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नेपाल में भारतीय बचाव अभियान तेज, डीएनए विशेषज्ञों और टनल रेस्क्यू टीम ने संभाला मोर्चाछत्तीसगढ़
30 अग॰ 2026, 10:48 pm (25 दिन पहले)· 3

नेपाल में भारतीय बचाव अभियान तेज, डीएनए विशेषज्ञों और टनल रेस्क्यू टीम ने संभाला मोर्चा

नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के तहत भारत ने अपनी विशेष टीमें तैनात कर दी हैं। काठमांडू में फॉरेंसिक विशेषज्ञ डीएनए जांच में जुटे हैं, जबकि टनल रेस्क्यू टीम दुर्गम इलाकों में तलाश कर रही है और चीन की तरफ से 403 भारतीय सुरक्षित पहुंच गए हैं।

नेपाल में चल रहे राहत और बचाव अभियानों के बीच भारत ने मदद का दायरा और अधिक बढ़ा दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भारत की विशेष और तकनीकी रूप से दक्ष टीमें स्थानीय अधिकारियों तथा नेपाली सेना के साथ मिलकर लगातार काम कर रही हैं। इस आपदा प्रबंधन अभियान के तहत राजधानी काठमांडू में भारतीय फॉरेंसिक विशेषज्ञों का एक दल पहुंच चुका है और उसने अपना कामकाज पूरी तरह से शुरू कर दिया है। इसके साथ ही, भारत की टनल रेस्क्यू टीम सबसे दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सुरंगों के भीतर फंसे हुए लोगों की तलाश और राहत कार्यों में जुटी हुई है।

मृतकों की शिनाख्त की प्रक्रिया को तेज करने और उसमें पूरी सटीकता लाने के उद्देश्य से भारत की 19 सदस्यीय फॉरेंसिक टीम काठमांडू पहुंच चुकी है। यह विशेष टीम नेपाल में बरामद हुए शवों की पहचान करने के लिए डीएनए सैंपल की जांच में स्थानीय प्रशासन को पूरा सहयोग दे रही है। यह दल नेपाल के संबंधित विभागों के साथ मिलकर समन्वय स्थापित कर रहा है, ताकि पीड़ित परिवारों को उनके प्रियजनों के बारे में जल्द से जल्द और सही जानकारी मिल सके। इस वैज्ञानिक और फॉरेंसिक मदद से पहचान के संकट को दूर करने में काफी सहायता मिल रही है।

इस संपूर्ण राहत अभियान का एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू पनबिजली परियोजनाओं और सुरंगों के भीतर चलाया जाने वाला सघन सर्च ऑपरेशन भी है। भारत की विशेष टनल सर्च एंड रेस्क्यू टीम ने रविवार के दिन नेपाली सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चिलिमे और लांगटांग क्षेत्र में स्थित हाइड्रोपावर टनल साइट्स पर तलाशी अभियान को अंजाम दिया। मौसम की खराब स्थिति और बेहद कठिन भौगोलिक बाधाओं के बावजूद भारतीय विशेषज्ञों का यह दल लांगटांग के नजदीक बनी एक सुरंग के अंदर तक पहुंचने में कामयाब रहा।

इस साहसिक तलाशी अभियान के दौरान भारतीय टीम को सुरंग के भीतर एक व्यक्ति का शव बरामद हुआ, जिसे अत्यंत सावधानी के साथ सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस सफलता के बाद भी सुरंगों के अंदर और उनके आसपास के बाहरी इलाकों में सर्च ऑपरेशन को रोका नहीं गया, बल्कि उसे लगातार जारी रखा गया है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, सुरंगों में बचाव कार्य के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित यह टीम नेपाली सेना के साथ निरंतर संपर्क और तालमेल के साथ काम कर रही है।

भविष्य की रणनीतिक योजना के तहत, चिलिमे और लांगटांग क्षेत्र की हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में आवश्यकता और हालात के अनुसार आगे भी तलाशी और बचाव अभियानों का सिलसिला जारी रहेगा। दुर्गम क्षेत्रों में छिपी हरसंभव चुनौती से निपटने के लिए इन टीमों को अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञता के साथ मैदान में उतारा गया है, जिससे बचाव कार्यों को एक नई गति और दिशा मिल रही है।

दूसरी ओर, नेपाल में फंसे हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान भी युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में, चीन की सीमा की तरफ से कुल 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। इसके अतिरिक्त, लगभग 500 अन्य भारतीय नागरिक अभी भी चीन की तरफ सुरक्षित स्थानों पर मौजूद हैं। भारतीय कूटनीतिक और प्रशासनिक अधिकारी इन सभी नागरिकों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और उन्हें पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्वदेश या सुरक्षित गंतव्य तक लाने के लिए हर आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं।

नेपाल के भीतर वर्तमान में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। मौसम का मिजाज लगातार खराब चल रहा है, पहाड़ी रास्ते और दुर्गम क्षेत्र राहत कार्यों में बड़ी बाधा बन रहे हैं, और कई इलाकों में संपर्क मार्ग तथा कम्यूनिकेशन सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया है। इन तमाम गंभीर कठिनाइयों के कारण राहत और बचाव अभियानों को लगातार नई और जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

इन तमाम विकट परिस्थितियों के बावजूद, भारत ने किसी भी प्रकार की कोताही न बरतते हुए फॉरेंसिक विशेषज्ञों से लेकर टनल रेस्क्यू में माहिर प्रशिक्षित टीमों तक को मैदान में उतार दिया है। भारत की ये तमाम टीमें नेपाल सरकार और नेपाली सेना के साथ मिलकर पूरी मुस्तैदी से डटी हुई हैं। आने वाले दिनों में भी इस प्रकार के व्यापक सर्च ऑपरेशन के जारी रहने की पूरी संभावना है। वर्तमान में प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता उन दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना है जहां लोगों के फंसे होने की आशंका सबसे अधिक है, साथ ही मृतकों की पहचान कर उनके परिजनों तक प्रामाणिक सूचना पहुंचाना भी इस राहत मिशन का एक मुख्य उद्देश्य है।

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सवाल-जवाब

नेपाल में शवों की पहचान के लिए भारत से कितने सदस्यों की टीम गई है?
भारत से 19 सदस्यीय फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम काठमांडू पहुंच चुकी है।
टनल सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन किन इलाकों में चलाया गया है?
भारतीय टनल रेस्क्यू टीम ने नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग क्षेत्र में यह अभियान चलाया है।
चीन की तरफ से कितने भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंचे हैं?
चीन की तरफ से कुल 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं।
चीन की तरफ अभी कितने भारतीय नागरिक सुरक्षित स्थानों पर हैं?
लगभग 500 भारतीय नागरिक अभी भी चीन की तरफ सुरक्षित स्थानों पर मौजूद हैं।
राहत कार्यों में किस देश की सेना का सहयोग लिया जा रहा है?
भारतीय टीमें नेपाली सेना के साथ मिलकर समन्वय बनाकर राहत कार्य चला रही हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·25 दिन पहले

यह आपदा प्रबंधन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां केवल नागरिकों की सुरक्षित वापसी ही नहीं, बल्कि फॉरेंसिक और टनल रेस्क्यू जैसी तकनीकी विशेषज्ञता का भी प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। डीएनए जांच से पीड़ितों की शिनाख्त में आ रही अड़चनें दूर होंगी और दुर्गम पहाड़ी इलाकों तथा सुरंगों में नेपाल सेना के साथ यह समन्वय भारत की कूटनीतिक व मानवीय प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह ऑपरेशन केवल राहत कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानूनी और फोरेंसिक प्रोटोकॉल के पालन का एक कड़ा मानक स्थापित करता है। आपदा के समय शवों की वैज्ञानिक पहचान और डीएनए मिलान यह सुनिश्चित करता है कि कानूनी रूप से मृत्यु के मामलों में वारिसों को बीमा, मुआवजा और आधिकारिक उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कोई विधिक अड़चन न आए। इसके अलावा, टनल रेस्क्यू के दौरान बरामद शव और भविष्य की रणनीतिक खोज यह संकेत देती है कि इस अभियान के कानूनी और फॉरेंसिक पहलू आने वाले दिनों में सीमा पार आपदा प्रबंधन के लिए एक मिसाल बनेंगे।

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