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मजालता के घने जंगलों में सुरक्षा बलों की घेराबंदी सख्त, तीसरे आतंकी की तलाश में पांच जिलों में चौकसीजम्मू-कश्मीर
20 सित॰ 2026, 5:18 pm (2 दिन पहले)· 2

मजालता के घने जंगलों में सुरक्षा बलों की घेराबंदी सख्त, तीसरे आतंकी की तलाश में पांच जिलों में चौकसी

जम्मू संभाग के मजालता इलाके में जैश के दो आतंकियों को ढेर करने के बाद सुरक्षा बलों ने तीसरे आतंकी की धरपकड़ के लिए पांच जिलों में व्यापक सर्च ऑपरेशन छेड़ रखा है।

जम्मू संभाग के पांच प्रमुख जिलों में सुरक्षा एजेंसियां चौबीसों घंटे कड़ा पहरा दे रही हैं, जहां जंगलों के दुर्गम रास्तों पर संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए व्यापक तलाशी अभियान छेड़ा गया है। कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ में यह हाई अलर्ट मजालता के वन क्षेत्र में हुई हालिया मुठभेड़ के बाद लागू किया गया है। रविवार को भी इस घने जंगल में ‘ऑपरेशन सोहन’ के तहत तलाशी का दायरा लगातार बढ़ाया गया, ताकि छिपे हुए तत्वों को बाहर निकलने का कोई अवसर न मिल सके।

मजालता के जंगलों में तीन दिनों से जारी कार्रवाई

बर्तल, सोहन और खुब्बन के बीहड़ जंगलों में यह बड़ा सैन्य अभियान 16 सितंबर की रात को शुरू किया गया था। कार्रवाई के अगले दिन, यानी 17 सितंबर की सुबह सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच सीधा मुकाबला हुआ। इस आमने-सामने की गोलीबारी में सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दो पाकिस्तानी आतंकवादियों को मौके पर ही ढेर कर दिया। हालांकि, इस मुठभेड़ के दौरान एक तीसरा आतंकी जख्मी हुआ था, जिसके अब भी इलाके की किसी गुफा या प्राकृतिक ओट में छिपे होने की पूरी आशंका जताई जा रही है। इसी तीसरे हमलावर को पकड़ने के लिए यह अभियान तीसरे दिन भी पूरी ताकत से जारी रहा।

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घुसपैठ के पारंपरिक रूट पर पहरा

यह पूरा तलाशी अभियान सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ रहा है। मजालता का यह भौगोलिक इलाका सुरक्षा रणनीति के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यह घुसपैठ के एक पुराने और पारंपरिक रास्ते का अहम हिस्सा रहा है। यह गुप्त मार्ग कठुआ और सांबा के सीमावर्ती इलाकों से शुरू होकर मजालता, बसंतगढ़ और रामनगर से गुजरता है। इसके बाद यह डोडा, भद्रवाह और किश्तवाड़ की पहाड़ियों को छूते हुए सीधे दक्षिण कश्मीर की घाटियों तक पहुंचता है। इसी रणनीतिक रूट को पूरी तरह सील करने के मकसद से सुरक्षा घेरा अब मजालता से आगे दूरदराज के इलाकों तक फैला दिया गया है।

ड्रोन, खोजी कुत्ते और आधुनिक निगरानी उपकरण तैनात

जंगलों के भीतर सुरक्षा बल चप्पे-चप्पे को खंगालने के लिए स्निफर डॉग्स, मानवरहित ड्रोन कैमरों और थर्मल इमेजिंग तकनीक से लैस हेलीकॉप्टरों की मदद ले रहे हैं। मारे गए पाकिस्तानी आतंकियों के पास से बरामद मोबाइल फोन और अन्य निजी सामान को तकनीकी व फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित भेजा गया है, जिससे उनके स्थानीय संपर्कों और सक्रिय मददगारों की पहचान की जा सके। इसके साथ ही फॉरेंसिक विशेषज्ञ उस रास्ते पर मिले खून के कतरों और अन्य भौतिक निशानों का विश्लेषण कर रहे हैं, जिससे घायल आतंकी के भागने की सही दिशा का सटीक सुराग मिल सके।

मददगारों पर शिकंजा और हाईवे पर सघन चेकिंग

जमीनी नेटवर्क को तोड़ने के लिए सुरक्षा बलों ने एक संदिग्ध ओवर-ग्राउंड वर्कर को हिरासत में लिया है। इस व्यक्ति पर आतंकियों के समूह को पनाह देने और राशन व जरूरी रसद का सामान पहुंचाने के आरोप हैं, जिसको लेकर विस्तृत पूछताछ चल रही है। हिरासत में लिए गए व्यक्ति से मिले सुरागों के आधार पर अन्य ठिकानों पर भी त्वरित छापेमारी की जा रही है। मुख्य राजमार्गों, विशेषकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर अतिरिक्त नाके लगाए गए हैं। साथ ही मजालता, रामनगर, बसंतगढ़, बिल्लावर और रामकोट के लिंक रास्तों पर वाहनों और संदिग्ध यात्रियों की कड़ी तलाशी ली जा रही है। नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के दौरान व्हाइट नाइट कॉर्प्स की त्वरित कार्रवाई और तीनों सुरक्षा बलों के उत्कृष्ट आपसी समन्वय की सराहना की है।

