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नाथद्वारा में निकाय चुनाव से पहले भाजपा पार्षद के गायब होने पर हंगामा, प्रदर्शन के दौरान दिल का दौरा पड़ने से एक की मौतराजस्थान
17 सित॰ 2026, 7:34 am (8 दिन पहले)· 0

नाथद्वारा में निकाय चुनाव से पहले भाजपा पार्षद के गायब होने पर हंगामा, प्रदर्शन के दौरान दिल का दौरा पड़ने से एक की मौत

राजसमंद जिले के नाथद्वारा में निकाय अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले भाजपा पार्षद प्रदीप काबरा के लापता होने से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। उनके बेटे ने अपहरण की आशंका जताई है और उपखंड कार्यालय के बाहर भारी प्रदर्शन के बीच एक अन्य पार्षद के ससुर का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है।

राजस्थान के राजसमंद जिले के अंतर्गत आने वाले नाथद्वारा नगर पालिका क्षेत्र में निकाय चुनाव की सरगर्मी के बीच एक नाटकीय और तनावपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। वार्ड नंबर चार से भारतीय जनता पार्टी के पार्षद प्रदीप काबरा के अचानक लापता होने से सियासी हलकों में हड़कंप मच गया है। घटना के बाद से ही उनके परिवार और पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

बेटे ने लगाया अपहरण का गंभीर आरोप

लापता पार्षद के बेटे धर्मेंद्र काबरा ने अपने पिता के اغवा होने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि उनके पिता नाथद्वारा पालिका अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने के वास्ते जोधपुर से रवाना हुए थे, लेकिन रास्ते से ही उनका कोई अता-पता नहीं चल पाया। इस संबंध में परिवार की ओर से पुलिस अधीक्षक कार्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। धर्मेंद्र ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनके पिता को सुरक्षित सामने नहीं लाया गया, तो विरोध प्रदर्शन को और अधिक तेज किया जाएगा। मौके पर आत्मदाह की चेतावनी दिए जाने के बाद स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी।

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उपखंड कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

घटना की जानकारी मिलते ही नाथद्वारा उपखंड कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, पार्षद और उनके परिजन एकत्र हो गए। सभी लोग पार्षद को तुरंत वापस लाने की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे हैं। इस प्रदर्शन में नाथद्वारा के करीब पांच अन्य पार्षदों के परिवारजन भी शामिल हुए हैं। उनकी मांग है कि काबरा के साथ गए बाकी पार्षदों को भी तत्काल सुरक्षित वापस लाया जाए।

सांसद और विधायक ने की समझाइश की कोशिश

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ और नाथद्वारा विधायक मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को शांत कराने का प्रयास किया। उन्होंने परिजनों से लंबी बातचीत की और इस सिलसिले में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से फोन पर भी चर्चा की। इस दौरान नाथद्वारा विधायक ने अध्यक्ष पद के टिकट को लेकर बयान दिया कि यह टिकट उनकी पसंद से नहीं दिया गया था, जिससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

तनाव के बीच एक पार्षद के ससुर का निधन

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक अन्य पार्षद के परिवार से बेहद दुखद खबर सामने आई। वार्ड नंबर 15 की पार्षद हिना पुरोहित के ससुर की अचानक दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। परिजनों का दावा है कि वह भी इस राजनीतिक घटनाक्रम और तनाव के कारण काफी परेशान थे। इस आकस्मिक निधन के बाद माहौल और अधिक गर्मा गया है और लोग नाथद्वारा अस्पताल के बाहर जमा हो गए हैं। परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि जब तक लापता पार्षद और अन्य लोग वापस नहीं लौटते, तब तक वे शव को नहीं उठाएंगे।

चुनाव से पहले गरमाई स्थानीय राजनीति

नाथद्वारा में नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल दिया है। एक तरफ जहां पुलिस लापता पार्षद की तलाश में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ विभिन्न राजनीतिक मोर्चों पर तनाव बना हुआ है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच के नतीजों और लापता पार्षद के सामने आने पर टिकी हुई हैं।

सवाल-जवाब

प्रदीप काबरा कौन हैं?
प्रदीप काबरा नाथद्वारा नगर पालिका के वार्ड नंबर 4 से भाजपा पार्षद हैं।
वे कहाँ से आ रहे थे जब लापता हुए?
वे अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने जोधपुर से नाथद्वारा आ रहे थे।
इस मामले में किसने अपहरण का आरोप लगाया है?
लापता पार्षद के बेटे धर्मेंद्र काबरा ने अज्ञात लोगों द्वारा उनके पिता के अपहरण का आरोप लगाया है।
प्रदर्शन के दौरान कौन सी बड़ी दुर्घटना घटी?
विरोध प्रदर्शनों और तनाव के बीच वार्ड नंबर 15 की पार्षद हिना पुरोहित के ससुर की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।
किन जनप्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर समझाइश की?
राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ और नाथद्वारा विधायक ने मौके पर पहुंचकर परिजनों से बातचीत की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·7 दिन पहले

नाथद्वारा की यह घटना राजस्थान के स्थानीय निकायों में दलबदल और हॉर्स ट्रेडिंग की पुरानी और खतरनाक संस्कृति को उजागर करती है। निकाय अध्यक्ष पद के चुनाव से ठीक पहले इस तरह की उठापटक और आंतरिक कलह पार्टी नेतृत्व के लिए गंभीर चुनौती है। यदि समय रहते प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक समन्वय नहीं दिखाया गया, तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों और पार्टी की जमीनी पकड़ पर पड़ेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·7 दिन पहले

यह घटना न केवल राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाती है, बल्कि इसका सीधा असर कॉरपोरेट और स्थानीय निवेश के माहौल पर भी पड़ता है। जब चुनावी प्रक्रिया में इस स्तर की अनिश्चितता और हिंसा जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो स्थानीय विकास कार्यों और वित्तीय योजनाओं की गति धीमी हो जाती है। निवेशकों और स्थानीय व्यापारिक समुदायों का भरोसा बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि प्रशासनिक मशीनरी राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर तुरंत और पारदर्शी कार्रवाई करे, अन्यथा इसका असर भविष्य के आर्थिक और प्रशासनिक निर्णयों पर पड़ेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 दिन पहले

नाथद्वारा की यह घटना चुनाव से पहले हॉर्स ट्रेडिंग और राजनीतिक दबाव की गंभीर आशंकाओं को जन्म देती है। एक पार्षद के लापता होने और अपहरण के आरोपों के बीच विरोध प्रदर्शन और एक व्यक्ति की मौत ने कानून-व्यवस्था के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पुलिस के लिए यह आवश्यक है कि वह अपहरण के एंगल की गहराई से जाँच करे और तकनीकी सर्विलांस का उपयोग कर सभी पार्षदों को सुरक्षित बरामद करे, अन्यथा यह तनाव और अधिक उग्र रूप ले सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·7 दिन पहले

निकाय चुनावों के दौरान इस तरह के घटनाक्रम लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता पर सीधा सवाल खड़े करते हैं। जब अध्यक्ष पद के टिकट आवंटन को लेकर स्थानीय विधायक की असहमति सामने आती है और उसी दौरान पार्षदों की गुमशुदगी जैसी स्थितियां बनती हैं, तो अंतर्कलह और अनुचित दबाव की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। पुलिस और प्रशासन के लिए यह महज़ एक गुमशुदगी का मामला नहीं है, बल्कि इससे जुड़े राजनीतिक संपर्कों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स की गहन छानबीन अनिवार्य है, ताकि किसी भी अनहोनी से पहले निष्पक्षता और कानून का राज स्थापित किया जा सके।

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