धौलपुर में बुधवार सुबह चंबल नदी के किनारे उस समय चीख-पुकार मच गई जब धार्मिक अनुष्ठान कर रहे एक पटवारी का संतुलन अचानक बिगड़ गया और वह तेज धारा में समा गए. मोहनलाल गुप्ता अपने पुत्र चित्रांश गुप्ता के साथ पितरों को तर्पण देने के उद्देश्य से नदी तट पर गए हुए थे. अनुष्ठान संपन्न करने के दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया, जिससे वह संभल नहीं पाए और सीधे गहरे पानी में जा गिरे. देखते ही देखते वह नदी की लहरों में ओझल हो गए, जिससे घाट पर मौजूद अन्य श्रद्धालुओं और परिजनों में भारी अफरा-तफरी फैल गई.
घाट पर अचानक बिगड़ा संतुलन और पानी में समाए
नदी तट पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पिता और पुत्र दोनों किनारे पर खड़े होकर पूरी निष्ठा के साथ धार्मिक विधि-विधान पूरा कर रहे थे. इसी दौरान मोहनलाल गुप्ता का पैर फिसला और वह अपना नियंत्रण पूरी तरह खो बैठे. नदी के तेज बहाव और गहराई की वजह से वह संभल नहीं सके और पलक झपकते ही पानी के अंदर लापता हो गए. मौके पर खड़े लोगों ने तुरंत बचाव के लिए शोर मचाया और स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस को इस अनहोनी की जानकारी दी.
गोताखोरों की मदद से सघन खोज अभियान
हादसे की सूचना पाते ही पुलिस प्रशासन की टीम दल-बल के साथ मौके पर पहुंच गई. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फौरन विशेषज्ञ गोताखोरों को बुलाया गया और नदी के भीतर संभावित जगहों पर तलाशी अभियान शुरू किया गया. चंबल नदी के तेज बहाव और अत्यधिक गहराई के चलते गोताखोरों को बचाव कार्य में लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. पुलिस अधिकारियों की सीधी देखरेख में जल क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में मोहनलाल गुप्ता की तलाश जारी रखी गई है.
परिजनों में कोहराम, सेवानिवृत्ति में बचा था एक साल
जैसे ही मोहनलाल गुप्ता के नदी में समा जाने की खबर उनके घर तक पहुंची, परिवार में मातम छा गया. बदहवास परिजन तुरंत चंबल घाट पहुंचे, जहां उनका रो-रोकर बुरा हाल है. परिजन नम आंखों से नदी किनारे बैठकर गोताखोरों के हर कदम को देख रहे हैं और उनके सकुशल मिलने की आस लगाए हुए हैं. मोहनलाल गुप्ता धौलपुर शहर के घंटाघर इलाके के निवासी हैं और राजस्व विभाग में पटवारी पद पर कार्यरत हैं. उनकी शासकीय सेवा के कार्यकाल में अब केवल करीब एक साल का समय ही शेष रह गया था. प्रशासन की टीमें लगातार पानी में उनकी खोजबीन करने में जुटी हुई हैं.



















