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नकली जेवर गिरवी रखकर बैंक से उड़ाए 1.46 करोड़ रुपये, कविनगर थाने में 18 लोगों पर केस दर्जउत्तर प्रदेश
23 सित॰ 2026, 12:33 pm (36 दिन पहले)· 1

नकली जेवर गिरवी रखकर बैंक से उड़ाए 1.46 करोड़ रुपये, कविनगर थाने में 18 लोगों पर केस दर्ज

गाजियाबाद के आरडीसी स्थित फेडरल बैंक शाखा में फर्जी सोने के आभूषणों के बदले लगभग 1.46 करोड़ रुपये का कर्ज बांटने का मामला सामने आया है। बैंक प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने फिनटेक कंपनी के प्रतिनिधि और वैल्यूअर समेत 18 नामजद आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में स्थित एक निजी बैंक की शाखा को नकली आभूषणों के सहारे करोड़ों रुपये का चूना लगाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर यानी आरडीसी स्थित फेडरल बैंक शाखा में कथित तौर पर फर्जी सोने के गहने गिरवी रखकर करीब 1.46 करोड़ रुपये का ऋण जारी करा लिया गया। आंतरिक पड़ताल में जब बैंक के लॉकर में रखे जेवरातों की दोबारा जांच कराई गई, तो अधिकांश खातों में जमा आभूषण नकली पाए गए। इस बड़े फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक और शाखा प्रभारी शशिकांत वाणी ने कविनगर थाने में औपचारिक शिकायत दी, जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आपराधिक साजिश, जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराओं में 18 नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

फिनटेक कंपनी और वैल्यूअर के नेटवर्क से खुला 20 खातों का खेल

बैंक की शिकायत के अनुसार, कुल 20 अलग-अलग लोन खातों के माध्यम से इस पूरे गबन को अंजाम दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 17 खाते ऐसे थे, जिनका लोन प्रोसेस फिनटेक कंपनी के प्रतिनिधियों के जरिए पूरा कराया गया था। इसके अलावा, सभी बीस खातों में गिरवी रखे गए आभूषणों की शुद्धता का आकलन और मूल्यांकन करने का काम भी एक ही निर्धारित एजेंसी के जिम्मे था। जांच में सामने आया कि गिरवी रखे जाने वाले सोने की जांच करने वाले वैल्यूअर और फिनटेक कंपनी के कर्मचारियों के बीच मिलीभगत थी। आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी गहनों को असली साबित कराया और बैंक को भारी वित्तीय क्षति पहुंचाई।

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रैंडम चेकिंग के दौरान भनक लगते ही भागे आरोपी

इस बड़े घोटाले का खुलासा 10 जून 2026 को हुआ, जब आरोपी दीपांशु बंसल अपने एक अन्य साथी के साथ आरडीसी शाखा में आभूषण गिरवी रखकर नया गोल्ड लोन लेने पहुंचा था। प्रक्रिया के दौरान बैंक के सतर्क अधिकारियों ने जब रैंडम चेकिंग की, तो उन्हें पेश किए गए आभूषणों के असली होने पर गहरा संदेह हुआ। अधिकारियों ने तुरंत लोन की कार्यवाही रोकते हुए गहनों की बारीकी से जांच शुरू की, लेकिन भनक लगते ही दीपांशु बंसल और उसका साथी शाखा से भाग खड़े हुए। इस घटना के बाद बैंक प्रबंधन के कान खड़े हो गए और उन्होंने पहले से स्वीकृत सभी गोल्ड लोन खातों की व्यापक समीक्षा कराने का फैसला लिया।

ऑडिट में पकड़ी गई गड़बड़ी और दोहराया गया पैटर्न

प्रबंधन ने लॉकर में जमा आभूषणों का एक स्वतंत्र वैल्यूअर से विशेष ऑडिट कराया। जब सभी पुराने खातों के गहनों की दोबारा वैज्ञानिक व तकनीकी जांच हुई, तो कई खातों में जमा सोना पूरी तरह नकली निकला। दस्तावेजों के विश्लेषण से यह भी पता चला कि सभी 20 फर्जी लोन इसी वर्ष अप्रैल से जून के बीच महज तीन महीनों के भीतर मंजूर कराए गए थे। इतना ही नहीं, गिरोह के छह सदस्यों ने तो दो-दो बार नकली आभूषण बैंक में रखकर दोहरा लोन हासिल कर लिया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस नेटवर्क में बैंक का कोई आंतरिक कर्मचारी भी सीधे तौर पर शामिल था।

