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लंबा वीकेंड शुरू होते ही नैनीताल में उमड़ा सैलानियों का सैलाब, ट्रैफिक जाम और मनमाने होटल किराए से लोग बेहालउत्तराखंड
3 अक्तू॰ 2026, 6:03 pm (34 दिन पहले)· 2

लंबा वीकेंड शुरू होते ही नैनीताल में उमड़ा सैलानियों का सैलाब, ट्रैफिक जाम और मनमाने होटल किराए से लोग बेहाल

सरोवर नगरी नैनीताल में लंबे वीकेंड पर रिकॉर्ड भीड़ जुटने से सड़कें घंटों जाम रहीं और पर्यटकों को मनमाने होटल किराए व बुकिंग रद्द होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा.

उत्तराखंड के प्रसिद्ध हिल स्टेशन नैनीताल में शुक्रवार से शुरू हुए लंबे अवकाश के चलते पर्यटकों की भारी आमद देखने को मिली है. अवकाश की शुरुआत के साथ ही माल रोड, नैनी झील, भोटिया मार्केट और स्नो व्यू जैसे सभी प्रमुख दर्शनीय स्थलों पर सैलानियों की भारी भीड़ जमा हो गई. सैलानियों की इस अचानक बढ़ी संख्या के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. स्थिति इतनी विकट हो गई कि यात्रियों को महज कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए भी कई घंटों तक जाम में फंसे रहना पड़ा. शहर के होटलों, गेस्ट हाउसों और होम स्टे पर भी पर्यटकों का भारी दबाव देखा गया, जिससे ठहरने की समुचित व्यवस्था जुटाना एक बड़ी चुनौती बन गया.

भीड़ और कमरों की कमी से बढ़े किराए

शहर में भारी भीड़ का फायदा उठाकर ठहरने के किराए में भारी उछाल दर्ज किया गया. कई पर्यटकों ने बताया कि आम दिनों में 2 से 2.5 हजार रुपये में मिलने वाले सामान्य होटल के कमरों के लिए इस समय 6 से 7 हजार रुपये तक मांगे जा रहे हैं. कुछ यात्रियों को होटल पूरी तरह पैक होने के कारण कमरा खोजने में भारी मशक्कत करनी पड़ी. कमरे न मिलने और अत्यधिक किराए के कारण कई लोगों के पूर्व निर्धारित यात्रा कार्यक्रम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है.

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बुकिंग के बावजूद कमरा देने से इनकार, रिफंड का भी विवाद

दिल्ली से नैनीताल पहुंचे पर्यटक मुकुल आनंद ने अपने कड़वे अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह देर रात यहां पहुंचे थे. उनके पास होटल की पहले से पक्की बुकिंग मौजूद थी, लेकिन इसके बावजूद होटल प्रबंधन ने उन्हें कमरा देने से साफ इनकार कर दिया. इसके बाद उन्हें एक अन्य होटल में वैकल्पिक कमरा दिखाया गया, जो उनके अनुसार ठहरने के लिहाज से बिल्कुल उपयुक्त नहीं था. मुकुल का कहना है कि उस साधारण कमरे की वास्तविक कीमत 1500 रुपये भी नहीं थी, मगर उनसे उस कमरे के बदले 5000 रुपये वसूले गए. जब उन्होंने मूल बुकिंग की राशि वापस मांगी, तो होटल प्रबंधन ने रिफंड देने से भी साफ मना कर दिया. मुकुल ने स्पष्ट किया कि वह इस अनुचित व्यवहार के खिलाफ स्थानीय पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत और प्राथमिकी दर्ज कराने जा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के कटु अनुभव के बाद वह भविष्य में अपने परिवार के साथ दोबारा नैनीताल आने का फैसला करने से पहले कई बार सोचेंगे.

ट्रैफिक जाम ने बिगाड़ा आसपास के पर्यटन स्थलों का प्लान

सड़कों पर वाहनों के भारी दबाव के कारण नैनीताल के आसपास स्थित धार्मिक और दर्शनीय स्थलों तक पहुंचना भी कठिन साबित हुआ. दिल्ली से पहुंची एक अन्य पर्यटक अंजली ने बताया कि शहर में इस वक्त भारी भीड़ मौजूद है और भीषण ट्रैफिक जाम की वजह से एक से दो किलोमीटर की छोटी सी दूरी तय करने में भी पर्यटकों के कई घंटे बर्बाद हो रहे हैं. इस वजह से शहर से बाहर जाने की उनकी योजना खटाई में पड़ गई और उन्हें अपनी यात्रा को केवल शहर के आंतरिक हिस्सों तक ही सीमित रखना पड़ा. वहीं पुणे से आईं पर्यटक प्रिया ने बताया कि उन्होंने नैनीताल के साथ विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम के दर्शन का कार्यक्रम तय किया था, लेकिन शहर में लगे भीषण जाम के चलते कैंची धाम तक की यात्रा करना भी बेहद कठिन हो गया. उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कमरों के दाम सामान्य दरों की तुलना में बेहद ज्यादा हैं, और आने वाले पर्यटकों को यहां के जमीनी हालात व भीड़ को समझकर ही यात्रा की योजना बनानी चाहिए.

