उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम में दर्शन के लिए उमड़ने वाली भारी भीड़ और उससे लगने वाले भीषण जाम से निपटने के लिए नैनीताल पुलिस ने पूरी तैयारी कर ली है। खासकर सप्ताहांत, सार्वजनिक छुट्टियों और विशेष धार्मिक उत्सवों के मौकों पर मंदिर जाने वाले मार्ग पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इससे न केवल बाहर से आने वाले श्रद्धालु घंटों फंसे रहते हैं, बल्कि स्थानीय निवासियों और रोजमर्रा के राहगीरों का आवागमन भी पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। इसी भौगोलिक और व्यवस्थागत चुनौती का स्थायी तकनीकी समाधान निकालने के लिए पुलिस प्रशासन अब हाई-टेक सेंसर और डेटा आधारित प्रबंधन का सहारा लेने जा रहा है।
आईआईटी रुड़की के चार सेंसर संभालेंगे वाहनों की निगरानी
इस आधुनिक व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए नैनीताल पुलिस ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी रुड़की के साथ साझेदारी की है। इस रणनीतिक पहल के तहत कैंची धाम मंदिर से कुछ दूरी पर चार अलग-अलग अहम स्थानों पर आधुनिक तकनीक से लैस सेंसर लगाए जाएंगे। ये चारों सेंसर संस्थान की ओर से जिला पुलिस को मुहैया कराए जाएंगे। इन उपकरणों का मुख्य काम कैंची धाम की तरफ आगे बढ़ने वाले सभी छोटे-बड़े वाहनों की सटीक गणना करना और उनकी आवाजाही पर लगातार नजर बनाए रखना होगा।
सेंसर से मिलने वाले डिजिटल आंकड़ों से पुलिस अधिकारियों को यह स्पष्ट पता चल सकेगा कि किस खास समय पर सड़क पर वाहनों का दबाव कितना बढ़ रहा है। इसके साथ ही यह जानकारी भी तुरंत मिल जाएगी कि किन विशिष्ट मोड़ या संकरे हिस्सों पर गाड़ियों की रफ्तार धीमी पड़ रही है और ट्रैफिक का घनत्व क्षमता से अधिक हो रहा है।
रियल टाइम डेटा के जरिए पहले से तय होगा रूट डायवर्जन
पर्वतीय सड़कों पर अब तक पुलिस को ट्रैफिक का दबाव जरूरत से ज्यादा बढ़ने और जाम लगने के बाद ही व्यवस्था बदलने या रूट मोड़ने जैसे कदम उठाने पड़ते थे। लेकिन इन चार सेंसर के सक्रिय होते ही वाहनों के प्रवाह का डेटा कंट्रोल रूम और फील्ड पर तैनात पुलिसकर्मियों को रियल टाइम में मिलना शुरू हो जाएगा। इससे पुलिस बल को स्थिति गंभीर होने से पहले ही ट्रैफिक के बढ़ते दबाव का सटीक अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी।
जब भी किसी समय अंतराल में कैंची धाम की ओर एक साथ बहुत बड़ी संख्या में वाहन बढ़ रहे होंगे, तब सेंसर से मिले अलर्ट और आंकड़ों के आधार पर पुलिस तुरंत डायवर्जन प्लान लागू कर सकेगी। इससे गाड़ियों को पीछे के चौड़े रास्तों या वैकल्पिक मार्गों पर रोककर या मोड़कर अचानक लगने वाले लंबे जाम की समस्या को रोका जा सकेगा।
यह व्यवस्था विशेष रूप से वीकेंड और त्योहारी सीजन में बहुत अहम साबित होगी। इन दिनों पर्यटकों और भक्तों का तांता लगने से भवाली, खैरना, गरमपानी और उनसे जुड़ने वाले अन्य पहाड़ी संपर्कों पर वाहनों का बोझ चरम पर पहुंच जाता है। सेंसर से मिलने वाला डेटा इस पूरे कॉरिडोर के यातायात प्रबंधन को सुव्यवस्थित और सहज बनाने में मदद करेगा।
हल्द्वानी से पहाड़ों तक के लिए नया ट्रैफिक कंट्रोल रूम
कुमाऊं परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक निवेदिता कुकरेती के अनुसार, कैंची धाम में होने वाले अत्यधिक जमावड़े का सीधा नकारात्मक असर आसपास के इलाकों के साथ-साथ नैनीताल शहर के मुख्य मार्गों पर भी साफ दिखाई देता है। पूरे क्षेत्र के यातायात तंत्र को दुरुस्त करने के लिए नैनीताल में एक हाई-टेक कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है। इस कंट्रोल रूम का तकनीकी सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और वर्तमान में इसके टेंडर जारी करने की औपचारिक प्रक्रिया चल रही है।
यह केंद्रीय कंट्रोल रूम तैयार होते ही हल्द्वानी से लेकर ऊपरी पर्वतीय इलाकों तक पूरे हाईवे और आंतरिक सड़कों पर नजर रखना संभव हो जाएगा। इसके माध्यम से विभिन्न संवेदनशील स्थानों की वास्तविक स्थिति देखकर जरूरत के हिसाब से तत्काल पुलिसकर्मियों की तैनाती और रूट प्रबंधन के निर्देश जारी किए जा सकेंगे। चूंकि कैंची धाम की वजह से नैनीताल शहर के भीतर भी जाम की स्थिति बन जाती है, इसलिए यह एकीकृत कंट्रोल रूम पूरे जिले के ट्रैफिक समन्वय में बेहद अहम भूमिका निभाएगा।
श्रद्धालुओं के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन का प्रस्ताव शासन को भेजा
सड़क पर वाहनों को नियंत्रित करने के साथ-साथ मंदिर परिसर में भीड़ को व्यवस्थित रूप से संभालने के लिए एक संगठित पंजीकरण प्रणाली शुरू करने की भी तैयारी है। आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती ने जानकारी दी कि कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने का विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, जिस पर जल्द ही स्वीकृति और ठोस कार्रवाई होने की उम्मीद है।
यदि शासन स्तर से इस व्यवस्था को मंजूरी मिल जाती है, तो प्रतिदिन मंदिर पहुंचने वाले दर्शनार्थियों की संख्या को पहले से तय सीमा में नियंत्रित करना आसान हो जाएगा। इससे हर दिन पहुंचने वाले लोगों का पूर्व रिकॉर्ड रहेगा और अचानक अत्यधिक भीड़ जमा होने का खतरा टल जाएगा।
बाबा नीम करौली का यह पावन धाम आज देश और विदेश के लाखों भक्तों की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। साल भर श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन होने से यहां पार्किंग, ट्रैफिक और क्राउड मैनेजमेंट की विकट चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। अब आईआईटी के चार सेंसर, रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग, नया पुलिस कंट्रोल रूम और प्रस्तावित रजिस्ट्रेशन प्रणाली मिलकर इस पूरे पर्वतीय इलाके के सफर को सुगम और सुरक्षित बनाने की नई उम्मीद जगा रहे हैं।



















