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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हर दिन गुजरते हैं डेढ़ लाख वाहन, दो दशक से ज्यादा पुराना है यह सुपर-फास्ट मार्गमहाराष्ट्र
18 सित॰ 2026, 8:14 pm (38 दिन पहले)· 4

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हर दिन गुजरते हैं डेढ़ लाख वाहन, दो दशक से ज्यादा पुराना है यह सुपर-फास्ट मार्ग

नवीं मुंबई से पुणे को जोड़ने वाले इस एक्सप्रेसवे का निर्माण दो दशक से अधिक पहले हुआ था और आज इस पर क्षमता से कई गुना अधिक वाहन फर्राटा भरते हैं।

नवीं मुंबई के कालमबोली क्षेत्र से पुणे के किवाले तक फैला यह एक्सप्रेसवे करीब 94.6 किलोमीटर लंबा है, जिसे साल 2002 में वाहनों के आवागमन के लिए खोला गया था। मूल योजना के अनुसार इस आधुनिक सड़क को आगामी तीन दशकों तक ट्रैफिक का दबाव संभालने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन मौजूदा समय में इस पर वाहनों की इतनी भारी भीड़ उमड़ती है कि इसे दस लेन तक विस्तारित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। वर्तमान में यह हाई-स्पीड मार्ग छह लेन का बना हुआ है, जिस पर यातायात का दबाव बढ़ने की वजह से कई बार भीषण जाम की स्थिति बन जाती है और सफर करने वाले लोगों को दो-दो घंटे तक जाम में फंसना पड़ जाता है। खासकर लोनावला और खंडाला जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के समीप अमूमन ऐसा भारी ट्रैफिक देखने को मिलता है।

क्षमता से कई गुना अधिक वाहनों का संचालन

शुरुआती दौर में इस मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे को रोजाना लगभग चालीस से पैंतालीस हजार वाहनों का आवागमन संभालने के लिए तैयार किया गया था, परंतु वर्तमान हालात यह हैं कि इस रूट से प्रतिदिन करीब डेढ़ लाख वाहन गुजरते हैं। यदि छुट्टियों या सप्ताहांत यानी वीकेंड की बात करें तो इस मार्ग पर तीन लाख से भी ज्यादा गाड़ियां एक साथ सड़क पर उतर आती हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का यह दावा रहा है कि इतना भारी ट्रैफिक झेलने के बावजूद इस पूरी सड़क पर एक भी गड्ढा देखने को नहीं मिलता है। इस परियोजना को पूरा करने के वक्त करीब 1,630 करोड़ रुपये की लागत आई थी, जिसका निर्माण महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा कराया गया था।

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टोल दरें और गति सीमा के कड़े नियम

इस व्यस्त एक्सप्रेसवे पर कुल दो मुख्य टोल प्लाजा स्थापित किए गए हैं और सड़क के दोनों किनारों पर तीन-तीन लेन बनाई गई हैं। इस रास्ते के माध्यम से दोनों प्रमुख महानगरों के बीच की दूरी तय करने में केवल दो घंटे का समय लगता है। इस पर सफर करने वाली कारों के लिए 250 रुपये का टोल शुल्क देना पड़ता है, जबकि मल्टी एक्सेल ट्रेलर्स के लिए यही टोल दर बढ़कर 1,750 रुपये हो जाती है। इस मार्ग पर कारों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है, जो कि पहाड़ी या घाट वाले हिस्सों में घटकर 60 किलोमीटर प्रति घंटा रह जाती है। इसी प्रकार भारी वाहनों के लिए सामान्य क्षेत्र में स्पीड लिमिट 80 किलोमीटर प्रति घंटा है, जिसे घाट सेक्शन में घटाकर 40 किलोमीटर प्रति घंटा कर दिया जाता है.

