पंजाब के रूपनगर जिले में विश्व हिंदू परिषद के स्थानीय नेता विकास प्रभाकर की सनसनीखेज हत्या के मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण यानी एनआईए को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। इस हत्याकांड में लॉजिस्टिक सहायता और धन जुटाने के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हरविंदर कुमार उर्फ सोनू को संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई से प्रत्यर्पित कराकर भारत लाया गया। कूटनीतिक प्रयासों के सफल होने के बाद 1 अक्टूबर 2026 को जैसे ही वह नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, जांच एजेंसी की टीम ने उसे तुरंत अपनी हिरासत में ले लिया। इस महत्वपूर्ण गिरफ्तारी से सीमा पार रची गई साजिश की कड़ियां जोड़ने में मदद मिलेगी।
नांगल में दुकान के भीतर हुई थी विहिप नेता की हत्या
यह पूरा मामला 13 अप्रैल 2024 का है, जब रूपनगर जिले के नांगल कस्बे में स्थित अपनी दुकान पर बैठे विश्व हिंदू परिषद के नेता विकास प्रभाकर पर जानलेवा हमला किया गया था। हमलावरों ने दिनदहाड़े गोलीबारी कर उनकी हत्या कर दी थी और मौके से फरार हो गए थे। मामले की गंभीरता, लक्षित हत्या के पहलू और अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़े तारों को देखते हुए इस जांच को केंद्रीय एजेंसी को सौंप दिया गया। एनआईए ने 9 मई 2024 को औपचारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज कर मामले की तफ्तीश अपने हाथ में ली थी। गहन छानबीन के आधार पर एजेंसी इस हत्याकांड में अब तक तीन आरोप पत्र अदालत में पेश कर चुकी है।
जर्मनी से संचालित आतंकी संगठन बब्बर खालसा का हाथ
जांच एजेंसी की पड़ताल में सामने आया है कि इस हत्याकांड का ताना-बाना प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े विदेशी हैंडलरों ने तैयार किया था। जर्मनी में सक्रिय बीकेआई ऑपरेटिव हरजीत सिंह उर्फ लड्डी और कुलबीर सिंह उर्फ सिद्धू ने इस लक्षित हत्या की पूरी रूपरेखा बनाई थी। विदेश में बैठे इन दोनों मुख्य साजिशकर्ताओं के निर्देशों पर ही विभिन्न देशों में मौजूद नेटवर्क को सक्रिय किया गया था, ताकि पंजाब में अशांति और खौफ का माहौल बनाया जा सके।
यूएई में बैठकर हथियार और धन का प्रबंधन कर रहा था हरविंदर
गिरफ्तार आरोपी हरविंदर कुमार यूएई में रहकर जर्मनी के संचालकों के इशारे पर काम कर रहा था। हत्याकांड में उसने सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं पहुंचाई, बल्कि जमीन पर वारदात को अंजाम देने वालों के लिए एक प्रमुख रिक्रूटर और हैंडलर की जिम्मेदारी भी संभाली थी। उस पर आरोप है कि उसने हत्यारों तक अवैध हथियार पहुंचाने की पूरी व्यवस्था की और अपराध को अंजाम देने वाले शूटरों तक असलाह भिजवाया। इसके अलावा आतंकी फंड जुटाने, अवैध नकदी हासिल करने और फिर उसे विभिन्न माध्यमों से आगे भेजने में भी उसकी सीधी संलिप्तता पाई गई है।
अगस्त में भी पकड़ा गया था हथियारों का आपूर्तिकर्ता साथी
इस हत्याकांड से जुड़े विदेशी नेटवर्क पर एनआईए की यह दूसरी सीधी कार्रवाई है। इससे पहले 13 अगस्त 2026 को एजेंसी ने यूएई से जुड़े एक अन्य आरोपी मनवीर राम को पकड़ा था। मनवीर राम को अमृतसर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रोका गया था और वहीं से उसे गिरफ्तार किया गया। जांच में यह पुष्टि हुई थी कि वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियारों की आपूर्ति में मनवीर ने सीधी भूमिका निभाई थी। एजेंसी का कहना है कि विदेशों में शरण लेकर भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले अपराधियों को वापस लाकर न्याय के कटघरे में खड़ा करने की मुहिम जारी है और इस मामले में आगे की कानूनी छानबीन चल रही है।
















