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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बने गानों की पहचान के लिए यूट्यूब म्यूजिक लाया नया लेबलिंग सिस्टमऐप्स
19 अक्तू॰ 2026, 4:53 am (24 मिनट पहले)· 0

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बने गानों की पहचान के लिए यूट्यूब म्यूजिक लाया नया लेबलिंग सिस्टम

यूट्यूब म्यूजिक ने गानों में जेनेरेटिव एआई के इस्तेमाल को दर्शाने के लिए नया लेबलिंग सिस्टम शुरू किया है, जिससे श्रोताओं को कंपोजिशन और वोकल्स में तकनीक की भूमिका का तुरंत पता चल सकेगा।

डिजिटल म्यूजिक स्ट्रीमिंग की दुनिया में जेनेरेटिव तकनीक की बढ़ती मौजूदगी के बीच यूट्यूब म्यूजिक ने गानों की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। प्लेटफॉर्म ने बुधवार को एक नया लेबलिंग सिस्टम पेश किया, जिसकी मदद से श्रोता आसानी से यह जान पाएंगे कि कौन सा गाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार हुआ है। यह व्यवस्था गानों की धुन, वोकल्स और कंपोजिशन में इस्तेमाल की गई तकनीक को पारदर्शी तरीके से सामने रखेगी।

नया टैग सीधे म्यूजिक प्लेयर स्क्रीन पर नजर आएगा। जब कोई श्रोता इस लेबल पर टैप करेगा, तो उसे इस बात का विस्तृत ब्योरा मिलेगा कि उस खास ट्रैक के निर्माण में जेनेरेटिव एआई का कितना और किस तरह का इस्तेमाल हुआ है। यह सुविधा केवल ऑडियो सर्विस तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मुख्य यूट्यूब ऐप पर भी गानों के साथ इन लेबल्स को दिखाया जाएगा।

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साझेदारों के लिए तीन अलग श्रेणियां तय

प्लेटफॉर्म ने संगीत उद्योग के विभिन्न साझेदारों के सहयोग और अपने आंतरिक पहचान टूल्स की मदद से एआई ट्रैक की जांच शुरू की है। सहायता पृष्ठ के मुताबिक, क्रिएटर्स और पार्टनर्स अपने कंटेंट को तीन प्रमुख श्रेणियों में घोषित कर सकते हैं: फुली जेन एआई, पार्टली जेन एआई और नो जेन एआई।

फुली जेन एआई का ठप्पा उन गानों पर लगेगा जिन्हें पूरी तरह कंप्यूटर आधारित एल्गोरिदम से तैयार किया गया है। पार्टली जेन एआई उन ट्रैक्स के लिए है जहां कलाकारों ने आधुनिक डिजिटल उपकरणों के साथ अपनी सजीव आवाज या वाद्य यंत्रों का मेल किया है। वहीं सामान्य पिच सुधार वाले टूल्स जैसे ऑटो-ट्यून से एडिट किए गए गाने नो जेन एआई श्रेणी में रहेंगे और उन पर कोई भ्रामक चेतावनी नहीं होगी।

अन्य स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स का सख्त रुख

स्ट्रीमिंग जगत में यह बदलाव ऐसे समय आया है जब प्रतिस्पर्धी सेवाएं भी अपने स्तर पर नीतियां लागू कर रही हैं। एप्पल म्यूजिक इसी वर्ष अपने ट्रांसपेरेंसी प्रोग्राम के तहत 'मेड विद एआई' टैग लाने की तैयारी में है, जबकि स्पॉटिफाई ने ऐसे ट्रैक्स के लिए चेतावनी और स्पैम फिल्टर की व्यवस्था की है।

डिजिटल ऑडियो सर्विस डीजर ने इस मामले में काफी कड़ा रुख अपनाया है। कंपनी ने जुलाई में दर्ज किया था कि उसे रोजाना लगभग 90,000 ऐसे ट्रैक मिल रहे थे जो पूरी तरह एआई निर्मित थे। इसके जवाब में प्लेटफॉर्म ने ऐसे गानों को एल्गोरिदम आधारित सिफारिशों और संपादकीय सूचियों से बाहर कर दिया है और संदिग्ध कंटेंट की कमाई भी रोकी है। साथ ही यूजर्स को ऐसे संगीत को पूरी तरह ब्लॉक करने की सुविधा भी दी जा रही है। टाइडल ने भी पूरी तरह मशीनी संगीत को रॉयल्टी भुगतान से अलग करते हुए श्रोताओं को उसे म्यूट करने का विकल्प दिया है।

यूट्यूब की अलग रणनीति

सख्त पाबंदियां लगाने के बजाय यूट्यूब ने पारदर्शिता और जानकारी साझा करने पर जोर दिया है। इस प्लेटफॉर्म पर किसी गाने में एआई का उपयोग होने मात्र से उसकी कमाई का अधिकार नहीं छिनता। कंपनी खुद भी संगीत निर्माण में इस तकनीक के प्रयोगों को बढ़ावा दे रही है, जिसका उदाहरण उसका ड्रीम ट्रैक टूल है। यह चुनिंदा क्रिएटर्स को पार्टनर कलाकारों की डिजिटल आवाज का उपयोग करके नए साउंडट्रैक बनाने का अवसर प्रदान करता है।

सवाल-जवाब

यूट्यूब म्यूजिक पर नया लेबल क्या दिखाएगा?
यह लेबल बताएगा कि किसी गाने के निर्माण, वोकल्स या धुन में जेनेरेटिव एआई का उपयोग हुआ है या नहीं।
क्या यह लेबल मुख्य यूट्यूब ऐप पर भी दिखेगा?
हाँ, यह लेबलिंग सिस्टम यूट्यूब म्यूजिक प्लेयर के साथ-साथ मुख्य यूट्यूब वीडियो ऐप पर भी लागू होगा।
पार्टनर्स के लिए घोषित तीन श्रेणियां कौन सी हैं?
ये तीन श्रेणियां फुली जेन एआई, पार्टली जेन एआई और नो जेन एआई हैं।
क्या ऑटो-ट्यून वाले गानों पर एआई का लेबल लगेगा?
नहीं, ऑटो-ट्यून जैसे पिच करेक्शन टूल्स वाले गानों को नो जेन एआई श्रेणी में रखा गया है।
क्या यूट्यूब पर एआई गानों से कमाई बंद हो जाएगी?
नहीं, यूट्यूब केवल जानकारी देने के लिए लेबल लगा रहा है और एआई गानों के मुद्रीकरण पर प्रतिबंध नहीं लगा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Ravikash Gupta@ravikash·6 मिनट पहले

अब असली और एआई वाले गाने में फर्क करना आसान हो जाएगा, पर क्या इससे कलाकारों की कमाई पर सच में कोई असर पड़ेगा?

Rohan Gupta@rohan-gupta·5 मिनट पहले

रविकेश भाई, लेबल लगाने से फर्क तो दिखेगा, पर कमाई पर असर तभी होगा जब लोग खुद ऐसे गाने सुनना बंद करेंगे।

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