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नागालैंड विधानसभा के बाहर अनिवार्य वंदे मातरम के खिलाफ एनएसएफ का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारीनागालैंड
3 सित॰ 2026, 6:40 pm (28 दिन पहले)· 4

नागालैंड विधानसभा के बाहर अनिवार्य वंदे मातरम के खिलाफ एनएसएफ का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी

नागालैंड विधानसभा के बाहर राष्ट्रगीत के अनिवार्य गायन के विरोध में छात्रों का आंदोलन जारी है, जबकि सरकार ने इसे वापस लेने का अनुरोध किया है।

कोहिमा स्थित नागालैंड विधानसभा परिसर के बाहर नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन (NSF) द्वारा राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के अनिवार्य गायन के खिलाफ शुरू किया गया विरोध प्रदर्शन गुरुवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। इस बीच राज्य सरकार ने छात्र संगठन से अपने आंदोलन को समाप्त करने का औपचारिक अनुरोध किया है। प्रदर्शनकारी छात्रों की अडिग मौजूदगी के कारण इस संवेदनशील मामले की गूंज विधानसभा के अंदर सदन की कार्यवाही के दौरान भी स्पष्ट रूप से सुनाई दी। राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों, विभिन्न राजनीतिक दलों, जनजातीय निकायों और धार्मिक संस्थाओं के बीच इस मुद्दे को लेकर गहन विचार-विमर्श चल रहा है।

विधानसभा के शून्यकाल में उठा विवादित मुद्दा

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान शून्यकाल में नागालैंड पीपुल्स फ्रंट (NPF) के विधायक अचुम्बेमो किकोन ने इस विषय को प्रमुखता से उठाया। नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके किकोन ने सदन में बोलते हुए स्पष्ट किया कि यह मामला किसी एक विशेष क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर पूरे नागालैंड राज्य पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार की तरफ से और अपने पूर्व छात्र नेतृत्व के अनुभव का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों से आंदोलन समाप्त करने का आग्रह किया। किकोन ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक और जनजातीय पृष्ठभूमि के जनप्रतिनिधियों, चर्च निकायों, नागरिक समाज समूहों, जनजातीय संगठनों तथा एनएसएफ द्वारा व्यक्त की गई सभी चिंताओं को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे इस विषय पर उचित संवैधानिक और विधायी मंचों के जरिए समाधान निकालने का अवसर दें।

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केंद्रीय निर्देश और अनुच्छेद 371A के तहत जांच

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 28 जनवरी को जारी एक निर्देश से जुड़ी हुई है। उस आदेश में राष्ट्रीय महत्व के समारोहों के दौरान अतिविशिष्ट अतिथियों (VVIPs) के आगमन पर 'वंदे मातरम' का गायन अनिवार्य किया गया था, जिसमें राज्य विधानसभा में राज्यपाल का आगमन भी शामिल है। इस निर्देश के बाद पैदा हुई स्थानीय आशंकाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने संसदीय कार्य मंत्री केजी केनये की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया था। इस समिति को यह अध्ययन करने का काम सौंपा गया था कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371A के तहत नागालैंड को प्राप्त विशेष अधिकारों के आलोक में संसद द्वारा बनाए गए कानूनों और निर्देशों की क्या स्थिति रहेगी।

संसदीय संशोधन कानून से बदला कानूनी स्वरूप

संसदीय कार्य मंत्री केजी केनये ने सदन को समिति की प्रगति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समिति की दो महत्वपूर्ण बैठकें मई और जून के महीनों में आयोजित की जा चुकी थीं और समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार थी। हालांकि, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद पूरे मामले का कानूनी आधार बदल गया। केनये ने इस विषय को बेहद संवेदनशील और विवादित करार देते हुए समझाया कि पहले यह केवल एक प्रशासनिक निर्देश के रूप में लागू था, लेकिन संसद द्वारा पारित होने के बाद इसने एक औपचारिक कानून का रूप ले लिया है। मंत्री ने कहा कि समिति अब भारत के राजपत्र में इस कानून के आधिकारिक प्रकाशन की प्रतीक्षा कर रही है, जिसके बाद नए प्रावधानों की समीक्षा कर अंतिम रिपोर्ट विधानसभा को सौंपी जाएगी।

शांतिपूर्ण विरोध, प्रार्थना गीत और राजनीतिक समर्थन

दूसरी ओर, विधानसभा भवन के बाहर छात्र प्रतिनिधियों का प्रदर्शन बिना रुके जारी रहा। अपने शांतिपूर्ण विरोध के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों ने कई पारंपरिक ईसाई प्रार्थना गीत गाए, जिनमें "व्हेन द रोल इज कॉल्ड अप यॉन्डर", "ऑनवर्ड, क्रिश्चियन सोल्जर्स" और "आई हैव डिसाइडेड टू फॉलो जीसस" प्रमुख रूप से शामिल थे। एनएसएफ के अधिकारियों ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक नागालैंड विधानसभा 'वंदे मातरम' के अनिवार्य गायन के खिलाफ औपचारिक प्रस्ताव स्वीकार नहीं कर लेती, तब तक उनका यह लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान नागालैंड के एकमात्र लोकसभा सांसद एस सुपोंगमेरेन जामीर ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की। जामीर ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया और आश्वासन दिया कि वह इस मुद्दे को नई दिल्ली में केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाएंगे।

सवाल-जवाब

नागालैंड विधानसभा के बाहर छात्र क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?
नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन के छात्र सरकारी कार्यक्रमों और विधानसभा में 'वंदे मातरम' के अनिवार्य गायन का विरोध कर रहे हैं।
प्रदर्शन पर नागालैंड सरकार का क्या रुख है?
राज्य सरकार ने छात्र संगठन से आंदोलन वापस लेने की अपील की है, जबकि एक विशेष समिति इस कानून की कानूनी समीक्षा कर रही है।
इस मामले की समीक्षा कौन सी समिति कर रही है?
संसदीय कार्य मंत्री केजी केनये की अध्यक्षता वाली एक विशेष समिति अनुच्छेद 371A के आलोक में इस नियम की कानूनी वैधता जांच रही है।
'वंदे मातरम' से जुड़े इस नियम की कानूनी स्थिति में क्या बदलाव हुआ है?
गृह मंत्रालय का पिछला प्रशासनिक निर्देश अब संसद द्वारा पारित राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत कानून बन गया है।
प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांग क्या है?
छात्रों का कहना है कि जब तक नागालैंड विधानसभा अनिवार्य गायन के खिलाफ प्रस्ताव पारित नहीं करती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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