देशभर में मॉनसून का मिजाज इन दिनों काफी आक्रामक बना हुआ है और मौसम विभाग ने आगामी चौबीस घंटों के दौरान देश के लगभग बीस राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। झारखंड के ऊपर बना गहरा कम दबाव का क्षेत्र यानी डिप्रेशन लगातार पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर आगे बढ़ रहा है। मौसम विज्ञानियों का आकलन है कि यह वेदर सिस्टम अगले चौबीस घंटों के भीतर थोड़ा कमजोर पड़ सकता है और एक लो प्रेशर एरिया में तब्दील हो सकता है, लेकिन इसके कमजोर पड़ने का यह कतई मतलब नहीं है कि बारिश के संकट से तत्काल राहत मिल जाएगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की चेतावनी के अनुसार, उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के तमाम हिस्सों में बादलों की लुकाछिपी और झमाझम का दौर बदस्तूर जारी रहने वाला है। इस पूरे मौसमी घटनाक्रम का सबसे ज्यादा और गंभीर असर पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वी मध्य प्रदेश जैसे इलाकों पर पड़ने की पूरी आशंका जताई गई है, जहां जनजीवन पर इसका असर दिख सकता है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का हाल और बादलों का डेरा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 19 अगस्त को मौसम मिला-जुला रहने की उम्मीद है और शहर के आसमान पर बादलों का कड़ा पहरा बना रहेगा। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, दिन की शुरुआत से लेकर दोपहर के वक्त के बीच शहर के कुछ इलाकों में हल्की से लेकर मध्यम दर्जे की बौछारें देखने को मिल सकती हैं। इसके बाद जैसे-जैसे शाम ढलेगी और रात का वक्त आएगा, वैसे-वैसे बहुत हल्की फुहारों या फिर हल्की बारिश का एक और दौर राजधानी के विभिन्न हिस्सों को भिगो सकता है। यानी दिल्ली वासियों के लिए यह दिन पूरी तरह से एक मूसलाधार बारिश वाला दिन साबित नहीं होगा, बल्कि मौसम बार-बार अपने तेवर बदलता हुआ नजर आएगा। कभी अचानक तेज बौछारें गिर सकती हैं तो कभी हल्की फुहारों से राहत मिल सकती है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में बने वेदर सिस्टम और मानसून ट्रफ की सक्रियता की वजह से ही राजधानी में बादलों की यह आवाजाही बनी हुई है। ऐसे में सुबह के वक्त अपने घरों से दफ्तरों या कामकाज के लिए निकलने वाले लोगों और शाम को देर से घर लौटने वाले यात्रियों को मौसम के इस बदलते मिजाज को ध्यान में रखकर ही अपनी यात्रा की योजना बनानी चाहिए।
उत्तर प्रदेश में मौसम का सबसे आक्रामक रूप
उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए 19 अगस्त का दिन सबसे बड़ी मुसीबत और चुनौती लेकर आ सकता है। राज्य के पूर्वी हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है और कुछ खास स्थानों पर तो अत्यंत भारी बारिश तक दर्ज की जा सकती है। मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 अगस्त से लेकर 23 अगस्त के बीच लंबे समय तक कई जगहों पर मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। केवल पूर्वी हिस्सा ही नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का इलाका भी इस भारी बरसात के प्रकोप से अछूता रहने वाला नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 19 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी आशंका जताई गई है। इसके साथ ही इन तमाम इलाकों में बादलों की भयंकर गरज-चमक और तेज रफ्तार से हवाएं चलने की गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं। यदि इतनी अधिक मात्रा में पानी गिरता है, तो निचले इलाकों में भारी जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है और स्थानीय स्तर पर सड़क मार्ग तथा रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित होने का अंदेशा बना रहेगा। विशेष तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के उन जिलों में जहां अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जिला प्रशासन और आम नागरिकों को खासी सावधानी बरतने की सख्त जरूरत होगी ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड और हिमाचल में मुश्किलें
पहाड़ी राज्यों का हाल भी कुछ ऐसा ही रहने वाला है और उत्तराखंड में 19 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश का नया दौर तबाही बढ़ा सकता है। इस पर्वतीय राज्य में 18 अगस्त से शुरू हुआ बारिश का यह सिलसिला लगातार 24 अगस्त तक थमने का नाम नहीं लेगा और लगातार जारी रहने की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में जब इतनी तेज बरसात होती है, तो मौसम का मिजाज पलक झपकते ही बदल जाता है, जिससे भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड की घटनाएं आम हो जाती हैं और महत्वपूर्ण सड़कें मलबे के आने से पूरी तरह बाधित हो जाती हैं। बारिश के इस तांडव के साथ-साथ राज्य के कई हिस्सों में बादलों की तेज गर्जना और आसमानी बिजली गिरने का भी भयंकर खतरा मंडरा रहा है। यही वजह है कि पहाड़ी रास्तों पर सफर करने वाले चालकों, नदी-नालों के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों और भूस्खलन के प्रति संवेदनशील यानी लैंडस्लाइड प्रोन जोन में आने वाले यात्रियों को अतिरिक्त सतर्कता और एहतियात बरतने की सलाह दी गई है। सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में भी 19 अगस्त को भारी बारिश होने की पूरी संभावना है, जबकि जम्मू-कश्मीर और उससे सटे हुए अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भी मौसम का यह बिगड़ा हुआ मिजाज पूरी तरह से बना रहेगा।
