भारत की स्वर कोकिला और 'स्वर साम्राज्ञी' के नाम से मशहूर लता मंगेशकर का संगीत की दुनिया में योगदान अतुलनीय रहा है। अपनी जादुई आवाज से दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली लता दीदी का प्रभाव केवल संगीत सभाओं और सिनेमा के पर्दों तक सीमित नहीं था। कला जगत के साथ-साथ उनका सामाजिक और राजनीतिक जीवन भी बेहद समृद्ध रहा। विशेष रूप से, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके संबंध बेहद आत्मीय, पारिवारिक और आदरपूर्ण रहे। दोनों के बीच एक अनूठा भाई-बहन जैसा रिश्ता पनपा, जो समय के साथ और भी गहरा होता चला गया। लता मंगेशकर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र, उन्हें भेजे गए उपहार और रक्षाबंधन पर भेजी जाने वाली राखियां इस बात का प्रमाण हैं कि उनके बीच का यह जुड़ाव किसी राजनीतिक औपचारिकता से कहीं परे था।
संगीत यात्रा और सांस्कृतिक प्रभाव का गौरवमयी इतिहास
लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में हुआ था। उन्होंने अपने गायन करियर की शुरुआत 1940 के दशक में बेहद कम उम्र में की थी। इसके बाद आने वाले कई दशकों तक उन्होंने भारतीय संगीत उद्योग पर एकछत्र राज किया। उन्होंने 36 से भी अधिक देसी और विदेशी भाषाओं में हजारों कालजयी और सदाबहार गीत गाए। उनकी सुरीली आवाज ने भारत की सीमा को लांघकर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में अपनी पहचान बनाई। उनके गाए गीतों को न केवल भारत में बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत दुनिया के कोने-कोने में बड़े चाव से सुना और सराहा जाता रहा है।
संगीत और कला के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व, अद्वितीय और अप्रतिम योगदान को रेखांकित करते हुए भारत सरकार ने साल 2001 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से अलंकृत किया था। लता दीदी के गीतों ने हर पीढ़ी के श्रोताओं को आकर्षित किया और उनकी आवाज भारतीय संस्कृति की एक अमिट पहचान बन गई। लेकिन संगीत के इस विशाल कैनवास से अलग उनका एक व्यक्तित्व ऐसा भी था, जो देश के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों और शीर्ष नेताओं के साथ उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।
राज्यसभा से पीएम उम्मीदवार के समर्थन तक का राजनीतिक सफर
यद्यपि लता मंगेशकर ने कभी खुद को एक पूर्णकालिक राजनेता के रूप में प्रस्तुत नहीं किया, फिर भी वे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संसदीय प्रणाली से जुड़ी रहीं। भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से लता मंगेशकर नवंबर 1999 में संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के लिए मनोनीत की गईं। वे नवंबर 1999 से लेकर वर्ष 2005 तक राज्यसभा की सम्माननीय सदस्य रहीं। इस दौरान उन्होंने संसद में देश की सांस्कृतिक विरासत और कला के उत्थान से जुड़े विषयों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
राजनीतिक परिदृश्य में लता मंगेशकर का सार्वजनिक रुख तब अधिक चर्चा में आया जब उन्होंने वर्ष 2013 में खुले तौर पर नरेंद्र मोदी का समर्थन किया। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उन्हें भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा था। वर्ष 2013 में पुणे में दीनानाथ मंगेशकर को समर्पित एक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल के भव्य उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस समारोह में नरेंद्र मोदी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। इस मंच से लता मंगेशकर ने सार्वजनिक रूप से अपने मनोभाव व्यक्त करते हुए कहा था कि वे ईश्वर से प्रार्थना करती हैं कि वे नरेंद्र भाई को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करते हुए देखें। यह वक्तव्य उस समय के राजनीतिक माहौल में बेहद महत्वपूर्ण माना गया था।
15वें प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण पर लिखा वह एतिहासिक खत
वर्ष 2014 के आम चुनावों में ऐतिहासिक जीत हासिल करने के बाद जब नरेंद्र मोदी ने भारत के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने की तैयारी की, तब उन्होंने लता मंगेशकर को इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए विशेष आमंत्रण भेजा था। हालांकि, उस समय स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और अस्वस्थता के कारण लता दीदी दिल्ली के इस भव्य समारोह में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने में असमर्थ थीं। अपनी इस विवशता और असमर्थता को व्यक्त करने के लिए उन्होंने नरेंद्र मोदी को अपने हाथों से लिखा एक बेहद भावुक पत्र भेजा।
