रीवा के शासकीय संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में इलाज कराने पहुंचे एक युवक ने अस्पताल के डॉक्टरों पर बेहद गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। युवक का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद वह एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने अस्पताल पहुंचा था, लेकिन वहां मौजूद डॉक्टर ने उसे सांप के काटने पर दिया जाने वाला एंटी-वेनम इंजेक्शन लगा दिया।
इंजेक्शन लगते ही बिगड़ने लगी तबीयत
परिजनों के मुताबिक युवक को बीती शाम कुत्ते ने काटा था, जिसके बाद वह तुरंत अस्पताल पहुंचा ताकि समय रहते एंटी-रेबीज का टीका लगवाया जा सके। लेकिन आरोप है कि डॉक्टर ने जल्दबाजी में उसे गलत इंजेक्शन थमा दिया, जो असल में सांप के जहर के असर को बेअसर करने के लिए इस्तेमाल होता है। युवक का कहना है कि इंजेक्शन लगते ही उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और कुछ ही देर में वह बेहोश हो गया। परिवार के लोग उसे तुरंत आपात कक्ष में ले गए, जहां हालत संभालने की कोशिश की गई। इस पूरी घटना ने मरीज और उसके परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है और उन्होंने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित युवक ने साफ कहा है कि वह इस मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराएगा, ताकि दोषी डॉक्टर और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
विवादों से अस्पताल का पुराना नाता
यह पहला मौका नहीं है जब संजय गांधी अस्पताल सुर्खियों में आया हो। इससे पहले जच्चा-बच्चा की मौत का मामला सामने आया था, जिसकी चर्चा अभी पूरी तरह थमी भी नहीं थी। इसके अलावा अस्पताल पर एक जीवित व्यक्ति को मृत घोषित करने का भी आरोप लग चुका है, जिसने अस्पताल प्रशासन की साख पर पहले से ही सवाल खड़े कर रखे हैं। ऐसे में ताजा मामला सामने आने के बाद अस्पताल में मरीजों के इलाज के दौरान बरती जा रही सतर्कता और दवाओं तथा इंजेक्शन की पहचान से जुड़ी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर
हालांकि युवक को वास्तव में कौन सा इंजेक्शन लगाया गया, उस वक्त उसकी चिकित्सकीय स्थिति क्या थी और इंजेक्शन किस डॉक्टर ने लगाया था, इन तमाम बिंदुओं पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूरा मामला जांच के दायरे में है और सच्चाई तभी सामने आएगी जब अस्पताल प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग इस पर आधिकारिक बयान जारी करेगा। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर मरीज को कुत्ते ने काटा था, तो क्या उसे भूलवश सांप के काटने वाला इंजेक्शन लगा दिया गया, और अगर हां तो अस्पताल में दवाओं तथा इंजेक्शन की पहचान व सत्यापन की व्यवस्था आखिर कितनी भरोसेमंद है।





















