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खराब मौसम की चेतावनी के बावजूद उड़ान की मंजूरी से चमोली हादसे पर बढ़ा विवादउत्तराखंड
1 नव॰ 2026, 3:00 pm (5 दिन पहले)· 2

खराब मौसम की चेतावनी के बावजूद उड़ान की मंजूरी से चमोली हादसे पर बढ़ा विवाद

ऑरेंज अलर्ट के बीच हेलीकॉप्टर उड़ान की इजाजत मिलने के बाद उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

उत्तराखंड के चमोली जिले में हुए हालिया हेलीकॉप्टर हादसे के बाद उड्डयन सुरक्षा से जुड़े नियमों और प्रशासनिक फैसलों पर तीखी बहस शुरू हो गई है। अलग-अलग जांच एजेंसियां दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पड़ताल में जुटी हैं, लेकिन सबसे बड़ा विवाद मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बावजूद उड़ान भरने की अनुमति जारी करने को लेकर पैदा हुआ है। इस पूरे मामले में उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण यानी यूकाडा की भूमिका कठघरे में आ गई है, जहां संवेदनशील विभाग होने के बावजूद उच्च स्तर पर लगातार लापरवाही बरते जाने के आरोप सामने आ रहे हैं।

साल 2009 से 2026 तक का सुरक्षा रिकॉर्ड

चारधाम यात्रा के इस वर्तमान सीजन में भले ही यह पहला बड़ा हादसा दर्ज किया गया हो, लेकिन राज्य का उड्डयन इतिहास बेहद चिंताजनक आंकड़े बयां करता है। साल 2009 से लेकर 2026 के बीच उत्तराखंड में कुल 15 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं घटित हो चुकी हैं। इसके अलावा कई ऐसे मौके भी आए हैं जब पायलटों को जान बचाने के लिए जोखिम भरी परिस्थितियों में हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। ऐसे में जब मौसम विभाग ने पहले ही ऑरेंज अलर्ट जारी कर रखा था, तब उड़ान की हरी झंडी देना सुरक्षा तंत्र पर सीधा सवाल उठाता है।

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प्रशासनिक कार्यप्रणाली और अधिकारियों की भूमिका

शुक्रवार को हुए इस हादसे की तकनीकी और प्रशासनिक जांच जारी है, मगर बेहद खराब मौसमी परिस्थितियों में परमिशन जारी करने वाले जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही से आंखें नहीं मूंदी जा सकतीं। यूकाडा के कामकाज को लेकर पूर्व में भी प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता की कमी देखी गई है। देहरादून की पूर्व डीएम सोनिका का कार्यकाल रहा हो या फिर देहरादून के मौजूदा डीएम आशीष चौहान का समय, दोनों ही दौर में हेलीकॉप्टर हादसों से जुड़े विवाद चर्चा के केंद्र में रहे हैं। इस अतिसंवेदनशील विभाग में मामूली चूक भी भयानक मानवीय त्रासदी का रूप ले लेती है।

एविएशन सेक्टर की चिंता और पोस्टिंग से जुड़ी धारणा

हादसे के बाद यूकाडा के सीईओ जांच कराने का भरोसा दे रहे हैं। मौसम की स्थिति पर सफाई देते हुए उन्होंने बताया कि शुक्रवार को दोपहर 12 बजे प्रतिकूल मौसम के चलते उड़ान संचालित नहीं की गई थी। दूसरी तरफ एविएशन सेक्टर से जुड़े जानकारों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासनिक हलकों में यूकाडा को एक सजा वाली पोस्टिंग की तरह देखा जाता है। हालांकि इस विभाग में सुधार और काम की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन अधिकारियों में इसे लेकर अनिच्छा साफ दिखाई देती है। क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस तकनीकी विभाग की जिम्मेदारी केवल विमानन क्षेत्र की गहरी समझ रखने वाले अनुभवी लोगों को ही सौंपी जानी चाहिए।

मौसम अपडेट में देरी और रियल-टाइम सिस्टम की मांग

पहाड़ी घाटियों में उड़ान भरने वाले अनुभवी पायलटों का कहना है कि घाटी में मौसम पल-पल बदलता है, जिसके लिए आधुनिक तकनीक और रियल-टाइम सूचना तंत्र बेहद जरूरी है। पायलटों के मुताबिक प्रत्येक 10 मिनट के भीतर मौसम का ताजा अपडेट कॉकपिट तक पहुंचना अनिवार्य होना चाहिए। हकीकत यह है कि कई बार पायलटों को एक-एक घंटे पुरानी मौसम रिपोर्ट के आधार पर उड़ान का जोखिम उठाना पड़ता है। यह दुर्घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि नियमों की अनदेखी, अफसरों की जवाबदेही और खानापूर्ति वाली जांच प्रक्रियाओं पर एक कड़ा सवाल है।

सवाल-जवाब

चमोली में हाल ही में किस तरह की घटना सामने आई है?
चमोली में एक हेलीकॉप्टर क्रैश की घटना हुई है, जिसकी जांच विभिन्न एजेंसियां कर रही हैं।
हादसे के बाद यूकाडा पर मुख्य आरोप क्या है?
यूकाडा पर मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बावजूद हेलीकॉप्टर उड़ान की मंजूरी देने का गंभीर आरोप है।
वर्ष 2009 से 2026 के दौरान उत्तराखंड में कितने हेलीकॉप्टर हादसे हुए हैं?
इस अवधि के दौरान उत्तराखंड में कुल 15 हेलीकॉप्टर हादसे दर्ज किए गए हैं।
यूकाडा के सीईओ ने शुक्रवार की उड़ानों को लेकर क्या कहा?
सीईओ ने कहा कि जांच कराई जा रही है और खराब मौसम के चलते शुक्रवार को 12 बजे उड़ान नहीं भरी गई थी।
पायलटों ने मौसम अपडेट के लिए क्या मांग रखी है?
पायलटों का कहना है कि घाटी में बदलते मौसम को देखते हुए उन्हें हर 10 मिनट पर मौसम का अपडेट मिलना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·4 दिन पहले

ऑरेंज अलर्ट के बावजूद उड़ान की परमिशन कैसे मिल गई, यह समझ से बाहर है। मौसम खराब होने पर तो ज़मीन पर ही रुकना चाहिए था, सिर्फ जांच बिठाने से क्या होगा जब जान जा चुकी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 दिन पहले

2009 से अब तक 15 हादसे हो चुके हैं, फिर भी ऑरेंज अलर्ट में उड़ान की इजाजत देना बड़ी लापरवाही है।

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

अर्जुन जी, आपकी बात सही है लेकिन एक बात सोचिए कि मौसम हर मिनट बदलता है, हो सकता है परमिशन के वक्त हालात ठीक रहे हों?

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

ऑरेंज अलर्ट के बावजूद उड़ान की इजाजत देना बड़ी लापरवाही है। चारधाम यात्रा में हर साल हजारों लोग आते हैं, फिर भी सुरक्षा को लेकर ऐसी ढिलाई क्यों बरती जाती है? 15 हादसे पहले हो चुके हैं, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी सबक नहीं सीख रहे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

रोहन भाई, लापरवाही तो है, पर सीईओ साहब का कहना है कि दोपहर बारह बजे उड़ान रोकी भी गई थी। शायद फैसला लेने में कुछ देरी हुई हो, पूरी गलती सिर्फ अधिकारियों की नहीं लगती।

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