इस हस्तलिखित पत्र में लता मंगेशकर ने लिखा था कि आदरणीय नरेंद्रभाई को सस्नेह नमस्कार। उन्होंने पत्र में स्पष्ट रूप से अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए लिखा कि निमंत्रण मिलने के बावजूद अपनी तबीयत ठीक न होने के कारण उन्हें 'न' कहते हुए बहुत दुख हो रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नरेंद्र मोदी उनकी इस मजबूरी को समझेंगे। पत्र में लता दीदी ने लिखा कि पूरे देश ने उनका जो भव्य स्वागत किया है, वह अवर्णनीय है और मातृभूमि की बागडोर जनता ने उनके जैसे महान व्यक्ति के पवित्र हाथों में सौंपी है। उन्होंने इस दिन को संपूर्ण राष्ट्र के लिए एक आनंदोत्सव करार दिया और इस शुभ अवसर पर भगवान गणेश की एक 'मंगल-मूर्ति' भेंट स्वरूप भेजी। उन्होंने पत्र के अंत में उनका बहुत-बहुत अभिनंदन भी किया।
ऐ मेरे वतन के लोगों की 51वीं वर्षगांठ और सम्मान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लता मंगेशकर के बीच सम्मान और आत्मीयता का यह प्रवाह दोनों तरफ से बराबर बना रहा। जनवरी 2014 में नरेंद्र मोदी ने लता मंगेशकर के गाये बेहद मशहूर और ऐतिहासिक राष्ट्रभक्ति गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगों' की 51वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष समारोह में लता दीदी को सम्मानित किया था। यह वही कालजयी गीत था जिसने 1962 के युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों के त्याग और बलिदान को अमर बना दिया था।
उस कार्यक्रम में बोलते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा था कि लता जी द्वारा गाए गए इस गीत ने 1962 के वीर शहीदों की शहादत और उनके महान बलिदान को हर भारतीय के दिल में हमेशा के लिए जिंदा रखा है। उन्होंने इस गीत को देश के प्रति एक महान 'सेवा' का प्रतीक बताया था। नरेंद्र मोदी ने इस बात का भी उल्लेख किया था कि लता दीदी की तरफ से मिला पत्र और उनका आशीर्वाद उनके जीवन के सबसे अनमोल और बड़े उपहारों में से एक है।
पारिवारिक आत्मीयता, फोन कॉल और मोदी@20 पुस्तक में संस्मरण
दोनों हस्तियों के बीच का रिश्ता केवल सार्वजनिक मंचों या औपचारिक पत्रों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से पारिवारिक स्नेह में तब्दील हो चुका था। लता मंगेशकर प्रधानमंत्री को स्नेहपूर्वक 'नरेंद्र भाई' कहकर संबोधित करती थीं। हर साल रक्षाबंधन के पावन पर्व पर वे पीएम मोदी के लिए अपने हाथों से राखी बनाकर या चुनकर भेजा करती थीं। जब भी पीएम मोदी का जन्मदिन आता या कोई विशेष अवसर होता, दोनों के बीच टेलीफोन पर बातचीत जरूर होती थी। वर्ष 2019 में जब प्रधानमंत्री मोदी एक महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पर रवाना हो रहे थे, तब उन्होंने यात्रा पर निकलने से ठीक पहले फोन करके लता मंगेशकर को उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं दी थीं।
उस भावुक फोन कॉल के दौरान लता मंगेशकर ने पीएम मोदी से कहा था कि आप खुद नहीं जानते कि आप देश के लिए क्या हैं और आपके आने के बाद से भारत की तस्वीर तेजी से बदलने लगी है, जिससे उन्हें अपार प्रसन्नता होती है। एक आत्मीय पारिवारिक सदस्य की भांति लता दीदी ने उनसे यह भी पूछ लिया था कि वे अपनी विदेश यात्रा से वापस कब लौटेंगे, जिस पर पीएम मोदी ने भी बेहद सहजता से उत्तर दिया था।
इसके अलावा, प्रसिद्ध पुस्तक 'मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी' में लता मंगेशकर द्वारा लिखी गई विशेष प्रस्तावना शामिल है। इसमें लता दीदी ने अपने और पीएम मोदी के रिश्तों तथा उनकी पहली मुलाकातों के संस्मरण साझा किए हैं। उन्होंने लिखा था कि उन्होंने नरेंद्र भाई को कभी एक पारंपरिक या पारंपरिक राजनेता के रूप में नहीं देखा, बल्कि वे एक सुदृढ़ इरादे और कार्य के प्रति समर्पित जननेता हैं। लता मंगेशकर ने उल्लेख किया था कि उनके साथ हुई बातचीत से उन्हें यह स्पष्ट अनुभव हुआ कि नरेंद्र मोदी को सत्ता का कोई व्यक्तिगत मोह नहीं है, बल्कि उनका लक्ष्य भारत के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना और विकास की कहानी को सार्थक बनाना है।
सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय मुद्दों पर अटूट समर्थन
अपनी जीवन यात्रा के अंतिम चरण में भी लता मंगेशकर ने देश की सांस्कृतिक चेतना और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण रखा। वे सक्रिय राजनीति में न होते हुए भी राष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर मुखर रहीं। जब अगस्त 2020 में अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण की आधारशिला रखी गई, तब लता दीदी ने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए विशेष संदेश साझा किया था। इसके अलावा, जब वर्ष 2021 में देश में जारी किसान आंदोलन के दौरान विदेशी गायिका रिहाना समेत कुछ अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने टिप्पणियां की थीं, तब लता मंगेशकर ने भारत की संप्रभुता और आंतिरक एकजुटता का समर्थन करते हुए कड़ा रुख अपनाया था और देश की एकता का संदेश दिया था।
अंततः 6 फरवरी 2022 को 92 वर्ष की आयु में लता मंगेशकर ने इस नश्वर संसार को अलविदा कह दिया। उनके निधन से पूरा देश और विश्व संगीत जगत शोक में डूब गया। यद्यपि वे शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सुरीली आवाज, उनके सदाबहार गीत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके आत्मीय संबंधों की स्मृतियां आज भी देशवासियों के दिलों में जीवंत हैं।

















