मानसून सीजन के दौरान नदियों में जल प्रवाह में आई कमी से चिंतित तेलंगाना सरकार ने दिव्य कृपा पाने के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान का सहारा लिया है। सोमवार को राज्य प्रशासन द्वारा नलगोंडा जिले में कृष्णा नदी के तट पर बने प्रसिद्ध नागार्जुन सागर बांध पर भव्य ‘वरुण यज्ञ’ का शुभारंभ किया गया। इस विशेष प्रार्थना सभा का मुख्य उद्देश्य राज्यभर में अच्छी वर्षा होना, कृषि फसलों को बचाना और प्रमुख जलाशयों के जलस्तर में सुधार लाना है। यदागिरिगुट्टा स्थित प्रसिद्ध श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर के वैदिक विद्वानों और पुजारियों द्वारा इस धार्मिक कार्य का संचालन किया जा रहा है।
108 ऋत्विक और 11 होम कुंडों के साथ अनुष्ठान
वरुण यज्ञ की रूपरेखा पूरी तरह वैदिक परंपराओं के अनुसार तैयार की गई है। इस धार्मिक अनुष्ठान में कुल 108 ‘ऋत्विक’ और विशेषज्ञ वैदिक विद्वान शामिल हुए हैं, जो मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना संपन्न करा रहे हैं। स्थल पर 11 'होम कुंड' स्थापित किए गए हैं, जहां लगातार आहुतियां दी जा रही हैं। सोमवार की सुबह सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने अपनी पत्नी के साथ नागार्जुन सागर बांध के किनारे पहुंचकर यज्ञ की औपचारिक शुरुआत की और विशेष पूजन में भाग लिया।
इस वृहद अनुष्ठान के अंतिम चरण यानी 'पूर्णाहुति' (समापन अनुष्ठान) समारोह में मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी स्वयं उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा, राज्य मंत्रिमंडल की सदस्य कोंडा सुरेखा और कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी सहित कई वरिष्ठ मंत्री, सांसद, एमएलसी और विधायक भी अनुष्ठान स्थल पर उपस्थित होकर आहुतियां देंगे। यज्ञ का शुभ मुहूर्त और समय यदागिरिगुट्टा मंदिर के मुख्य पुजारियों द्वारा तय किया गया था।
अल नीनो के प्रभाव और अच्छी फसल के लिए प्रार्थना
सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने इस आयोजन के उद्देश्यों पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि राज्य और पूरे देश की सुख-समृद्धि, अच्छी मानसूनी बारिश तथा किसानों के लिए भरपूर फसल की कामना के साथ यह निर्णय लिया गया है। सरकार की प्राथमिकता कृष्णा और गोदावरी नदियों में पानी का प्रवाह फिर से तेज करना है, ताकि नागार्जुन सागर जलाशय सहित राज्य भर की सभी छोटी-बड़ी जल परियोजनाएं और तालाब पूरी तरह से भर सकें।
प्रशासन का एक बड़ा उद्देश्य राज्य को 'अल नीनो' के प्रतिकूल मौसमी प्रभाव से सुरक्षा दिलाना भी है। यद्यपि जुलाई के उत्तरार्ध और मौजूदा महीने की शुरुआती अवधि में हुई वर्षा की मदद से दक्षिण-पश्चिम मानसून की कुल बारिश में कमी घटकर 5 प्रतिशत तक आ गई है, लेकिन इसके बावजूद कृष्णा और गोदावरी नदी बेसिन के मुख्य जलाशयों में पानी की अपेक्षित आवक अब तक दर्ज नहीं हो सकी है।
नागार्जुन सागर बांध के जलस्तर की चिंताजनक स्थिति
सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य की जल सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नागार्जुन सागर बांध का मौजूदा जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है। वर्तमान समय में इस प्रमुख जलाशय में केवल 145.65 टीएमसी पानी ही उपलब्ध है, जबकि इसकी कुल जल संग्रहण क्षमता 312.045 टीएमसी है। बांध का मौजूदा जलस्तर 518 फीट के करीब दर्ज किया गया है, जो कि इसके अधिकतम 590 फीट के जलस्तर की तुलना में काफी कम है।
तुलनात्मक आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान स्थिति बहुत अधिक अनुकूल थी। पिछले साल 9 अगस्त को नागार्जुन सागर में जल का कुल भंडार 310.25 टीएमसी दर्ज किया गया था और जलाशय का जलस्तर अपने अधिकतम स्तर के बेहद करीब यानी 589.40 फीट तक पहुंच गया था। इसी कमी को दूर करने और नदियों के कैचमेंट क्षेत्रों में भारी बारिश की आस में राज्य सरकार ने इस पारंपरिक पूजा-विधान का रास्ता अपनाया है।



