देश का सबसे महंगा और भारी कमाई वाला टोल मार्ग

यदि टोल संग्रहण के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो यह भारत का सबसे महंगा एक्सप्रेसवे साबित होता है, जहां यात्रा करने पर प्रति किलोमीटर 3.80 रुपये की दर से शुल्क वसूला जाता है। इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि इस ई-वे से प्रतिदिन लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये का टोल राजस्व प्राप्त होता है, जबकि पूरे महीने का कुल टोल कलेक्शन 167 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच जाता है। परिणामस्वरूप आज इस मार्ग से सालाना दो हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का टोल वसूला जाता है, जिसका मतलब यह है कि इस सड़क को बनाने में जितना कुल खर्च आया था, उससे कहीं अधिक राशि हर वर्ष केवल टोल के रूप में वसूल ली जाती है।

आगामी विस्तार योजनाएं और निर्माण की चुनौतियां

मुंबई-पुणे ई-वे पर बढ़ते हुए ट्रैफिक के दबाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से इसे वर्ष 2030 तक दस लेन का बनाने की मुकम्मल तैयारी चल रही है। महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने इस मार्ग को चौड़ा करने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है और इसका निर्माण कार्य भी धरातल पर शुरू कर दिया गया है। इस योजना के तहत एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ दो-दो नई लेन और जोड़ी जाएंगी। निर्माण एजेंसी का यह भी कहना है कि इस चौड़ीकरण परियोजना के दौरान सबसे बड़ी बाधा काम चलते वक्त रास्ते को सुचारू रूप से खुला रखना है, क्योंकि यह देश की अत्यंत व्यस्त सड़कों में शुमार है और इस पर ट्रैफिक पूरी तरह रोककर काम करना कतई संभव नहीं है। ऊपर से ऊंचे पुल, अंडरपास और बरसात के मौसम में पहाड़ों से चट्टानों के खिसकने की घटनाएं इस सफर को और अधिक जोखिम भरा बना देती हैं।

घाट क्षेत्र की आधुनिक सुरंगें और सफर की आसानी

इस हाई-स्पीड मार्ग पर यातायात को सुगम बनाने के लिए लगभग चार आधुनिक सुरंगों का निर्माण किया गया है, जिनकी कुल लंबाई छह किलोमीटर के दायरे में आती है। ये सभी टनल पश्चिमी घाट के दुर्गम इलाकों में बनाई गई हैं, जिनमें सबसे प्रमुख और बड़ी सुरंग भाटन टनल है। इसके अतिरिक्त कामशेट टनल, मादप टनल और अदोशी टनल भी इसी श्रृंखला का हिस्सा हैं। पश्चिमी घाट की इन गुफाओं नुमा सुरंगों के माध्यम से इस मोटर मार्ग पर सफर करना बेहद आसान हो जाता है, क्योंकि सामान्य तौर पर पहाड़ी रास्तों से गुजरना चालकों के लिए काफी खतरनाक साबित होता है, लेकिन इन सुरक्षित सुरंगों के बन जाने के बाद से यह कठिन सफर भी काफी सहज हो गया है।

मिसिंग लिंक परियोजना और समय की भारी बचत

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर लगातार बढ़ रहे यातायात के दबाव को कम करने के लिए एक और नया मिसिंग लिंक तैयार किया गया है। इस नए रास्ते को मई, 2026 में शुरू किया गया है। लगभग 13.3 किलोमीटर लंबे इस बाईपास का निर्माण मुख्य तौर पर खंडाला घाट खंड पर भारी वाहनों के ट्रैफिक को विभाजित कर उसे सुगम बनाने के लिए किया गया है। इस विशेष खंड पर दो बड़ी सुरंगों का निर्माण हुआ है, जिसमें से छोटी टनल की लंबाई 1.6 किलोमीटर है जबकि बड़ी वाली टनल 8.9 किलोमीटर लंबी बनाई गई है। यह विशाल टनल लोनावला झील के ठीक नीचे से होकर गुजरती है, जिससे मुंबई और पुणे के बीच की दूरी लगभग छह किलोमीटर कम हो जाएगी और यात्रियों के कीमती समय में से 25 मिनट की सीधी बचत होगी।

सवाल-जवाब

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई कितनी है?
इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 94.6 किलोमीटर है जो कालमबोली से किवाले तक फैली है।
इस एक्सप्रेसवे को कब शुरू किया गया था?
इस मार्ग को वर्ष 2002 में यातायात के लिए खोला गया था।
रोजाना इस रास्ते से कितने वाहन गुजरते हैं?
इस रास्ते पर रोजाना करीब 1.5 लाख वाहन गुजरते हैं, जबकि वीकेंड पर यह आंकड़ा 3 लाख से ऊपर चला जाता है।
इस एक्सप्रेसवे पर कारों के लिए कितना टोल लगता है?
इस पर कारों के लिए 250 रुपये का टोल शुल्क वसूला जाता है।
इस मार्ग को कितने लेन का बनाने की तैयारी है?
बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए इस एक्सप्रेसवे को वर्ष 2030 तक 10 लेन का बनाने की तैयारी चल रही है।
मिसिंग लिंक परियोजना से कितनी दूरी कम होगी?
मिसिंग लिंक के शुरू होने से मुंबई और पुणे के बीच की दूरी लगभग 6 किलोमीटर कम हो जाएगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·38 दिन पहले

