेती और कम लागत का गणित

बोकारो जिले के रहने वाले किसान कंचन गोराई का संबंध एक ऐसे परिवार से है, जहां पीढ़ियों से खेती की जाती आ रही है। उन्होंने करीब 70 डिसमिल जमीन पर मचान विधि का उपयोग करते हुए नेनुआ की फसल उगाई है। कंचन गोराई ने इसी साल जून के महीने में खेतों में नेनुआ के बीजों की रोपाई की थी। सामान्य तौर पर इस फसल को तैयार होने में लगभग 40 से 45 दिनों का समय लगता है। इस पूरी 70 डिसमिल जमीन पर खेती करने में उनकी कुल लागत महज 10 हजार रुपये के आसपास आई। सबसे खास बात यह रही कि बांस के महंगे होने के कारण उन्होंने बांस का विकल्प ढूंढते हुए पुराने पेड़ों की टहनियों का इस्तेमाल किया, जिससे उन्हें सीधे तौर पर लगभग 5000 रुपये की बड़ी बचत करने में मदद मिली।

ये भी पढ़ें

मचान विधि अपनाने के फायदे

मचान खेती के फायदों पर प्रकाश डालते हुए कंचन गोराई ने बताया कि मानसून के मौसम में खेतों में नमी और जलभराव की समस्या आम हो जाती है। ऐसी स्थिति में जमीन पर फैलने वाली सब्जियों की फसलों के सड़ने या खराब होने की आशंका काफी ज्यादा बढ़ जाती है। यही वजह है कि नेनुआ जैसी बेल वाली फसलों के लिए मचान विधि बेहद उपयोगी और कारगर साबित होती है। इस तकनीक की मदद से नेनुआ के पौधों को जमीन के सीधे संपर्क में आने से बचाया जा सकता है, जिससे फल साफ-सुथरे रहते हैं और पौधों का फैलाव भी बहुत ही बेहतरीन तरीके से होता है।

उत्पादन और बंपर कमाई का पूरा हिसाब

करीब 70 डिसमिल के भूभाग पर नेनुआ की खेती करने पर औसतन 50 से 60 क्विंटल तक का बंपर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। मौजूदा समय में बाजार में नेनुआ का भाव लगभग 25 रुपये प्रति किलो तक चल रहा है। यदि न्यूनतम 50 क्विंटल उत्पादन को भी 25 रुपये प्रति किलो के औसत भाव से बाजार में बेचा जाए, तो कुल बिक्री का आंकड़ा लगभग 1.25 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। इस कुल आमदनी में से करीब 10 हजार रुपये की कुल लागत को घटा दिया जाए, तो किसान कंचन गोराई को लगभग 1.15 लाख रुपये का शुद्ध सकल लाभ प्राप्त होता है।

कीट नियंत्रण और खेती की जरूरी सलाह

अपनी इस सफल खेती के अनुभव को साझा करते हुए किसान कंचन गोराई ने अन्य किसानों को भी कुछ जरूरी सलाह दी है। उनका कहना है कि नेनुआ की फसल में अक्सर पत्तियों के ऊपर कीटों का प्रकोप बहुत ज्यादा देखने को मिलता है। इससे फसल को बचाने के लिए जरूरी है कि समय रहते कृषि विशेषज्ञों से परामर्श लिया जाए और उनकी सलाह के अनुसार सही समय पर जैविक कीटनाशकों का छिड़काव किया जाए ताकि फसल सुरक्षित रहे और बंपर पैदावार मिलती रहे।

सवाल-जवाब

कंचन गोराई ने नेनुआ की खेती कितने क्षेत्रफल में की है?
कंचन गोराई ने करीब 70 डिसमिल जमीन पर नेनुआ की खेती की है।
मचान तैयार करने के लिए उन्होंने किस चीज का इस्तेमाल किया?
उन्होंने महंगे बांस खरीदने के बजाय पुराने पेड़ों की टहनियों का इस्तेमाल करके मचान तैयार किया।
नेनुआ की फसल तैयार होने में कितना समय लगता है?
सामान्य तौर पर नेनुआ की फसल लगभग 40 से 45 दिनों में तैयार हो जाती है।
इस खेती में कुल कितनी लागत आई और कितनी बचत हुई?
इस खेती में कुल 10 हजार रुपये की लागत आई और टहनियों का इस्तेमाल करने से करीब 5000 रुपये की बचत हुई।
70 डिसमिल जमीन से कुल कितना मुनाफा हुआ?
लागत घटाने के बाद किसान को लगभग 1.15 लाख रुपये का सकल लाभ मिला।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR