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नेपाल में आए विनाशकारी सैलाब के बाद शर्मिष्ठा भौमिक रॉय से संपर्क टूटा, परिजनों ने जताई चिंतापश्चिम बंगाल
27 अग॰ 2026, 3:49 pm (16 दिन पहले)· 2

नेपाल में आए विनाशकारी सैलाब के बाद शर्मिष्ठा भौमिक रॉय से संपर्क टूटा, परिजनों ने जताई चिंता

नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद दिवंगत पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय की बहू शर्मिष्ठा भौमिक रॉय लापता हो गई हैं। वह 21 अगस्त को नेपाल गई थीं, जहां अब तक 270 लोगों की मौत और 288 भारतीयों समेत 1,000 से ज्यादा लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है।

उत्तर 24 परगना जिले की निवासी और दिवंगत पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय की बहू शर्मिष्ठा भौमिक रॉय नेपाल में आए भयानक सैलाब के बाद से लापता हो गई हैं। वह 21 अगस्त को एक ट्रैवल एजेंसी के साथ नेपाल की यात्रा पर गई थीं। बीते बुधवार को पड़ोसी देश में अचानक आए जलप्रलय के बाद से शर्मिष्ठा का कोई सुराग नहीं मिला है। उनसे संपर्क न हो पाने के कारण उनके परिजन काफी चिंतित हैं और लगातार प्रशासनिक मदद की गुहार लगा रहे हैं।

परिजनों की बढ़ती चिंताएं और सरकारी तंत्र से संपर्क

शर्मिष्ठा के पति शुवरांग्शु रॉय ने इस विकट स्थिति के बीच अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी अकेले ही नेपाल दौरे पर गई थीं और आपदा आने के बाद से उनसे संपर्क के सभी रास्ते बंद हो चुके हैं। वह लगातार नेपाल और भारत के प्रशासनिक अधिकारियों के संपर्क में हैं ताकि अपनी पत्नी के बारे में कोई ठोस जानकारी प्राप्त कर सकें।

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अपनी पत्नी की स्थिति का विवरण देते हुए शुवरांग्शु रॉय ने आधिकारिक रिकॉर्ड्स का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "मेरी पत्नी मिसिंग लिस्ट में हैं।" उन्होंने आगे बताया कि अभी तक प्रशासन की ओर से कोई नया अपडेट नहीं मिला है। राहत की बात यह है कि उनके दोनों बच्चे, जिनमें एक बेटा और एक बेटी शामिल हैं, इस समय भारत में अपने पिता के साथ सुरक्षित हैं।

नेपाल में तबाही के आंकड़े और लापता भारतीय नागरिक

तिब्बत की ओर से आए विशाल सैलाब ने नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। तिब्बत से सटे नेपाल के कई ग्रामीण और शहरी इलाके पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। इस आपदा के कारण जान-माल का कितना नुकसान हुआ है, इसकी सटीक तस्वीर अभी साफ नहीं हो सकी है क्योंकि राहत कार्य लगातार जारी हैं और हर घंटे नए आंकड़े सामने आ रहे हैं।

ताजा स्थिति के अनुसार, नेपाल सरकार ने अब तक 270 लोगों की जान जाने की आधिकारिक पुष्टि की है। इसके अलावा 1,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत और बचाव दल जुटे हुए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस संबंध में आंकड़ा जारी किया है, जिसके अनुसार नेपाल में इस समय 288 भारतीय नागरिक लापता बताए जा रहे हैं।

चीन पर जानकारी छिपाने के आरोप और अमेरिकी एजेंसी का खुलासा

इस आपदा के दौरान चीन की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, तिब्बत में आए भारी संकट और मलबे के साथ तेजी से नेपाल की ओर बढ़ रहे जलप्रवाह की जानकारी देने में चीन ने काफी देरी की। सैलाब अपने साथ चट्टानों और विशाल बोल्डरों को बहाकर ले आया, जिससे नेपाल के निचले इलाकों में रहने वाले सैकड़ों लोग इसकी चपेट में आ गए।

हालांकि, नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने इन आरोपों का पूरी तरह खंडन किया है। दूतावास का तर्क है कि यह आपदा नेपाल की तरफ हुए ग्लेशियर टूटने या स्थानीय भूकंप के कारण उत्पन्न हुई है। लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने एक अलग खुलासा किया है। अमेरिकी संस्थान के अनुसार, तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के कारण 5.2 की तीव्रता का भूकंप आया था, जिसने इस प्रलयंकारी सैलाब को जन्म दिया।

सवाल-जवाब

शर्मिष्ठा भौमिक रॉय नेपाल कब गई थीं?
शर्मिष्ठा भौमिक रॉय 21 अगस्त को एक ट्रैवल एजेंसी के साथ अकेले नेपाल दौरे पर गई थीं।
नेपाल में आई बाढ़ में कितने लोग लापता हैं?
नेपाल सरकार के अनुसार 1,000 से अधिक लोग लापता हैं, जिनमें 288 भारतीय नागरिक शामिल हैं।
नेपाल बाढ़ में अब तक कितनी मौतों की पुष्टि हुई है?
नेपाल सरकार ने आधिकारिक तौर पर 270 लोगों की मौत की पुष्टि की है।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार नेपाल में बाढ़ का मुख्य कारण क्या था?
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार तिब्बत में ग्लेशियर टूटने से 5.2 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे यह भयानक बाढ़ आई।
चीन ने बाढ़ की जिम्मेदारी पर क्या सफाई दी है?
चीन के दूतावास ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि यह तबाही नेपाल की तरफ ग्लेशियर टूटने या भूकंप आने से हुई है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·16 दिन पहले

नेपाल की आपदा में पूर्व मंत्री की बहू का लापता होना और सैकड़ों भारतीयों की गैर-मौजूदगी भारत-नेपाल सीमा पर आपदा प्रबंधन की गंभीर खामियों को उजागर करती है। तिब्बत से आए पानी और कूटनीतिक आरोपों के बीच, भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा 288 भारतीयों के लापता होने की पुष्टि यह दर्शाती है कि सीमा पार यात्रा करने वाले नागरिकों की सुरक्षा और त्वरित ट्रैकिंग के लिए एक मजबूत द्विदेशीय तंत्र की तत्काल आवश्यकता है। बचाव कार्यों में तेजी और प्रशासनिक समन्वय ही अब परिवारों की उम्मीद का मुख्य आधार है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 दिन पहले

इस आपदा में भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा 288 नागरिकों के लापता होने की पुष्टि यह साबित करती है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए रियल-टाइम ट्रैकिंग और आपातकालीन सहायता डेस्क का अभाव है। राजनीतिक रसूख वाले परिवारों तक तो प्रशासनिक तंत्र तुरंत पहुँच जाता है, लेकिन आम नागरिकों के लिए संकट के इस दौर में कूटनीतिक समन्वय और भू-राजनीतिक देरी जानलेवा साबित हो रही है। चीन द्वारा जानकारी छिपाने के आरोपों और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के खुलासे के बीच, अब भारतीय कूटनीति पर यह दबाव बढ़ गया है कि वह पड़ोसी देशों के साथ मिलकर एक सख्त और पारदर्शी आपदा पूर्व-चेतावनी प्रणाली स्थापित करे, ताकि भविष्य में इस तरह के जलप्रलय में अनमोल जानें न गँवानी पड़ें।

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