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर वाहनों का यह भारी दबाव सिर्फ परिवहन की समस्या नहीं है, बल्कि यह खेल आयोजनों और एथलीटों के लॉजिस्टिक्स को भी सीधे तौर पर प्रभावित करता है। इस मार्ग पर लगने वाला दो घंटे तक का जाम और वीकेंड पर तीन लाख से अधिक गाड़ियों का उमड़ना इस बात का संकेत है कि भविष्य में दस लेन का विस्तार और सख्त गति नियम केवल सड़क सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि महानगरों के बीच सुचारू खेल गतिविधियों और यात्रा प्रबंधन के लिए भी अत्यंत आवश्यक होंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·38 दिन पहले

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का सालाना दो हजार करोड़ रुपये का टोल राजस्व यह साबित करता है कि उन्नत बुनियादी ढांचा यदि वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर हो, तो वह निवेश पर भारी रिटर्न दे सकता है। प्रतिदिन डेढ़ लाख वाहनों का दबाव और क्षमता विस्तार की योजनाएं यह संकेत देती हैं कि भारत के आर्थिक गलियारों में लॉजिस्टिक्स और मोबिलिटी पर तुरंत बड़े पूंजीगत निवेश की आवश्यकता है, जिससे राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।

Neha Verma@neha-verma·38 दिन पहले

यह भारी ट्रैफिक और सप्ताहांत पर उमड़ने वाली तीन लाख गाड़ियों की भीड़ सीधे तौर पर आधुनिक लाइफस्टाइल, वीकेंड गेटअवे और बढ़ते शहरी पर्यटन को दर्शाती है। जब लोग काम के तनाव से दूर लोनावला-खंडाला जैसे हिल स्टेशनों की ओर भागते हैं, तब ऐसे सुगम और गड्ढा-मुक्त एक्सप्रेसवे यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाते हैं। हालांकि, क्षमता से अधिक दबाव के कारण लगने वाले दो-घंटे के जाम से बचने के लिए इसे दस लेन तक विस्तारित करना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि वीकेंड पर घूमने जाने वालों का समय और ऊर्जा बचे।

Rohan Verma@rohan-verma·38 दिन पहले

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का यह मॉडल उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क के लिए एक बड़ा सबक है। जब क्षमता से तीन गुना अधिक यानी रोजाना डेढ़ लाख वाहन चलने के बावजूद सड़क गड्ढा-मुक्त रहती है, तो यह मजबूत इंजीनियरिंग और उच्च रखरखाव प्रबंधन को दर्शाता है। भारी ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए छह लेन से दस लेन का विस्तार और सालाना दो हजार करोड़ रुपये का टोल राजस्व यह साबित करता है कि बुनियादी ढांचे पर बेहतरीन निवेश से दीर्घकालिक आर्थिक और प्रशासनिक लाभ मिल सकते हैं, बशर्ते समय पर नीतिगत विस्तार और सख्त निगरानी की जाए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·38 दिन पहले

इस एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों की आवाजाही और भारी टोल राजस्व से जुड़े वित्तीय आंकड़े सड़क सुरक्षा और प्रवर्तन एजेंसियों के लिए नए सवाल खड़े करते हैं। प्रतिदिन डेढ़ लाख से अधिक वाहनों का दबाव और सप्ताहांत पर तीन लाख तक पहुंचना सिर्फ़ इंजीनियरिंग की चुनौती नहीं, बल्कि यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था की भी परीक्षा है। दस लेन के प्रस्तावित विस्तार के दौरान ओवरस्पीडिंग, लेन अनुशासनहीनता और दुर्घटनाओं पर लगाम कसने के लिए एआई-आधारित कैमरों और सख्त निगरानी तंत्र को पहले से मजबूत करना होगा, अन्यथा राजस्व वृद्धि के साथ अपराध और सड़क सुरक्षा के जोखिम भी बढ़ सकते हैं।

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