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मैनपाट की वादियों में बालरीकिम की अनूठी पहल, भुट्टे के कारोबार से लिखी सफलता की कहानीछत्तीसगढ़
15 सित॰ 2026, 8:34 am (10 दिन पहले)· 0

मैनपाट की वादियों में बालरीकिम की अनूठी पहल, भुट्टे के कारोबार से लिखी सफलता की कहानी

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट में बालरीकिम ने देसी तरीके से भुट्टे का कारोबार शुरू कर अपनी आजीविका संवारी है, जिससे आज कई अन्य लोग भी प्रेरणा ले रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित खूबसूरत हिल स्टेशन मैनपाट अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, जहाँ दूर-दूर से पर्यटक घूमने आते हैं। इस ठंडी और सुहावनी आबोहवा के बीच पर्यटकों के लिए गरमागरम भुट्टे का स्वाद इस यात्रा को और भी यादगार बना देता है। इस अनोखे और सफल कारोबार की शुरुआत सबसे पहले बालरीकिम नामक व्यक्ति ने की थी, जिन्होंने सीमित संसाधनों के साथ इस दिशा में कदम बढ़ाया। आज उनका यह प्रयास न केवल उनकी आजीविका का मुख्य जरिया बन गया है, बल्कि इलाके के कई अन्य लोगों के लिए भी स्वरोजगार का एक बेहतरीन माध्यम साबित हो रहा है।

देसी चूल्हे पर भुट्टे सेंकने की अनूठी शैली

बालरीकिम कुमार सड़क किनारे एक छोटी सी झोपड़ी बनाकर यह कारोबार चलाते हैं। उनके भुट्टे का स्वाद आज भी सबसे अलग और बेहद खास माना जाता है, जिसकी मुख्य वजह इसे पकाने का देसी तरीका है। आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करने के बजाय वह पूरी तरह पारंपरिक विधि अपनाते हैं। वह सुबह-सुबह जंगल जाते हैं और वहाँ से सूखी लकड़ियां काटकर लाते हैं, जिससे वे लकड़ी का चूल्हा जलाते हैं। इस प्राकृतिक माहौल में धीमी आंच पर भुट्टे को सेंका जाता है, जिससे उसकी सोंधी खुशबू और स्वाद कई गुना बढ़ जाता है।

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जलजली से शुरू हुआ था सफर

बालरीकिम के अनुसार, उन्होंने सबसे पहले इस रोजगार की शुरुआत जलजली इलाके में की थी। जब उन्होंने यह काम शुरू किया था, तब यहाँ इस तरह के कारोबार के बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते थे और पर्यटकों की आवाजाही भी सीमित थी। हालांकि, जैसे-जैसे मैनपाट में पर्यटकों की संख्या बढ़ती गई, उनके इस देसी कारोबार की मांग भी तेजी से फैलती चली गई। आज स्थिति यह है कि मैनपाट के विभिन्न प्रमुख पर्यटन स्थलों पर कई अन्य स्थानीय लोग भी भुट्टा बेचकर अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं।

मौसम और पर्यटकों की संख्या पर आधारित कमाई

इस व्यवसाय में होने वाली आमदनी पूरी तरह से मौसम की स्थिति और आने वाले पर्यटकों की संख्या पर निर्भर करती है। बालरीकिम बताते हैं कि कभी-कभी सामान्य दिनों में दो, चार या पांच किलो भुट्टा बिक पाता है, तो वहीं अच्छे दिनों में यह बिक्री बढ़कर 10 से 20 किलो तक पहुँच जाती है। इसी प्रकार रोजाना होने वाली कमाई भी निश्चित नहीं होती है। उन्हें कभी 200 रुपये तो कभी 300, 400 या 500 रुपये तक की दैनिक आमदनी हो जाती है, जिससे उनका खर्च चलता है।

स्वाद का देसी अंदाज और पर्यटकों का प्यार

भुट्टे को और अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमें नींबू, नमक और स्थानीय मसालों का बेहतरीन इस्तेमाल किया जाता है, साथ ही तीखी मिर्च की चटनी भी परोसी जाती है। पर्यटकों को भोजन का यह ठेठ पारंपरिक अंदाज बेहद भाता है। बालरीकिम का अनुभव है कि जो भी पर्यटक एक बार उनके हाथ का बना यह भुट्टा चख लेता है, वह मैनपाट आने पर दोबारा उनकी दुकान पर जरूर पहुँचता है। उनकी यह मेहनत और लगन आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

सवाल-जवाब

मैनपाट में सबसे पहले भुट्टे का कारोबार किसने शुरू किया था?
मैनपाट में सबसे पहले भुट्टे का कारोबार बालरीकिम नामक व्यक्ति ने शुरू किया था।
बालरीकिम भुट्टे को पकाने के लिए किस विधि का उपयोग करते हैं?
वह आधुनिक मशीनों के बजाय जंगल से लाई गई सूखी लकड़ियों के देसी चूल्हे पर भुट्टा सेंकते हैं।
बालरीकिम की रोजाना की कमाई कितनी हो जाती है?
उनकी रोजाना की कमाई निश्चित नहीं है, उन्हें कभी 200 रुपये तो कभी 300 से 500 रुपये तक आमदनी हो जाती है।
इस कारोबार की शुरुआत सबसे पहले कहाँ की गई थी?
बालरीकिम ने इस रोजगार की शुरुआत सबसे पहले जलजली में की थी।
भुट्टे को स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमें क्या मिलाया जाता है?
गरमागरम भुट्टे में नींबू, नमक, मिर्च और साथ में मिर्च की चटनी का इस्तेमाल किया जाता है।
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