प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उठ रहे गंभीर सवाल

हैदराबाद से नैनीताल की यात्रा पर आए पर्यटक राकेश ने बताया कि नैनीताल निसंदेह एक बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल है, लेकिन वर्तमान समय में यह पूरी तरह से ओवरक्राउडेड नजर आ रहा है. शहर के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने-जाने में अनावश्यक समय लग रहा है. राकेश ने भी कमरे के किरायों में बेतहाशा बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए पुष्टि की कि सामान्य दिनों में 2 से 2.5 हजार रुपये में उपलब्ध होने वाले कमरों की दरें अब 6 से 7 हजार रुपये तक पहुंच गई हैं. उन्होंने प्रशासन और सरकार से मांग की कि पर्यटकों की बुनियादी सुविधाओं, सुगम आवागमन और व्यवस्थाओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए.

होटल एसोसिएशन ने अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई की मांग उठाई

पर्यटकों की बढ़ती शिकायतों के बीच होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट ने भी स्थिति को लेकर अपनी चिंता जाहिर की. उन्होंने पुष्टि की कि पर्यटकों द्वारा कमरों के बढ़े हुए किराए को लेकर शिकायतें मिली हैं और इस संबंध में होटल एसोसिएशन ने स्थानीय प्रशासन से औपचारिक बातचीत की है. बिष्ट ने स्पष्ट किया कि नैनीताल में पंजीकृत होटलों, गेस्ट हाउसों और होम स्टे के अलावा ऐसी संपत्तियां भी संचालित की जा रही हैं जो निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप नहीं हैं. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि अत्यधिक भीड़ के समय ऐसी अनाधिकृत संपत्तियों की गहन जांच की जानी चाहिए.

दिग्विजय सिंह बिष्ट ने आगे कहा कि सभी पंजीकृत होटलों की दरें पर्यटन विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज होती हैं, और यदि कोई प्रतिष्ठान निर्धारित सरकारी दरों से अधिक किराया वसूलता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने रेखांकित किया कि कुछ लोग अपने निजी घरों में कमरे बनाकर पर्यटकों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं, जिससे न केवल बाहर से आने वाले यात्रियों को आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है बल्कि पर्यटन नगरी नैनीताल की छवि भी धूमिल होती है. लंबे वीकेंड पर पर्यटकों की रिकॉर्ड आमद से पर्यटन कारोबार को निश्चित तौर पर गति मिली है, लेकिन ट्रैफिक, पार्किंग, कमरों की अनुपलब्धता और मनमाने किराए से जुड़ी अव्यवस्थाओं ने बुनियादी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सवाल-जवाब

लॉन्ग वीकेंड पर नैनीताल में होटल कमरों का किराया कितना बढ़ गया?
सामान्य दिनों में 2 से 2.5 हजार रुपये में मिलने वाले कमरों के लिए पर्यटकों से 6 से 7 हजार रुपये तक मांगे गए.
दिल्ली के पर्यटक मुकुल आनंद के साथ होटल में क्या घटना घटी?
पहले से बुकिंग होने के बावजूद उन्हें कमरा नहीं दिया गया, 1500 रुपये मूल्य का वैकल्पिक कमरा 5000 रुपये में दिया गया और मूल बुकिंग का रिफंड देने से भी मना कर दिया गया.
नैनीताल में ट्रैफिक जाम से किन प्रमुख पर्यटन स्थलों की यात्रा प्रभावित हुई?
भीषण जाम के चलते शहर के आंतरिक स्थलों के अलावा कैंची धाम की यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट ने प्रशासन से क्या मांग की?
उन्होंने प्रशासन से अनधिकृत संपत्तियों की जांच करने और निर्धारित सरकारी दरों से अधिक किराया वसूलने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की.
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टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·33 दिन पहले

लंबे वीकेंड पर इतनी भीड़ और मनमाने दाम देखकर हैरानी होती है कि लोग पहले से तैयारी क्यों नहीं करते। बुकिंग के बाद कमरा न मिलना होटल वालों की बेईमानी है, पर सैलानियों को भी थोड़ा संभलकर जाना चाहिए जब सब जानते हैं कि मौसम में ऐसी हालत होती है।

Ravikash Gupta@ravikash·33 दिन पहले

पिछली बार मैं भी ऐसे ही लंबे वीकेंड पर हिल स्टेशन गया था और होटल वाले ने बुकिंग होने के बावजूद आधी रात को कमरे से मना कर दिया था। ऊपर से चार गुना किराया मांग रहा था, उस रात परिवार के साथ गाड़ी में ही सोना पड़ा था।

Arjun Mehta@arjun-mehta·33 दिन पहले

अरे रवि काश जी, गाड़ी में परिवार के साथ रात काटना वाकई डरावना अनुभव रहा होगा। उत्तराखंड सरकार को पर्यटन नीति में सख्ती लानी ही चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·33 दिन पहले

पिछली बार मैं भी ऐसे ही लंबे वीकेंड पर गया था, गाड़ी घंटों जाम में फंसी रही और होटल वालों ने तीन गुना किराया वसूल लिया। तौबा कर ली है मैंने ऐसी ट्रिप्स से।

Rohan Verma@rohan-verma·33 दिन पहले

करण भाई, मुकुल आनंद वाले किस्से ने सच में हैरान कर दिया। बुकिंग होने के बाद भी कमरा न देना और ऊपर से मनमाना पैसा वसूलना सरासर लूट है।

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