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खाटूश्यामजी में जन्माष्टमी का भव्य पर्व, मध्यरात्रि को होंगे मूल शालिग्राम रूप में दर्शनराजस्थान
4 सित॰ 2026, 11:14 am (21 दिन पहले)· 2

खाटूश्यामजी में जन्माष्टमी का भव्य पर्व, मध्यरात्रि को होंगे मूल शालिग्राम रूप में दर्शन

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर सीकर के खाटूश्यामजी मंदिर में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचे हैं। मध्यरात्रि को बाबा श्याम का पंचामृत स्नान होगा और मूल शालिग्राम रूप में दर्शन मिलेंगे।

श्रीकृष्ण के कलयुगी अवतार के रूप में पूजे जाने वाले बाबा श्याम के दरबार खाटूधाम में जन्माष्टमी का पावन उत्सव अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। अपने आराध्य के जन्मोत्सव और दीदार के लिए दुनिया भर से लाखों भक्त सीकर पहुंच चुके हैं। भोर की मंगला आरती के समय से ही मंदिर की चौदह कतारें भक्तों की भारी भीड़ से पूरी तरह भर चुकी हैं।

राजधानी दिल्ली के अलावा मुंबई, कोलकाता, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे तमाम सूबों से श्रद्धालु हाजिरी लगाने आए हैं। संपूर्ण खाटूनगरी में “हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा” और “जय श्री श्याम” के उद्घोष गूंज रहे हैं जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है।

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फूलों और पत्तियों से सजाया गया अलौकिक दरबार

इस पावन पर्व पर बाबा श्याम का अत्यंत मनमोहक और भव्य श्रृंगार किया गया है। देश के विभिन्न हिस्सों से मंगवाए गए विशेष नीले, सफेद और गुलाबी रंगों के ताजे फूलों से मंदिर को सजाया गया है। इस बार के श्रृंगार में फूलों के साथ प्राकृतिक हरी पत्तियों का भी अनूठा प्रयोग किया गया है जो आने वाले भक्तों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

आधी रात को होगा पंचामृत अभिषेक और महाप्रसाद वितरण

श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान के अनुसार मध्यरात्रि ठीक बारह बजे जन्मोत्सव के साथ ही मंदिर परिसर शंख और घंटियों की गूंज से गूंज उठेगा।

  • पंचामृत स्नान: रात्रि बारह बजे बाबा श्याम का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से भव्य अभिषेक कराया जाएगा।
  • मूल स्वरूप दर्शन: इस विशेष अभिषेक के फौरन बाद बाबा श्याम अपने मूल स्वरूप यानी शालिग्राम रूप में भक्तों को अलौकिक दर्शन देंगे।
  • प्रसाद वितरण: महाआरती संपन्न होने के बाद वहां मौजूद सभी श्रद्धालुओं के बीच पंजीरी का महाप्रसाद बांटा जाएगा।

दूर-दराज से आए भक्तों ने की व्यवस्थाओं की सराहना

इस महान पर्व पर पहुंचे श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और हर कोई व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर आ रहा है।

  • हरियाणा के भक्त: झज्जर और आसपास के जिलों से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि वे हर साल इस मौके पर यहां आते हैं और इस बार का श्रृंगार सबसे अनूठा है। कई परिवार सवामणी का भोग लगाने भी पहुंचे हैं।
  • मध्य प्रदेश के श्रद्धालु: छतरपुर से आए परिवारों ने साझा किया कि वे मन्नत मांगने आए हैं और भारी भीड़ के बावजूद मंदिर कमेटी की सुगम व्यवस्था के कारण किसी को कोई असुविधा नहीं हो रही है।

कौन हैं बाबा श्याम और क्या है उनकी पौराणिक गाथा

कलयुग में हारे के सहारे के रूप में विख्यात बाबा श्याम दरअसल महाभारत काल के वीर योद्धा और भीम के पौत्र बर्बरीक हैं। जब वे महाभारत के युद्ध में कौरवों की तरफ से भाग लेने जा रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धरकर उनका शीश दान में मांग लिया था। बर्बरीक ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना सिर अर्पित कर दिया था। इस असीम त्याग से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे उनके अपने नाम श्याम से पूजे जाएंगे और हर दुखी व हारे हुए इंसान की ढाल बनेंगे।

सवाल-जवाब

खाटूश्यामजी मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है।
जन्माष्टमी पर बाबा श्याम को कौन से रूप में दर्शन होंगे?
मध्यरात्रि को अभिषेक के बाद बाबा श्याम मूल शालिग्राम रूप में दर्शन देंगे।
श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री कौन हैं?
मानवेंद्र सिंह चौहान श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार बाबा श्याम किसका अवतार माने जाते हैं?
बाबा श्याम महाभारत काल के वीर बर्बरीक हैं जिन्हें श्रीकृष्ण ने कलयुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

खाटूश्यामजी में जन्माष्टमी पर उमड़ी लाखों की भीड़ देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर लगातार बढ़ते सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को दर्शाती है। सीकर में इतने बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं का पहुंचना न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था और आतिथ्य क्षेत्र को मजबूत करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि भविष्य में इस प्रकार के बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान बुनियादी ढांचे, परिवहन और भीड़ प्रबंधन के लिए और अधिक दीर्घकालिक तथा व्यापक प्रशासनिक रणनीतियों की आवश्यकता होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 दिन पहले

भीड़ प्रबंधन किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन में कानून-व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती होता है। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति यह मांग करती है कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन सिर्फ तात्कालिक बैरिकेडिंग पर निर्भर न रहें, बल्कि भविष्य के आयोजनों के लिए एक स्थायी, बहु-स्तरीय सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण ब्लूप्रिंट तैयार करें, ताकि भगदड़ जैसी किसी भी संभावित आपदा से बचा जा सके।

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