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मीडिया संपर्क की शर्त तोड़ी पर जेल वापसी के चलते शरजील इमाम की अंतरिम जमानत रद्द करने से कड़कड़डूमा कोर्ट का इनकारदिल्ली
10 अक्तू॰ 2026, 6:29 pm (19 दिन पहले)· 1

मीडिया संपर्क की शर्त तोड़ी पर जेल वापसी के चलते शरजील इमाम की अंतरिम जमानत रद्द करने से कड़कड़डूमा कोर्ट का इनकार

दिल्ली की अदालत ने पाया कि शरजील इमाम ने मीडियाकर्मी की मौजूदगी में बैठकर अंतरिम जमानत की शर्त का उल्लंघन किया, लेकिन उसी दिन तय आत्मसमर्पण को देखते हुए जमानत रद्द नहीं की।

दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने अंतरिम जमानत पर बाहर आए शरजील इमाम के आचरण पर बेहद तल्ख रुख अख्तियार किया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से दर्ज किया कि मीडिया से दूरी बनाए रखने की अनिवार्य शर्त होने के बावजूद शरजील इमाम ने इसका पालन नहीं किया। हालांकि, अदालत ने उनकी अंतरिम राहत को औपचारिक रूप से निरस्त करने का आदेश पारित करने से परहेज किया, क्योंकि निर्धारित कार्यक्रम के तहत उन्हें उसी दिन जेल में आत्मसमर्पण करना था। ऐसे में अंतिम दिन जमानत रद्द करने का तकनीकी आदेश जारी करना अदालत ने व्यावहारिक और उचित नहीं समझा।

कमरे में मीडियाकर्मी की मौजूदगी पर अदालत की तल्खी

अदालत ने 10 अक्टूबर 2026 के अपने आदेश में एक वीडियो रिकॉर्डिंग का बारीकी से संज्ञान लिया। इस फुटेज के परीक्षण के बाद यह बात सामने आई कि जिस कमरे के भीतर शरजील इमाम व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे, ठीक उसी कमरे में एएनआई के एक मीडियाकर्मी द्वारा उनके भाई का साक्षात्कार लिया जा रहा था। अदालत के अनुसार, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर ऐसी स्थिति बनने देना 22 सितंबर 2026 को तय किए गए न्यायिक निर्देशों की सीधी अवहेलना है। जमानत की मंजूरी देते वक्त अदालत ने यह शर्त अनिवार्य की थी कि वह किसी भी प्रकार से मीडिया के संपर्क में नहीं आएंगे।

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शादी समारोह के लिए मिली थी सात दिनों की न्यायिक राहत

शरजील इमाम को परिवार में अपने चचेरे भाई के विवाह समारोह में सम्मिलित होने के उद्देश्य से यह अस्थायी रिहाई दी गई थी। अदालत ने 4 अक्टूबर से लेकर 10 अक्टूबर तक कुल 7 दिनों की अंतरिम जमानत मंजूर की थी। इसी तय अवधि के दौरान नियमों की अनदेखी का यह मामला सामने आया। शनिवार, 10 अक्टूबर को ही उनकी अंतरिम जमानत की मियाद समाप्त हो रही थी, जिसके चलते अदालत ने तत्काल रद्द करने की जगह उन्हें निर्धारित समय पर जेल लौटने की प्रक्रिया पूरी करने दी।

समय पर आत्मसमर्पण और दिल्ली दंगों से जुड़ा पृष्ठभूमि मामला

अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि शरजील इमाम को शनिवार शाम की तय समयसीमा तक कारागार में पहुंचकर सरेंडर कर देना चाहिए। इस पर उनके कानूनी प्रतिनिधि ने अदालत को सूचित किया कि उनके मुवक्किल पहले ही विमान में सवार हो चुके हैं और समय पर दिल्ली पहुंचकर जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी कर लेंगे। यह पूरी कानूनी प्रक्रिया साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के संबंध में दर्ज प्राथमिकियों से जुड़ी हुई है, जिसमें गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए समेत भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराएं शामिल हैं। साल 2020 में सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में व्यापक सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। उस भीषण हिंसा में 53 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 700 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

सवाल-जवाब

कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम के बारे में क्या टिप्पणी की?
कोर्ट ने कहा कि शरजील इमाम ने मीडिया से बातचीत न करने की शर्त का उल्लंघन किया है क्योंकि जिस कमरे में वे मौजूद थे, वहीं उनके भाई का इंटरव्यू लिया जा रहा था।
अदालत ने शरजील इमाम की अंतरिम जमानत रद्द क्यों नहीं की?
अदालत ने जमानत इसलिए रद्द नहीं की क्योंकि 10 अक्टूबर को ही उनकी अंतरिम जमानत का आखिरी दिन था और उन्हें उसी शाम जेल में सरेंडर करना था।
शरजील इमाम को कितने दिनों की अंतरिम जमानत मिली थी?
उन्हें अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए 4 से 10 अक्टूबर तक कुल 7 दिनों की अंतरिम जमानत दी गई थी।
शरजील इमाम किस मामले में आरोपी हैं?
वे 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में आरोपी हैं, जिसमें यूएपीए समेत कई धाराओं के तहत आरोप दर्ज हैं।
शरजील इमाम के वकील ने अदालत को क्या जानकारी दी?
वकील ने बताया कि वे पहले ही फ्लाइट में बैठ चुके हैं और शनिवार शाम तक दिल्ली पहुंचकर जेल में आत्मसमर्पण कर देंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·19 दिन पहले

अदालत ने शर्त टूटने पर नाराज़गी तो जताई, पर उसी दिन सरेंडर होने की वजह से बात टाल दी। पर सवाल यह है कि जब कैमरा चालू था और भाई का इंटरव्यू हो रहा था, तो शरजील ने खुद वहां से हटने की कोशिश क्यों नहीं की?

Arjun Mehta@arjun-mehta·19 दिन पहले

शर्तें तो साफ थीं कि मीडिया से दूर रहना है, फिर भी भाई के इंटरव्यू वाले कमरे में मौजूद रहना नियम तोड़ने जैसा ही है। जब शाम को सरेंडर ही करना था तो कोर्ट ने राहत दे दी, पर क्या जेल प्रशासन अब आगे की ऐसी छुट्टियों में और सख्त शर्तें रखेगा?

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·19 दिन पहले

अर्जुन, आपकी बात सही है कि नियम टूटे हैं। पर क्या आपको लगता है कि ऐसे मामलों में अगली बार कोर्ट परिवार की शादियों के लिए भी अनुमति देना बंद कर देगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·19 दिन पहले

अदालत ने भले ही आज नरमी बरती हो, पर जमानत की शर्तों का यूं सरेआम उल्लंघन करना कानूनी पेंच यकीनन बढ़ा देता है।

Rohan Verma@rohan-verma·19 दिन पहले

करन भाई, बात तो सही है, पर जब दिन ही खत्म हो रहा था तो अदालत का वक्त खराब करने का कोई मतलब नहीं था।

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