रायपुर में बीमारी ठीक करने के बहाने महिला से 15 तोला सोना और नकदी ऐंठी, 3 फर्जी साधु फरारदिल्ली के झारखंड भवन में लिफ्ट अटकने से पूर्व सांसद घूरन राम के परिवार के 6 सदस्य हुए अचेत, परिसर में फूटा गुस्सावृश्चिक राशिफल 1 अक्टूबर: आर्थिक फैसलों में बरतें संयम, रिश्तों में धैर्य और सुनने की आदत से बनेगी बातअक्टूबर की शुरुआत में 19 किलो वाला कमर्शियल गैस सिलेंडर हुआ महंगा, जानिए प्रमुख शहरों में नए दामअजय देवगन की दृश्यम 3 के कलाकारों का मेहनताना आया सामने, मुख्य अभिनेता से तब्बू को मिली सात गुना कम रकमसड़क दुर्घटना के बाद घायलों की तुरंत पहचान और मदद के लिए इमरजेंसी क्यूआर कोड की नई शुरुआतऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में नरमी और घरों की कीमतों में गिरावट के बीच वित्तीय स्थिरता बरकरार: रिज़र्व बैंकसुबह के भोजन में प्रोटीन बढ़ाने के लिए बनाएं बेसन और पनीर का खास पराठारायगढ़ में जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र पर अवैध कॉलोनियों का निर्माण, 120 कब्जाधारियों को नोटिससर्दियों में रंग-बिरंगे फूलों से महकेगा घर, अक्टूबर के महीने में गमलों में लगाएं ये सात खास किस्में
कोहिमा के सभी धार्मिक स्थलों में दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सुगम पहुंच अनिवार्य, आदेश जारीनागालैंड
17 सित॰ 2026, 1:38 pm (14 दिन पहले)· 1

कोहिमा के सभी धार्मिक स्थलों में दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सुगम पहुंच अनिवार्य, आदेश जारी

कोहिमा जिला प्रशासन ने सभी धार्मिक स्थलों को दिव्यांगजनों के लिए रैंप, ब्रेल संकेत और बाधा-मुक्त रास्ते बनाने के निर्देश दिए हैं। आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम 2016 का उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

कोहिमा जिले के समस्त धार्मिक संस्थानों और पूजा स्थलों में दिव्यांग जनों के लिए पूर्ण और समान पहुंच सुनिश्चित करना अनिवार्य कर दिया गया है। कोहिमा के उपायुक्त बी हेनोक बुचम ने हाल ही में एक प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए सभी धार्मिक स्थलों को निर्देश दिए हैं कि वे बिना किसी देरी के दिव्यांग श्रद्धालुओं के प्रति हर प्रकार के भेदभाव को समाप्त करें। यह नया निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है ताकि सभी नागरिक बिना किसी बाधा के धार्मिक गतिविधियों में भाग ले सकें।

कानूनी प्रावधान और अधिकार अधिनियम

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने धार्मिक स्थलों पर लोकोमोटर दिव्यांगता से ग्रसित लोगों के साथ होने वाले असमान व्यवहार पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। इसी पृष्ठभूमि में कोहिमा प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है। उपायुक्त के अनुसार, दिव्यांगजनों के प्रवेश में बाधा डालना या उनके साथ अलग व्यवहार करना दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 (RPwD Act) का स्पष्ट उल्लंघन है। यह अधिनियम हर दिव्यांग व्यक्ति को समानता, सम्मानपूर्ण व्यवहार और बाधा-मुक्त वातावरण पाने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है।

ये भी पढ़ें

आवश्यक बुनियादी ढांचा और सुगम सुविधाएं

प्रशासनिक आदेश में कहा गया है कि धार्मिक परिसरों के प्रबंधन को बिना समय गंवाए बुनियादी ढांचे में आवश्यक सुधार करने होंगे। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित सुविधाएं शामिल हैं