सवाल-जवाब

ऑपरेशन सोहन कब और कहां शुरू हुआ था?
यह अभियान 16 सितंबर की रात को मजालता के बर्तल, सोहन और खुब्बन के घने वन क्षेत्रों में शुरू किया गया था।
17 सितंबर की मुठभेड़ में क्या नतीजा निकला?
सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दो पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया, जबकि एक तीसरा आतंकी घायल होकर जंगल में छिप गया।
किन पांच जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है?
कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ जिलों में सुरक्षा बलों ने हाई अलर्ट जारी किया है।
मजालता का इलाका सुरक्षा दृष्टि से इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
यह क्षेत्र कठुआ-सांबा सीमा से लेकर बसंतगढ़, रामनगर, डोडा, भद्रवाह और किश्तवाड़ होते हुए दक्षिण कश्मीर तक जाने वाले पुराने घुसपैठ मार्ग से जुड़ा है।
जंगल में छिपे आतंकी की तलाश के लिए किन तकनीकों का उपयोग हो रहा है?
सर्च ऑपरेशन में स्निफर डॉग, निगरानी ड्रोन और थर्मल सर्विलांस कैमरों से लैस हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है।
इस मामले में क्या कोई गिरफ्तारी या हिरासत हुई है?
हां, आतंकियों को रसद और पनाह देने के आरोप में एक संदिग्ध ओवर-ग्राउंड वर्कर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·1 दिन पहले

इस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन, विशेष रूप से जैश-ए-मोहम्मद, जम्मू संभाग के पारंपरिक घुसपैठ मार्गों को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं। कठुआ-सांबा से शुरू होकर दक्षिण कश्मीर तक जाने वाला यह दुर्गम मार्ग रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। इस मुठभेड़ से यह भी उजागर होता है कि सीमा पार बैठे आका अब स्थानीय मददगारों (ओजीडब्ल्यू) का उपयोग करके सुरक्षा ग्रिड से बचने के लिए इन पुराने जंगली रास्तों का सहारा ले रहे हैं। इस जमीनी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किए बिना इस क्षेत्र में दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करना कठिन होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

इस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि जम्मू संभाग का यह पारंपरिक घुसपैठ मार्ग सुरक्षा बलों के लिए रणनीतिक रूप से कितना संवेदनशील है। तकनीक (ड्रोन, थर्मल इमेजिंग) और फॉरेंसिक जांच का यह साझा समन्वय केवल एक आतंकी की खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीमा पार से चलने वाले हाइब्रिड नेटवर्क और स्थानीय मददगारों (OGW) के पूरे तंत्र को ध्वस्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सीमावर्ती क्षेत्रों से दक्षिण कश्मीर तक फैले इस मार्ग पर सुरक्षा ग्रिड को कड़ा करना आने वाले समय में घुसपैठ के प्रयासों को पूरी तरह विफल करने के लिए बेहद जरूरी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

जम्मू संभाग में सुरक्षा चुनौतियों का यह नया उभार नीतिगत स्तर पर एक गंभीर चेतावनी है। कश्मीर घाटी में कड़ी सुरक्षा के कारण आतंकियों द्वारा जम्मू के इस पारंपरिक, दुर्गम मार्ग का उपयोग करना उनके हाइब्रिड मॉडल की नई रणनीति को दर्शाता है। यहाँ सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करना केवल एक सैन्य आवश्यकता नहीं है, बल्कि इस संवेदनशील क्षेत्र में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और प्रशासनिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। तकनीकी समन्वय और स्थानीय नेटवर्क (OGW) पर सख्त नीतिगत प्रहार ही इस पूरे बेल्ट में दीर्घकालिक शांति और कानून-व्यवस्था को सुनिश्चित कर सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

इस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि जम्मू संभाग के पांच जिलों में फैला यह पारंपरिक घुसपैठ मार्ग सुरक्षा एजेंसियों के लिए रणनीतिक रूप से कितनी बड़ी चुनौती है। कठुआ से लेकर दक्षिण कश्मीर तक कनेक्टिविटी देने वाला यह बीहड़ इलाका आतंकियों के लिए एक सुरक्षित कॉरिडोर रहा है। स्थानीय मददगारों की संलिप्तता यह दर्शाती है कि केवल सैन्य कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर मिलने वाली रसद सहायता और सूचना तंत्र को ध्वस्त करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस कॉरिडोर को पूरी तरह सील करना भविष्य की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए निर्णायक साबित होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

रोहन की बात बिल्कुल सही है। एक अपराध संवाददाता के रूप में, मैं इस मामले में डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका को महत्वपूर्ण मानता हूं। आतंकियों से बरामद मोबाइल फोन और कॉल डेटा रिकॉर्ड्स (CDR) का विश्लेषण केवल स्थानीय संपर्कों को ही उजागर नहीं करेगा, बल्कि यह सीमा पार बैठे हैंडलर्स के साथ उनके नेटवर्क को कानूनन साबित करने में सबसे बड़ा हथियार बनेगा। घायल आतंकी के खून के नमूनों की फॉरेंसिक मैपिंग और हिरासत में लिए गए मददगार से पूछताछ से इस पूरे आतंकी नेटवर्क के खिलाफ एक मजबूत कानूनी चार्जशीट तैयार करने में मदद मिलेगी। इस नेटवर्क को कोर्ट में कानूनी रूप से ध्वस्त करना ही स्थाई सुरक्षा का एकमात्र समाधान है।

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