प्राथमिकी में इन 18 आरोपियों को किया गया नामजद

कविनगर पुलिस ने बैंक शाखा प्रबंधक की तहरीर पर जिन 18 लोगों को आरोपी बनाया है, उनमें गाजियाबाद, दिल्ली और आसपास के इलाकों के लोग शामिल हैं। नामजद आरोपियों की सूची में दिल्ली गेट गाजियाबाद निवासी दीपांशु बंसल, कंबल वाली गली गाजियाबाद निवासी मयूर बंसल, पीलीभीत निवासी शहजाद खान, विजयनगर सेक्टर नौ निवासी सिद्धार्थ पांडे, प्रताप विहार निवासी अलीबिन हुसैन, मवाई विजयनगर निवासी विकास कुमार, शांतिनगर विजयनगर निवासी कविता, प्रताप विहार निवासी वसीम अब्बास, विजयनगर निवासी अश्वनी, ओल्ड विजयनगर निवासी मुकुल कुमार, शिवपुरी विजयनगर निवासी साहिल सिंह, दयालपुरी नई दिल्ली निवासी अंकुर राजपूत, सोनिया विहार ईस्ट दिल्ली निवासी धर्मवीर राम, शिवपुरी गाजियाबाद निवासी मौसीन खान, अजनारा होम्स ग्रेटर नोएडा निवासी कैफ नौमान, रुपीक फिनटेक कंपनी के रीजनल मैनेजर हर्ष, शास्त्रीनगर ईस्ट दिल्ली निवासी दीपक डल्ला और माता कॉलोनी गाजियाबाद निवासी अनुराग शामिल हैं। पुलिस की टीमें अब सभी आरोपियों की धरपकड़ और ठगी की रकम की बरामदगी के लिए दबिश दे रही हैं।

सवाल-जवाब

गाजियाबाद में किस बैंक की शाखा में यह फर्जीवाड़ा हुआ?
यह फर्जीवाड़ा गाजियाबाद के राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर (आरडीसी) स्थित फेडरल बैंक की शाखा में हुआ है।
नकली सोने के बदले कुल कितने रुपये का लोन लिया गया?
आरोपियों ने 20 अलग-अलग खातों के जरिए लगभग 1.46 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन हासिल किया।
इस घोटाले का खुलासा कैसे हुआ?
10 जून 2026 को रैंडम चेकिंग के दौरान नए आभूषणों पर संदेह होने पर आरोपी भाग निकले, जिसके बाद ऑडिट कराने पर पुराना घोटाला पकड़ा गया।
पुलिस ने कितने लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है?
कविनगर पुलिस ने बैंक शाखा प्रबंधक की शिकायत पर 18 नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
इस फर्जीवाड़े में किस फिनटेक कंपनी का नाम सामने आया है?
शिकायत में रुपीक फिनटेक कंपनी के रीजनल मैनेजर हर्ष और कंपनी के प्रतिनिधियों की भूमिका का उल्लेख किया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·34 दिन पहले

सिर्फ तीन महीनों में डेढ़ करोड़ का फर्जीवाड़ा, सोचकर हैरानी होती है कि ऐसे लोग कैसे सो पाते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·35 दिन पहले

अप्रैल से जून के बीच सिर्फ तीन महीने में इतने सारे फर्जी लोन पास हो गए और किसी को भनक तक नहीं लगी। बैंक के अंदरूनी सिस्टम पर सवाल उठना लाजिमी है।

Ravikash Gupta@ravikash·35 दिन पहले

अर्जुन भाई, बात सही है कि तीन महीने में सब हो गया, पर मुझे लगता है कि वैल्यूअर और फिनटेक वालों ने मिलकर इतना शातिर खेल खेला कि बैंक वालों को शक का मौका ही नहीं मिला।

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 दिन पहले

मुझे लगता है कि बैंक वाले भी पूरी तरह दूध के धुले नहीं हैं। सिर्फ बाहर वालों पर सारा ठीकरा फोड़ना ठीक नहीं, बिना अंदर के आदमी की मिलीभगत के इतना बड़ा खेल मुमकिन ही नहीं है।

Rohan Verma@rohan-verma·35 दिन पहले

करण, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। गाजियाबाद में अक्सर ऐसे मामलों में बैंक स्टाफ की मिलीभगत ही सामने आती है, वरना बिना अंदरूनी मदद के वैल्यूअर और फिनटेक कंपनी मिलकर इतना बड़ा खेल नहीं खेल सकते।

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