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मनोज जरांगे ने 20वें दिन तोड़ी भूख हड़ताल, महाराष्ट्र सरकार को दी तीन महीने की मोहलतमहाराष्ट्र
17 सित॰ 2026, 10:02 am (40 दिन पहले)· 2

मनोज जरांगे ने 20वें दिन तोड़ी भूख हड़ताल, महाराष्ट्र सरकार को दी तीन महीने की मोहलत

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल ने 20वें दिन अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को मांगें पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया है।

मुंबई में मराठा आरक्षण के मुद्दे पर पिछले कई दिनों से आंदोलन चला रहे सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने गुरुवार को अपनी लंबी भूख हड़ताल को आखिरकार समाप्त कर दिया है। लगातार बीस दिनों तक बिना खाए-पिए अनशन पर बैठने के बाद उन्होंने अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इस कदम की घोषणा की। आंदोलन के दौरान उनकी शारीरिक स्थिति काफी कमजोर हो गई थी, जिसके चलते उनके समर्थकों और शुभचिंतकों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही थीं।

स्वास्थ्य कारणों से बदला आंदोलन का रुख

बीड जिले के पटोडा इलाके में देर रात करीब दो बजे हजारों की संख्या में जुटे अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने अपनी गंभीर शारीरिक कमजोरी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबे उपवास के कारण उनका शरीर बुरी तरह थक चुका है और इस स्थिति में उनके लिए समर्थकों के विशाल काफिले के साथ मुंबई की तरफ पैदल मार्च करना संभव नहीं रह गया था। इसी भारी शारीरिक संकट और लोगों की लगातार अपील को ध्यान में रखते हुए उन्होंने फिलहाल आंदोलन के इस चरण को रोकने का निर्णय लिया है।

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सरकार को दी गई तीन महीने की मोहलत

अपनी हड़ताल खत्म करते हुए उन्होंने राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार को मराठा आरक्षण की तमाम लंबित मांगों पर मुहर लगाने के लिए तीन महीने की सख्त मोहलत दी है। उन्होंने बहुत साफ शब्दों में यह चेतावनी भी दी है कि सरकार इस अवधि को समाज की कमजोरी या नरमी समझने की भूल बिल्कुल न करे। यदि निर्धारित समयावधि के भीतर आरक्षण से जुड़ा आधिकारिक राजपत्र यानी गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं किया जाता है और समाज की मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो यह आंदोलन और भी अधिक आक्रामक तेवर के साथ दोबारा सड़कों पर लौट आएगा।

समर्थकों के लिए सख्त निर्देश और अपील

पटोडा से आगे की यात्रा के दौरान उन्होंने अपने समुदाय के लोगों से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे उनकी गाड़ी के पीछे गाड़ियों का लंबा काफिला लेकर न चलें। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि वे सीधे खोपोली में उनसे मुलाकात करें। उन्होंने यहां तक चेतावनी दी कि अगर अनुशासनहीनता हुई और काफिला उनके साथ चलता रहा, तो वे अपनी यात्रा बीच में ही रोक सकते हैं और या तो पटोडा में अपना धरना दोबारा शुरू कर देंगे या फिर अपने गृहक्षेत्र अंतरवाली सराटी वापस लौट जाएंगे।

मराठा समुदाय की राजनीतिक ताकत का जिक्र

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने समुदाय की एकजुटता और राजनीतिक ताकत पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि उन्होंने अपने लोगों के बच्चों के भविष्य के लिए सत्ता से सीधा मुकाबला किया है। उन्होंने कहा कि भले ही इस संघर्ष का बुरा असर उनके शरीर पर पड़ा हो, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका समुदाय किसी भी पार्टी या सरकार से बहुत बड़ा है और उनके समाज में इतनी ताकत है कि वह किसी भी सरकार को सत्ता से गिरा भी सकती है और नई सरकार का गठन भी कर सकती है.

पुराने दस्तावेजों और गजट नोटिफिकेशन की मांग

आंदोलन की प्रगति पर बात करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले दिनों करीब अट्ठावन लाख पुराने रिकॉर्ड यानी नोंदी हाथ लगने के बाद इस मुहिम को एक ठोस दिशा मिली है। उनका दावा है कि इन ऐतिहासिक दस्तावेजों की मदद से मराठा समुदाय के लगभग ढाई करोड़ लोगों को आरक्षण का सीधा फायदा मिल सकता है। उन्होंने अपनी मुख्य मांग दोहराते हुए कहा कि सरकार इन पुख्ता रिकॉर्ड्स को कानूनी मान्यता प्रदान करे और तत्काल प्रभाव से एक आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी करे ताकि समुदाय के युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके।

सवाल-जवाब

मनोज जरांगे पाटिल ने अपनी भूख हड़ताल कितने दिनों के बाद खत्म की?
उन्होंने अपनी भूख हड़ताल लगातार 20 दिनों तक चलने के बाद समाप्त की।
जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार को कितना समय दिया है?
उन्होंने मराठा आरक्षण की मांगों पर फैसला लेने के लिए सरकार को तीन महीने की सख्त मोहलत दी है।
उन्होंने अपनी हड़ताल खत्म करने की मुख्य वजह क्या बताई?
लगातार उपवास के कारण शरीर की गंभीर कमजोरी और स्वास्थ्य बिगड़ने को उन्होंने हड़ताल खत्म करने की मुख्य वजह बताया।
आंदोलनकारियों को कितने पुराने रिकॉर्ड मिले हैं जिनका जिक्र किया गया है?
आंदोलन के दौरान करीब 58 लाख पुराने रिकॉर्ड या नोंदी मिलने का दावा किया गया है।
समर्थकों को अगली मुलाकात के लिए कहाँ बुलाया गया है?
उन्होंने अपने समर्थकों को उनकी गाड़ी के पीछे चलने के बजाय सीधे खोपोली में मिलने के निर्देश दिए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·39 दिन पहले

यह घटनाक्रम विरोध प्रदर्शन के रणनीतिक चरणबद्ध बदलाव को दर्शाता है। 20 दिनों के कठिन अनशन के बाद सरकार को तीन महीने का समय देना नेतृत्व द्वारा स्वास्थ्य की स्थिति को संभालने के साथ-साथ नीतिगत दबाव बनाए रखने की एक सोची-समझी योजना है। सामाजिक आंदोलन में इस तरह की मोहलत शासन प्रशासन के लिए एक बड़ी वैधानिक और नीतिगत चुनौती खड़ी करती है। मराठा समुदाय की जनसांख्यिकीय और राजनीतिक क्षमता को देखते हुए यह 90 दिनों की समय-सीमा राज्य की भावी चुनावी और सामाजिक दिशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 दिन पहले

कानून-व्यवस्था और कानूनी पहलुओं के नजरिए से देखा जाए तो यह तीन महीने की मोहलत प्रशासन के लिए राहत के साथ-साथ एक बड़ी चुनौती भी है। विशाल जन-आंदोलन और पदयात्राओं से राज्य में सार्वजनिक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ता है। यदि सरकार इस अवधि का उपयोग कानूनी रूप से ठोस गजट अधिसूचना तैयार करने में नहीं करती है, तो समय-सीमा समाप्त होने पर बड़े पैमाने पर जन-असंतोष और कानून-व्यवस्था का संकट खड़ा हो सकता है। पुलिस और राज्य तंत्र को इस संभावित विरोध प्रदर्शन के नए चरण के लिए पूर्व-रणनीति और कानूनी स्पष्टता सुनिश्चित करनी होगी।

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