जयपुर के मानसरोवर स्थित इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। उत्सव के इस खास दिन पर भगवान के दर्शन करने की चाह लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर में जुटने लगे थे। धीरे-धीरे यह भीड़ इतनी बढ़ गई कि मंदिर के बाहर और अंदर दर्शन के लिए लंबी-लंबी कतारें लग गईं। स्थिति यह हो गई कि आम भक्तों को अपनी बारी का इंतजार करने के लिए घंटों तक लाइनों में खड़े रहना पड़ा।
लंबी कतारों से परेशान हुए आम श्रद्धालु
जन्माष्टमी के मौके पर शहर के कोने-कोने से ही नहीं बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी लोग भगवान के दर्शन करने पहुंचे थे। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मंदिर में आने वाले लोगों का सिलसिला बढ़ता गया और कतारें भी लंबी होती चली गईं। आम श्रद्धालुओं को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा, जिससे कई लोग परेशान नजर आए। लोगों का यह भी कहना था कि जन्माष्टमी जैसे बड़े और पावन पर्व पर मंदिर में भारी भीड़ जुटना कोई नई बात नहीं है। हर साल इस दिन ऐसा ही माहौल रहता है और प्रबंधन को इस बात का अनुमान पहले से होना चाहिए था। इसके बावजूद, भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए जो पुख्ता इंतजाम होने चाहिए थे, वे नजर नहीं आए, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं।
वीवीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर फूटा गुस्सा
सामान्य भक्तों के लिए लंबी लाइनों में खड़े होने की मजबूरी के बीच, मंदिर की वीवीआईपी दर्शन व्यवस्था ने आग में घी का काम किया। इसको लेकर श्रद्धालुओं का गुस्सा खुलकर सामने आया। लोगों ने आरोप लगाया कि मंदिर प्रशासन का पूरा ध्यान और प्राथमिकता वीवीआईपी आगंतुकों और खास लोगों को बिना किसी परेशानी के दर्शन कराने पर केंद्रित थी, जबकि आम जनता धूप और धक्का-मुक्की के बीच लाइनों में जूझती रही। भक्तों का साफ कहना था कि भगवान के दरबार में हर कोई समान है और मंदिर में आने वाले सभी लोगों के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए। जब एक वर्ग विशेष को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत दर्शन मिल जाते हैं और आम आदमी को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है, तो ऐसी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रबंधन की तैयारियों पर उठे गंभीर सवाल
मानसरोवर इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी के दौरान सामने आए इन हालातों ने मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और दर्शनार्थियों का मानना है कि त्योहारों के सीजन में जब भारी भीड़ उमड़ने की पूरी संभावना होती है, तो प्रशासन को पहले से ही एक मजबूत कार्ययोजना तैयार रखनी चाहिए। मंदिर के प्रवेश द्वारों, निकास मार्गों और लाइनों की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि हर भक्त को बिना किसी असुविधा के भगवान की एक झलक मिल सके। इस बार लंबी कतारों के साथ-साथ वीवीआईपी संस्कृति के हावी रहने से श्रद्धालुओं के अनुभव पर नकारात्मक असर पड़ा है, जिससे आने वाले बड़े आयोजनों के लिए व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।



















