महाराष्ट्र की पारंपरिक पूरन पोली: त्योहारों की मिठास और संस्कृति का अनूठा प्रतीक1 नवंबर को कर्क राशि में सजेगा चंद्र-मंगल योग, इन चार राशियों के जीवन में बरसेगी धन-दौलतसूर्या की नई फिल्म ‘सीन’ से पुलिस अफसर का पहला लुक आया सामने, दिवाली पर होगी रिलीजमजबूत विकास और केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप से 94 से 97 के दायरे में संभला रुपयाटाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद ऑल स्टार्स फुटबॉल क्लब ने रोके संडे सेशंस, सुरक्षा का हवालाएंथ्रोपिक ने आईपीओ दस्तावेजों में खुद किया खुलासा, बेकाबू एआई विकास से मंडरा रहा है भारी विनाश का खतराअमेरिकी डॉलर और जापानी येन में अनिश्चितता: केंद्रीय बैंकों के फैसलों से पहले 157.20 के दायरे में फंसी मुद्राब्राजील की राजनीति में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा का चमत्कार, डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदों को झटका देकर चौथी बार संभाली सत्ताऑस्ट्रेलिया वीजा नियमों में बड़ा बदलाव, अब बायोमेट्रिक प्रक्रिया का दायरा बढ़ाया गयाकाइली जेनर की 450 करोड़ रुपये की ब्रा से चर्चा में आए विक्टोरिया सीक्रेट के पीछे का कड़वा सच
मणिपुर में वखल्लोन मन्नाबा अपुन्बा ने की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी के इस्तीफे की मांगमणिपुर
26 अक्तू॰ 2026, 5:25 pm (1 दिन पहले)· 1

मणिपुर में वखल्लोन मन्नाबा अपुन्बा ने की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी के इस्तीफे की मांग

वखल्लोन मन्नाबा अपुन्बा ने मणिपुर में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी के तत्काल इस्तीफे की मांग की है और उन पर अलग प्रशासन की मांग करने वाले विधायकों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है।

इंफाल की एक प्रमुख सामाजिक संस्था वाखल्लोन मन्नाबा अपुन्बा कांगлейपाक ने मणिपुर की राजनीतिक फिज़ा में हलचल पैदा करते हुए भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी के तुरंत इस्तीफे की मांग उठाई है। संस्था ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा है कि प्रदेश अध्यक्ष राज्य की मूल आबादी की रक्षा करने और अपनी ही पार्टी के उन सात कुकी विधायकों पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं, जिन पर भारत सरकार से अलग प्रशासन की मांग उठाने का गंभीर आरोप लगा है।

कार्रवाई न करने और पार्टी हितों को प्राथमिकता देने का आरोप

संगठन के प्रचार सचिव लामदम्बा सलाम द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में इस बात पर गहरा सवाल उठाया गया है कि आखिर क्यों ए. शारदा देवी ने उन सात विधायकों के खिलाफ पार्टी से निष्कासन जैसी कोई भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की है। संगठन का यह भी आरोप है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आम नागरिकों की जान, उनकी सुरक्षा और मणिपुर के मूल निवासियों के राजनीतिक अधिकारों से ऊपर अपनी पार्टी के राजनीतिक हितों को तरजीह दी है। यह स्थिति तब और भी चिंताजनक हो जाती है जब राज्य में 3 मई 2023 से लगातार जारी हिंसा और आम नागरिकों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

ये भी पढ़ें

नेतृत्व की विफलता और जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल

नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक जवाबदेही पर सीधे सवालिया निशान लगाते हुए संगठन ने कहा है कि मौजूदा संकट के बीच ए. शारदा देवी ने मामले की गंभीरता को ताक पर रख दिया। संगठन का मानना है कि किसी भी उच्च पद पर बैठे व्यक्ति को अपने फैसलों और राज्य के नागरिकों की जान व सुरक्षा को खतरे में डालने वाले हालातों पर जवाबदेह होना ही चाहिए। इसके अलावा संगठन ने खुंद्रकपाम विधानसभा क्षेत्र के तीन युवकों की मौत और नागा नागरिकों की कथित हत्या व उनके शवों को क्षत-विक्षत किए जाने जैसी डरावनी घटनाओं का भी विशेष रूप से हवाला दिया है, जिससे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है।

सार्वजनिक आक्रोश और पुतला दहन का विरोध प्रदर्शन

जनता के बीच बढ़ते असंतोष का जिक्र करते हुए वाखल्लोन मन्नाबा अपुन्बा ने बताया कि महिलाओं ने कई जगहों पर सड़कों पर उतरकर ए. शारदा देवी के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किए हैं और उनके पुतले भी फूंके हैं। इन प्रदर्शनों को लगातार हो रही नागरिकों की हत्याओं और राजनीतिक नेतृत्व की विफलता के खिलाफ जनता के गुस्से का स्वाभाविक नतीजा बताया गया है। संगठन का कड़ा रुख है कि अगर दो पदों पर एक साथ रहने की संवैधानिक या प्रशासनिक बाध्यता उनकी जिम्मेदारियों के रास्ते की रुकावट बन रही है, तो उन्हें स्वेच्छा से प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ देना चाहिए ताकि जनता का विश्वास बहाल हो सके।

सवाल-जवाब

वखल्लोन मन्नाबा अपुन्बा ने किस बात की मांग की है?
संगठन ने मणिपुर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी के तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
ए. शारदा देवी पर मुख्य आरोप क्या है?
उन पर अलग प्रशासन की मांग करने वाले सात कुकी विधायकों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई न करने का आरोप है।
इस प्रेस विज्ञप्ति को किसने जारी किया था?
यह विज्ञप्ति संगठन के प्रचार सचिव लामदम्बा सलाम द्वारा जारी की गई थी।
मणिपुर में अशांति का दौर कब से शुरू हुआ माना जाता है?
राज्य में हिंसा और नागरिक casualties का दौर 3 मई 2023 से जारी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·17 घंटे पहले

मणिपुर में हालात वैसे ही बहुत सुधरे नहीं हैं, और अब पार्टी के भीतर से ही अध्यक्ष पर इस्तीफे का दबाव बनने लगा है। जब स्थानीय नेता और महिलाएं सड़क पर उतरकर पुतले जलाने लगें, तो समझ लीजिए कि जनता का गुस्सा किस हद तक पहुंच चुका है।

Ravikash Gupta@ravikash·17 घंटे पहले

मणिपुर की ये तस्वीरें सचमुच दिल दहला देने वाली हैं। जब मैं पिछले साल इंफाल गया था, तो वहाँ की सड़कों पर महिलाओं का ऐसा ही गुस्सा और दर्द अपनी आँखों से देखा था। जनता का नेतृत्व से भरोसा इस तरह उठ जाना राज्य के लिए बहुत डरावना संकेत है।

Michael Anderson@michael-anderson·17 घंटे पहले

रविकेश, आपकी बात बिल्कुल सही है। जब जनता का नेतृत्व से ऐसा मोहभंग हो जाए, तो हालात संभालना और भी मुश्किल हो जाता है।

Rohan Verma@rohan-verma·18 घंटे पहले

सात विधायकों पर कोई कार्रवाई न होना ही इस पूरे विवाद की असली जड़ है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·18 घंटे पहले

रोहन जी, बात सही है। जब पार्टी के ही विधायक अलग प्रशासन मांग रहे हों और प्रदेश अध्यक्ष चुप बैठी रहे, तो पार्टी के भीतर ही बगावत तय है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp