सिंह राशिफल 22 सितंबर 2026: आठवें भाव में शनि का प्रभाव, धैर्य और व्यवस्थित दिनचर्या से बनेंगे कामन्यूयॉर्क में वैश्विक तनाव पर बोले एस. जयशंकर, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में तुरंत बदलाव जरूरीकिश्त की मूल कंपनी वनईएमआई टेक्नोलॉजीज की बाजार में मजबूत एंट्री, 12 फीसदी प्रीमियम पर हुई लिस्टिंगदलाल स्ट्रीट पर शुक्रवार को लौटी रौनक, रियल्टी और मिडकैप की अगुवाई में सेंसेक्स और निफ्टी मजबूतअमेरिकी डॉलर के सामने कनाडाई डॉलर 5 अगस्त के बाद के सबसे निचले स्तर पर फिसला, व्यापार तनाव से बढ़ा दबावकच्चे तेल में चार दिनों की गिरावट थमी, एशियाई कारोबार में कीमतें संभलींशेयर बाजार में आज 64 कंपनियों का एक्स-डेट एक्शन: टीएएएल टेक का स्टॉक स्प्लिट और 63 शेयरों पर डिविडेंड का मौकाराजस्थान के देशनोक में खेत की डिग्गी में डूबे तीन सगे भाई, एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में गई जानलखनऊ में 3,567 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को बांटे गए नियुक्ति पत्र, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर जोरबैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के कर्जदारों पर बढ़ा ब्याज का बोझ, 12 जून से लागू होंगी नई दरें
मुआवजे की मांग को लेकर फरीदाबाद के सोतई में डटे किसान, 32वें दिन महिलाओं ने किया भजन-कीर्तनहरियाणा
21 सित॰ 2026, 2:09 pm (18 घंटे पहले)· 0

मुआवजे की मांग को लेकर फरीदाबाद के सोतई में डटे किसान, 32वें दिन महिलाओं ने किया भजन-कीर्तन

फरीदाबाद के सोतई गांव में जमीन के बकाए मुआवजे को लेकर किसानों का अनिश्चितकालीन आंदोलन 32वें दिन भी जारी रहा, जहां महिलाओं ने भजन-कीर्तन कर अधिकारियों को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की।

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में जमीन अधिग्रहण के बदले उचित मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार जोर पकड़ रहा है। सोतई गांव में चल रहा यह धरना प्रदर्शन अब 32वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जहां आंदोलनकारी ग्रामीण अपनी जमीन के हक की लड़ाई को पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। इस अनिश्चितकालीन प्रदर्शन में अब एक अनूठा और बेहद भावनात्मक पहलू देखने को मिल रहा है। धरना स्थल पर जुटी ग्रामीण महिलाएं भक्ति गीतों और भजन-कीर्तन के जरिए अपना विरोध दर्ज करा रही हैं। महिलाओं का कहना है कि वे ईश्वर से भ्रष्ट व्यवस्था, प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना कर रही हैं ताकि अन्नदाताओं की जायज समस्याओं का जल्द से जल्द निस्तारण हो सके।

दिन-रात चौबीसों घंटे चल रहा शांतिपूर्ण आंदोलन

सोतई गांव में बना यह धरना मंच अब इलाके के ग्रामीणों के लिए हक और इंसाफ का प्रतीक बन चुका है। आंदोलनकारियों ने पूरी व्यवस्था को बेहद शांतिपूर्ण लेकिन अडिग बनाए रखा है। यहां आंदोलन दिन-रात यानी चौबीसों घंटे लगातार जारी रहता है। दिन के समय जहां महिलाएं और बुजुर्ग मोर्चे पर डटे रहते हैं, वहीं नौकरीपेशा ग्रामीण अपनी ड्यूटी पूरी करके सीधे धरना स्थल पर पहुंचते हैं। स्थानीय निवासी राजकुमार ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वे रोजाना आठ घंटे की नौकरी करते हैं। अपनी शिफ्ट खत्म करने के बाद वे घर जाने के बजाय सीधे धरना स्थल पर पहुंच जाते हैं और किसानों के साथ बैठते हैं। उनका कहना है कि यह उनके अपने हक और जमीन की लड़ाई है, जिसे वे किसी भी कीमत पर अधूरा नहीं छोड़ सकते।

ये भी पढ़ें

ग्रामीण महिलाओं की दो टूक, पैसा मिलने तक नहीं हटेंगे

धरने में बैठी महिलाओं का संकल्प भी पूरी तरह अडिग नजर आ रहा है। सोतई गांव की रहने वाली विद्या ने बताया कि वे सभी केवल अपनी जमीन के हक के लिए यहां जमा हुई हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी भूमि का पूरा भुगतान नहीं मिल जाता, तब तक वे इस स्थान से नहीं हटेंगी। वे भजन-कीर्तन के माध्यम से ईश्वर से अधिकारियों को सही सोच और सद्बुद्धि देने की गुहार लगा रही हैं। वहीं विमला देवी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह उनके अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने साफ कहा कि प्रशासन जब उनकी जमीन का तय पैसा देगा, तभी वे अपनी धरती सौंपेंगी और बिना मुआवजा मिले कोई भी ग्रामीण पीछे हटने को तैयार नहीं है।

पीएमओ की समीक्षा बैठक से बंधी उम्मीदें और आशंकाएं

आंदोलनकारी किसानों की नजरें अब सीधे दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ में होने वाली महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक पर टिकी हैं। किसान नेता बबलू हुड्डा ने बताया कि करीब 15 दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की थी। इसके बाद अब 23 सितंबर को फरीदाबाद के सभी संबंधित अधिकारियों को पीएमओ में तलब किया गया है। किसानों को उम्मीद है कि इस आमने-सामने की बैठक में प्रधानमंत्री फरीदाबाद के प्रशासनिक अफसरों से धरने के वास्तविक कारणों की जानकारी लेंगे और मामले का उचित समाधान निकालेंगे।

बबलू हुड्डा के अनुसार, बैठक के दौरान अधिकारियों से यह पूछा जाएगा कि उनके पास सोतई गांव की जमीन को विवादित ठहराने के लिए आखिर कौन से कागजात या दस्तावेज मौजूद हैं। किसानों का मानना है कि इस बैठक से पूरे मामले का सच और झूठ पूरी तरह खुलकर सामने आ जाएगा। हालांकि, आंदोलनकारियों के मन में एक आशंका यह भी बनी हुई है कि कहीं अधिकारी बैठक में कोई गलत, भ्रामक या मनगढ़ंत रिपोर्ट पेश न कर दें। इसी वजह से ग्रामीणों ने मांग रखी है कि इस तरह की उच्चस्तरीय समीक्षा में किसानों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, जिससे वे सीधे अफसरों के सामने अपना पक्ष और जमीनी हकीकत दर्ज करा सकें।

जेवर एयरपोर्ट सड़क मार्ग से प्रभावित महमदपुर के किसानों का भी दर्द

इस अधिग्रहण और मुआवजे की समस्या का दायरा केवल सोतई गांव तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के कई अन्य गांव भी इसकी चपेट में हैं। सोतई से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित महमदपुर गांव के निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि जेवर एयरपोर्ट को जोड़ने वाली सड़क परियोजना का रास्ता उनके गांव से होकर भी गुजरा है। मुकेश कुमार के अनुसार, इस पूरे सड़क प्रोजेक्ट में उनके परिवार की एकमात्र कृषि भूमि चली गई।

मुकेश कुमार ने बताया कि उनके परिवार के पास 112 साल की गिरदावरी का पुराना रिकॉर्ड मौजूद है। उन्होंने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत में मुकदमा भी दायर किया हुआ है। इसके बावजूद प्रशासन के अड़ियल रवैये के आगे उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई और आज तक उन्हें अपनी इकलौती जमीन का एक रुपया भी मुआवजा नहीं मिल सका है। वे भी न्याय की उम्मीद में सोतई के इस धरने में शामिल होकर अपने हक की मांग उठा रहे हैं।

