अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैठकर भारत में आपराधिक नेटवर्क चलाने वाले गिरोहों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में दर्जनों संगीन वारदातों को अंजाम देने वाला कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ अमेरिकी शहर लास वेगास में कानून के शिकंजे में आ गया है। स्थानीय आपराधिक नेटवर्क के बीच उसे दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा का दाऊद इब्राहिम कहा जाता था। भारतीय जांच तंत्र की सूचना पर विदेशी धरती पर हुई इस कार्रवाई को संगठित अपराध के खिलाफ एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
लास वेगास में अमेरिकी एजेंसियों की कार्रवाई
हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ ने हिमांशु भाऊ के ठिकाने से जुड़े पुख्ता सुराग अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा किए थे। इसी खुफिया इनपुट के आधार पर संयुक्त राज्य अमेरिका की इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) ने लास वेगास में दबिश देकर उसे हिरासत में लिया। इस अभियान में आईसीई की एन्फोर्समेंट एंड रिमूवल ऑपरेशंस (ईआरओ) विंग ने प्रमुख भूमिका निभाई, जो विदेशी नागरिकों द्वारा आव्रजन कानूनों के उल्लंघन की जांच और उनके निर्वासन का काम देखती है। गिरफ्तारी के बाद अब भारतीय केंद्रीय एजेंसियां और हरियाणा एसटीएफ अमेरिकी अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर उसे भारत प्रत्यर्पित कराने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई हैं।
बाल सुधार गृह से फरार होकर बना खूंखार अपराधी
हरियाणा के रोहतक जिले के रिटोली गांव से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु ने अपराध की राह बेहद कम उम्र में चुन ली थी। उसने मात्र 17 साल की उम्र में पहली हत्या को अंजाम दिया था। कम उम्र होने के कारण उसे पहले बाल सुधार गृह भेजा गया था, लेकिन वह वहां ज्यादा दिन नहीं रुका और करीब 20 अन्य लड़कों के साथ सुधार गृह की दीवार फांदकर फरार हो गया। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और ताबड़तोड़ संगीन वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया। हरियाणा, दिल्ली और आसपास के राज्यों में उसके खिलाफ हत्या, जानलेवा हमला, जबरन वसूली, हथियारों की तस्करी और घरों पर गोलियां बरसाने जैसे करीब 50 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
फर्जी पासपोर्ट से विदेश भागकर खड़ा किया सिंडिकेट
भारतीय पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का दबाव बढ़ने पर हिमांशु भाऊ फर्जी दस्तावेजों के सहारे देश छोड़कर पहले पुर्तगाल फरार हुआ था। वहां कुछ समय गुजारने के बाद उसने अमेरिका में अपना ठिकाना बना लिया। विदेश में सुरक्षित बैठकर वह आधुनिक संचार माध्यमों के जरिए भारत में बैठे अपने शूटरों और गुर्गों को निर्देश देता था। साल 2023 में उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया गया था और सभी हवाई अड्डों पर लुकआउट सर्कुलर भी सक्रिय था। हाल के समय में विदेश से गैंग चलाने की परिपाटी तेजी से बढ़ी है, जैसा कि अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की घटना में भी देखा गया था, जहां विदेश में बैठा अनिल पंडित स्थानीय शूटरों को निर्देश दे रहा था।
संगीन वारदातों की लंबी फेहरिस्त और गैंगवार
हिमांशु भाऊ के नाम कई सनसनीखेज वारदातें जुड़ी हैं। हरियाणा में 24 घंटे के भीतर तीन लोगों की हत्या की वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया था। इसके अलावा अभिनेता एल्विश यादव के घर के बाहर अंधाधुंध फायरिंग करवाने, एक प्रसिद्ध बर्गर किंग रेस्तरां में गोली मारकर हत्या करने और कई बड़े जिम संचालकों से करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगने में भी उसका नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया। साल 2022 में हुई कई वारदातों की जिम्मेदारी भी उसके सिंडिकेट ने ली थी। अंडरवर्ल्ड के समीकरणों के लिहाज से वह नीरज बवाना और बंबीहा गिरोह का करीबी साथी माना जाता है, जबकि लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गिरोह से उसकी बेहद खूनी अदावत रही है। उसकी इस गिरफ्तारी से उत्तर भारत में सक्रिय विरोधी गिरोहों के बीच छिड़ी वर्चस्व की जंग पर भी गहरा असर पड़ने की संभावना है।
