  • रैंप और सुरक्षा रेलिंग: प्रवेश और निकास मार्गों पर उपयुक्त ढलान वाले रैंप और सहारे के लिए मजबूत हैंडरेल का निर्माण।
  • बाधा रहित आवाजाही: परिसर के भीतर मौजूद सभी भौतिक रुकावटों को हटाना तथा जहां भी संभव हो सीढ़ी-रहित समतल रास्ते उपलब्ध कराना।
  • दृश्य और श्रव्य सहायता: दृष्टिबाधित लोगों के लिए ब्रेल लिपि वाले संकेत, टैक्टाइल मैप्स और सुनने में समस्या वाले लोगों के लिए ऑडियो सहायता प्रणालियों की स्थापना।
  • त्योहारों में विशेष व्यवस्था: धार्मिक मेलों, उत्सवों और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले दिनों में दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सुगम प्रवेश और ठहरने का प्रबंध करना।

जागरूकता प्रशिक्षण और दंडात्मक प्रावधान

प्रशासन ने सभी प्रबंधन समितियों, धार्मिक ट्रस्टों, चर्च एसोसिएशनों और पुजारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने कर्मचारियों तथा कार्यकर्ताओं को आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के तहत संवेदित करें। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि आदेश का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं पर आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम 2016 की धारा 89 के तहत जुर्माना लगाया जाएगा और अन्य कानूनी धाराओं के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सवाल-जवाब

कोहिमा प्रशासन ने धार्मिक स्थलों के लिए क्या आदेश दिया है?
कोहिमा जिला प्रशासन ने सभी धार्मिक स्थलों को दिव्यांगजनों के लिए रैंप, ब्रेल संकेत और बाधा-मुक्त पहुंच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश किस कानून के तहत जारी किया गया है?
यह आदेश दिव्यांगजन अधिकार (RPwD) अधिनियम 2016 के प्रावधानों के तहत जारी किया गया है।
धार्मिक स्थलों में बुनियादी ढांचे से जुड़े क्या बदलाव करने होंगे?
धार्मिक संस्थानों को रैंप, मजबूत हैंडरेल, ब्रेल लिपि के संकेत, टैक्टाइल मैप्स और ऑडियो सहायता प्रणालियां स्थापित करनी होंगी।
आदेश का पालन न करने पर क्या परिणाम होंगे?
दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले प्रबंधन समितियों और संस्थानों के खिलाफ RPwD अधिनियम 2016 की धारा 89 के तहत कानूनी कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·13 दिन पहले

आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम 2016 की धारा 89 के तहत यह आदेश कानून-व्यवस्था और जन-अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है। कानूनी दृष्टिकोण से, किसी प्रशासनिक निर्देश की सफलता केवल उसकी घोषणा पर नहीं, बल्कि उसके जमीनी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी पर निर्भर करती है। धार्मिक परिसरों में सुरक्षा और सुगमता लागू कराने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस को स्पष्ट निगरानी व्यवस्था बनानी होगी। यदि प्रबंधन समितियां तय समयसीमा में इन अनिवार्य सुविधाओं को विकसित करने में विफल रहती हैं, तो दंडात्मक कानूनी प्रावधानों का सख्ती से पालन कराना ही इस आदेश का वास्तविक प्रभाव तय करेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·13 दिन पहले

करण के कानूनी कार्यान्वयन वाले बिंदु को आगे बढ़ाते हुए, इस आदेश का एक आर्थिक और बुनियादी ढांचागत पहलू भी है। धार्मिक स्थलों में ब्रेल संकेतक, टैक्टाइल मैप्स और सुगम मार्ग विकसित करने के लिए प्रबंधन समितियों को नियोजित वित्तीय आवंटन और तकनीकी समाधानों की आवश्यकता होगी। इसे केवल एक प्रशासनिक निर्देश न मानकर समावेशी सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए। स्थानीय प्रशासन और धार्मिक ट्रस्ट सुगम्यता क्षेत्र में काम करने वाले टेक स्टार्ट-अप्स तथा विशेषज्ञ निर्माण प्रदाताओं का सहयोग लेकर इन बदलावों को किफ़ायती और प्रभावी तरीके से लागू कर सकते हैं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp