ओडिशा में चक्रवात अर्नब की वजह से मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। गंजाम जिले के गिदिपाबली गांव में 28 अक्टूबर को हुए विनाशकारी भूस्खलन के बाद मलबे में दबे और लापता लोगों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने स्थिति का विवरण देते हुए बताया कि प्रभावित बस्ती की कुल आबादी 25 थी। आपदा के वक्त जान बचाकर जंगल के रास्ते पैदल भागने वाले केवल 13 ग्रामीण ही राहत केंद्र तक सुरक्षित पहुंच सके। इसके चलते 12 लोग लापता माने गए थे, जिनमें से एक व्यक्ति का शव मलबे से निकाल लिया गया है, जबकि 11 अन्य लोगों की तलाश निरंतर जारी है।
लापता ग्रामीणों की तलाश और तलाशी अभियान
प्रशासन इस बात की गहन पड़ताल कर रहा है कि आपदा के समय ग्रामीण किस दिशा में भागे थे। सुरेश पुजारी ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण कंधमाल की तरफ निकले, घने जंगलों, उफनते नालों और जल निकासी मार्गों को पार करते हुए गंजाम की सीमा में गए या किसी अन्य रास्ते पर चले गए, इसकी पूरी जांच की जा रही है। मौके पर राहत और खोज कार्य तेजी से संचालित करने के लिए जिला कलेक्टर और सब-कलेक्टर की सीधी निगरानी में विशेष ऑपरेशंस ग्रुप (SOG), नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) और ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) के जवानों को तैनात किया गया है।
रेलवे और नौसेना की अत्याधुनिक तकनीक से मदद
गंजाम और कंधमाल की सीमा पर स्थित भंजनगर क्षेत्र में भारी मलबे को हटाने के लिए भारतीय रेलवे ने भी अपनी विशेष जनशक्ति और भारी मशीनों को तैनात किया है। राहत कार्यों में भारतीय नौसेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली उन्नत तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। यह प्रणाली खास तरह के सेंसर्स और स्कैनिंग क्षमताओं से लैस है, जो गहरी मिट्टी, गाद और मलबे के नीचे दबे जीवन के सूक्ष्म संकेतों का पता लगाने में पूरी तरह सक्षम है। इस तकनीक के उपयोग से बचाव दल को मलबे में फंसे लोगों तक तेजी से पहुंचने में मदद मिल रही है।
गंजाम और कंधमाल में व्यापक नुकसान और राहत शिविर
चक्रवात अर्नब और उसके बाद आई बाढ़ के कारण गंजाम और कंधमाल जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जहां कुल मिलाकर 1,18,730 लोग संकट से घिरे हैं। कंधमाल जिले में अब तक 3 लोगों की मौत दर्ज की गई है। प्रशासनिक अमले ने तत्परता दिखाते हुए 75,855 लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर स्थानांतरित किया है। बेघर और प्रभावित नागरिकों की सहायता के लिए कुल 396 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा और फसलों की क्षति
आपदा प्रबंधन टीमों ने विशेष अभियान चलाकर 807 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्वास्थ्य केंद्रों और शिविरों में पहुंचाया, जिनमें से 399 महिलाओं ने सुरक्षित रूप से बच्चों को जन्म दिया है। प्राकृतिक आपदा ने बुनियादी ढांचे और कृषि क्षेत्र को भी गहरा आघात पहुंचाया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 75,388 हेक्टेयर क्षेत्र में लगी फसलें तबाह हो चुकी हैं और 1,672 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस बीच, राज्य प्रशासन आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र की तरफ बढ़ रहे एक नए चक्रवाती तूफान की गतिविधियों पर भी लगातार सतर्कता बरत रहा है।



















