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मणिपुर में छात्र की मौत के बाद बाल अधिकार आयोग सख्त, संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देशमणिपुर
22 सित॰ 2026, 9:08 pm (35 दिन पहले)· 1

मणिपुर में छात्र की मौत के बाद बाल अधिकार आयोग सख्त, संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश

मणिपुर बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने 17 वर्षीय छात्र की हत्या पर प्रशासन से 15 दिनों में कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है और स्कूलों के पास चौकसी बढ़ाने की मांग की है।

मणिपुर में संघर्ष से जूझ रहे क्षेत्रों के भीतर नाबालिगों और छात्र-छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने जमीनी स्तर पर विद्यार्थियों के आने-जाने वाले रास्तों, शिक्षण संस्थानों और जोखिम भरे रिहायशी इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने की मांग उठाई है। तमेंगलोंग जिले के अपर न्कोउ (ताकोउ) गांव से जुड़े 17 साल के एक छात्र की जान जाने के मामले को आयोग ने अत्यंत गंभीर माना है। इस दर्दनाक घटना पर संज्ञान लेते हुए संबंधित जिला प्रशासन और पुलिस तंत्र को निर्देश दिया गया है कि वे पूरे मामले पर अगले 15 दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करें।

प्रशासन से 15 दिनों में मांगी गई विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट

आयोग की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि इस एक्शन टेकन रिपोर्ट में कई प्रमुख पहलुओं को शामिल किया जाना जरूरी है। इसमें दर्ज मामले की कानूनी जांच, दोषियों के खिलाफ अभियोजन की प्रगति, पीड़ित परिवार को दी जाने वाली राहत सामग्री तथा अनुग्रह राशि का पूरा ब्योरा शामिल होना चाहिए। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी साफ करना होगा कि संवेदनशील बस्तियों और असुरक्षित पॉकेट्स में बच्चों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए प्रशासन ने अब तक कौन से ठोस कदम उठाए हैं।

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सशस्त्र उपद्रवियों द्वारा छात्र की हत्या पर गहरी चिंता

हथियारबंद उपद्रवियों द्वारा छात्र को निशाना बनाए जाने की घटना पर आयोग ने तीखी चिंता जाहिर की है। संस्था ने जोर देकर कहा कि वारदात की त्वरित और निष्पक्ष जांच पूरी की जाए, ताकि घटना के पीछे के तमाम हालात उजागर हो सकें और गुनहगारों की जवाबदेही तय की जा सके। आयोग ने राज्य के भीतर लगातार नाबालिगों के हिंसा का शिकार बनने की प्रवृत्ति को पूरी तरह अस्वीकार्य ठहराया है। आयोग का कहना था,

“ऐसी घटनाएं पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और यह प्रत्येक बच्चे के अधिकारों, सुरक्षा और गरिमा का गंभीर उल्लंघन हैं।”

स्कूलों और संवेदनशील रास्तों पर पुख्ता पहरे की जरूरत

आयोग ने इस बात पर विशेष बल दिया कि बच्चों को किसी भी तरह के संघर्षजन्य खतरों के बीच असुरक्षित नहीं छोड़ा जा सकता। विद्यार्थियों द्वारा नियमित रूप से इस्तेमाल की जाने वाली सड़कों, स्कूली परिसरों और ऐसे गांवों में जहां जोखिम बना रहता है, वहां पर्याप्त पहरेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके साथ ही आयोग ने जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों के बीच निरंतर समन्वय पर जोर दिया। एक मजबूत तालमेल के जरिए ही संभावित खतरों की पहले से पहचान की जा सकेगी और बच्चों की सलामती खतरे में पड़ने पर तुरंत जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे।

सवाल-जवाब

मणिपुर बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रशासन को क्या निर्देश दिया है?
आयोग ने छात्र की हत्या के मामले में 15 दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया है।
मृतक छात्र किस इलाके से ताल्लुक रखता था?
मृतक 17 वर्षीय छात्र तमेंगलोंग जिले के अपर न्कोउ (ताकोउ) गांव का निवासी था।
एक्शन टेकन रिपोर्ट में किन मुख्य बातों को शामिल करना होगा?
रिपोर्ट में कानूनी जांच की प्रगति, परिजनों को दी गई राहत व अनुग्रह राशि और बच्चों की हिफाजत के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा शामिल होना चाहिए।
आयोग ने किन स्थानों पर विशेष सुरक्षा की सिफारिश की है?
आयोग ने छात्रों के नियमित आवागमन वाले रास्तों, शिक्षण संस्थानों और जोखिम वाले रिहायशी गांवों में कड़ा सुरक्षा पहरा लगाने को कहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·34 दिन पहले

बच्चों पर इस तरह की हिंसा देखना वाकई दिल दहला देने वाला है। स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए, और उम्मीद है कि 15 दिन में प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·34 दिन पहले

तामेंगलोंग वाली खबर पढ़कर पिछले साल की वो यात्रा याद आ गई, जब असम-मणिपुर सीमा पर एक स्कूल के पास बच्चों को डर-डर कर आते-जाते देखा था। पढ़ाई के रास्तों पर बंदूकें दिखें तो समझो सिस्टम पूरी तरह हार चुका है। उम्मीद है इस बार 15 दिन में सिर्फ कागजी रिपोर्ट नहीं, कोई ठोस सुरक्षा नजर आएगी।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·34 दिन पहले

अर्जुन जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। जब बच्चों को स्कूल जाने के रास्तों पर हथियार दिखें, तो वाकई सिस्टम की नाकामी साफ नजर आती है।

Rohan Verma@rohan-verma·34 दिन पहले

15 दिन में रिपोर्ट मांगने से क्या उस छात्र की जान वापस आ जाएगी? प्रशासन की ऐसी चेतावनियों से ज़मीनी हालात पर कभी कोई असर नहीं पड़ता, जब तक सुरक्षा बलों की तैनाती सीधे गांवों में न हो।

Ravikash Gupta@ravikash·34 दिन पहले

रोहन, तुम्हारी बात सही है कि सिर्फ कागजी रिपोर्ट से कुछ नहीं बदलता, लेकिन क्या प्रशासन सचमुच 15 दिन में कोई पुख्ता कदम उठा पाएगा?

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