बिहार और झारखंड में डिप्रेशन का असर
झारखंड के वायुमंडल में सक्रिय रूप से बना हुआ डिप्रेशन 18 अगस्त की सुबह करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ आगे बढ़ रहा था। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि यह मौसमी सिस्टम झारखंड और बिहार के भौगोलिक इलाकों से गुजरते हुए आगामी चौबीस घंटों के भीतर और अधिक कमजोर पड़ जाएगा और एक सुस्पष्ट निम्न दबाव के क्षेत्र यानी वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया में बदल जाएगा। हालांकि इस सिस्टम के कमजोर पड़ने की प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि बारिश की गतिविधियां अचानक थम जाएंगी। झारखंड राज्य में 19 अगस्त को भी अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की पूरी संभावना बनी हुई है। इससे ठीक पहले 18 अगस्त को राज्य के कई हिस्सों में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट भी जारी किया गया था। इस दौरान बादलों की भयंकर गरज-चमक और तेज हवाएं चलने का दौर भी कुछ इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकता है। दूसरी तरफ, बिहार में भी 19 अगस्त को भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है। राज्य के कई हिस्सों में झमाझम पानी के साथ-साथ बादलों की गरज और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज झक्कड़ हवाएं जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर सकती हैं। डिप्रेशन के झारखंड से खिसक कर बिहार की ओर बढ़ने के कारण राज्य के मौसम पर इसका सीधा और गहरा प्रभाव साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। बिहार में इस बारिश का यह सिलसिला 19 अगस्त के बाद भी रुकने वाला नहीं है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने यह संभावना जताई है कि 21 अगस्त से 23 अगस्त के बीच राज्य के विभिन्न हिस्सों में एक बार फिर से भारी बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है। ऐसे में निचले इलाकों में जलभराव होने और स्थानीय नदियों तथा जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ने जैसी स्थितियों पर लगातार कड़ी नजर रखना बेहद आवश्यक हो गया है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सक्रिय मॉनसून
मध्य प्रदेश राज्य में 19 अगस्त को भी मॉनसून पूरी तरह से आक्रामक और सक्रिय बना रहेगा। पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी आशंका जताई गई है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश के इलाकों में भी अच्छी खासी भारी बारिश होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। मौसम विभाग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 18 अगस्त से 22 अगस्त के बीच राज्य के दोनों प्रमुख हिस्सों में बादलों की गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की गतिविधियां लगातार जारी रहेंगी। विशेष रूप से पूर्वी मध्य प्रदेश में होने वाली मूसलाधार बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भर सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ जाने से संपर्क कटने की स्थिति बन सकती है। मध्य प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में भी 19 अगस्त को भारी बारिश और बादलों की गरज-चमक का व्यापक असर देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में भी मौसम विभाग ने भारी बारिश का कड़ा अलर्ट जारी किया है, जिससे वहां के स्थानीय प्रशासन को भी पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पश्चिम बंगाल, ओडिशा और सिक्किम का मौसमी परिदृश्य
पूर्वी भारत के तमाम राज्यों में भी मॉनसून की सक्रियता कम होने का नाम नहीं ले रही है। सब-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के पहाड़ी तथा तराई वाले इलाकों में 19 अगस्त को भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही गंगीय पश्चिम बंगाल के मैदानी इलाकों में भी बारिश का यह दौर लगातार बना रहेगा। झारखंड और उसके आसपास के क्षेत्रों में जो शक्तिशाली मौसमी प्रणाली सक्रिय है, उसका परोक्ष असर इन पूर्वी राज्यों के मौसम पर भी साफ-साफ दिखाई दे रहा है। ओडिशा राज्य में भी 19 अगस्त को बारिश का यह सिलसिला लगातार जारी रहने की पूरी संभावना है। हालांकि, मौसम विभाग का यह भी कहना है कि ओडिशा में भारी बारिश का असली और सबसे बड़ा जोर आगामी 22 अगस्त से 24 अगस्त के बीच देखने को मिल सकता है, जिसके लिए पहले से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। 19 अगस्त की सुबह तक बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में समुद्र की स्थिति को लेकर भी मछुआरों और समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।





