सवाल-जवाब

फरीदाबाद के सोतई गांव में किसान कितने दिनों से धरने पर बैठे हैं?
सोतई गांव में किसान जमीन के बकाए मुआवजे की मांग को लेकर लगातार 32 दिनों से शांतिपूर्ण धरने पर बैठे हैं।
धरना स्थल पर महिलाएं क्या कर रही हैं और उनका क्या कहना है?
धरना स्थल पर महिलाएं भजन-कीर्तन कर रही हैं और ईश्वर से भ्रष्ट अधिकारियों व नेताओं को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना कर रही हैं।
पीएमओ में फरीदाबाद के अधिकारियों की समीक्षा बैठक कब होने वाली है?
प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ में फरीदाबाद के सभी संबंधित अधिकारियों को 23 सितंबर को समीक्षा बैठक के लिए तलब किया गया है।
किसान नेता बबलू हुड्डा ने पीएमओ बैठक को लेकर क्या बात कही?
बबलू हुड्डा ने बताया कि बैठक में अधिकारियों से पूछा जाएगा कि सोतई की भूमि को विवादित बताने के लिए उनके पास क्या दस्तावेज हैं, जिससे सच सामने आएगा।
महमदपुर गांव के मुकेश कुमार की क्या समस्या है?
मुकेश कुमार के परिवार की अकेली जमीन जेवर एयरपोर्ट सड़क परियोजना में चली गई और 112 साल की गिरदावरी होने के बावजूद उन्हें आज तक मुआवजा नहीं मिला।
स्थानीय निवासी राजकुमार धरने में किस तरह अपना सहयोग दे रहे हैं?
राजकुमार रोजाना आठ घंटे की अपनी नौकरी पूरी करने के बाद सीधे धरना स्थल पर पहुंचकर अन्य किसानों के साथ बैठते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·11 घंटे पहले

फरीदाबाद के सोतई गांव में 32 दिनों से चल रहा यह धरना भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के पुराने प्रशासनिक संकट को उजागर करता है। जब स्थानीय ग्रामीण नौकरी के बाद भी आंदोलन से जुड़ते हैं और महिलाएं भजन-कीर्तन के जरिए विरोध जताती हैं, तो यह जमीनी स्तर पर गहरे असंतोष को दिखाता है। अब सबकी निगाहें 23 सितंबर को पीएमओ में होने वाली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक पर टिकी हैं, जो इस गतिरोध के समाधान की दिशा तय कर सकती है।

Ravikash Gupta@ravikash·17 घंटे पहले

फरीदाबाद के सोतई गांव में 32 दिन से चल रहा यह किसान आंदोलन सिर्फ ज़मीन के मुआवजे का मामला नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास के बीच बढ़ते वित्तीय तनाव को दर्शाता है। जब बुनियादी परिसंपत्तियों का समय पर भुगतान नहीं होता, तो यह अनिश्चितता कॉरपोरेट निवेश और स्थानीय बाज़ार की स्थिरता दोनों को प्रभावित करती है। अब सबकी निगाहें पीएमओ की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक पर टिकी हैं, जो इस गतिरोध को समाप्त कर सकती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·17 घंटे पहले

फरीदाबाद के सोतई गांव में 32 दिन से जारी धरना प्रशासनिक सुस्ती और नीतिगत संवादहीनता का स्पष्ट प्रमाण है। जब ग्रामीण महिलाएं भजन-कीर्तन के जरिए सद्बुद्धि की प्रार्थना करने को विवश हों, तो यह शासन तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर करता है। आगामी 23 सितंबर को पीएमओ में होने वाली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक इस बात की परीक्षा होगी कि केंद्र सरकार ऐसे मामलों में किस तरह त्वरित हस्तक्षेप करती है, क्योंकि समय पर मुआवजा न मिलने से प्रशासनिक मशीनरी की विश्वसनीयता पर सीधा असर पड़ता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 घंटे पहले

फरीदाबाद के सोतई गांव में 32 दिन से चल रहा यह धरना केवल ज़मीन के मुआवजे का मामला नहीं है, बल्कि यह行政 और किसानों के बीच संवादहीनता की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। जब तक प्रधानमंत्री कार्यालय की आगामी समीक्षा बैठक में कोई ठोस प्रशासनिक निर्देश और समय-सीमा तय नहीं होती, तब तक इस शांतिपूर्ण आंदोलन के और अधिक उग्र होने या कानूनी पेचीदगियों में उलझने की पूरी आशंका बनी हुई है।

Rohan Verma@rohan-verma·17 घंटे पहले

फरीदाबाद के सोतई गांव में 32 दिन से जारी यह धरना इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय प्रशासन और किसानों के बीच संवाद पूरी तरह टूट चुका है। महिलाएं जिस प्रकार भजन-कीर्तन के जरिए अधिकारियों को सद्बुद्धि देने की गुहार लगा रही हैं, वह प्रशासनिक तंत्र के प्रति गहरी नाराजगी को दर्शाता है। अब सबकी निगाहें पीएमओ की आगामी समीक्षा बैठक पर टिकी हैं। यदि इस उच्चस्तरीय बैठक में कोई स्पष्ट समय-सीमा के साथ ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो यह शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और अधिक जटिल रूप ले सकता है, जिससे शासन और न्याय व्यवस्था पर दबाव और बढ़ेगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp