राजस्थान के धौलपुर जिले में डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर चलाए जा रहे अवैध जुए और सट्टेबाजी के नेटवर्क पर पुलिस ने कड़ा शिकंजा कसा है। निहालगंज थाना पुलिस ने ऑनलाइन सट्टे की खाईवाली में शामिल तीन वांछित आरोपियों को धर दबोचा है। पकड़े गए तीनों आरोपी वॉट्सऐप प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर काफी संगठित ढंग से सट्टे की पर्चियां काटने और दांव लगवाने का सिंडिकेट संचालित कर रहे थे। इस मामले में पुलिस ने जिन तीन लोगों को हिरासत में लिया है, उनकी पहचान अजय शर्मा, रंजीत और हरेन्द्र के तौर पर की गई है।
अगस्त में हुई मुख्य सरगना की गिरफ्तारी से खुला था राज
इस पूरे डिजिटल सट्टा नेटवर्क की परतें डेढ़ महीने पहले खुलनी शुरू हुई थीं, जब पुलिस ने मुख्य आरोपी हाकिम सिंह उर्फ लाला को पकड़ा था। पुलिस टीम ने 12 अगस्त को गडरपुरा तिराहे पर घेराबंदी करके हाकिम सिंह को गिरफ्तार किया था। तलाशी के दौरान उसके पास से 16 हजार 240 रुपये की सट्टा राशि जब्त की गई थी। इसके अतिरिक्त पुलिस ने मौके से एक मोबाइल फोन, गणना के लिए रखा गया कैलकुलेटर, सट्टे के लेन-देन का हिसाब दर्ज करने वाली डायरी और पर्चियां भी बरामद की थीं। इन भौतिक साक्ष्यों और नकदी की बरामदगी के बाद जब पुलिस ने हाकिम सिंह के मोबाइल फोन का तकनीकी विश्लेषण किया, तब जाकर इस बात का खुलासा हुआ कि सट्टे का यह खेल केवल पर्चियों तक सीमित नहीं था बल्कि वॉट्सऐप के माध्यम से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन फैला हुआ था।
मोबाइल चैट से सामने आए तीन वांछित नाम
हाकिम सिंह उर्फ लाला के मोबाइल फोन की पड़ताल में पुलिस को कई संदिग्ध वॉट्सऐप चैट्स और सट्टेबाजी से जुड़े संदेश मिले थे। इन विवरणों से स्पष्ट हुआ कि हाकिम सिंह अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि उसके साथ कई अन्य सहयोगी मिलकर लोगों से ऑनलाइन दांव लगवा रहे थे। चैट रिकॉर्ड्स के आधार पर पुलिस ने नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की धरपकड़ के लिए अभियान शुरू किया। जांच आगे बढ़ने पर अजय शर्मा, रंजीत और हरेन्द्र की सक्रिय भूमिका प्रमाणित हुई। ये तीनों तभी से वांछित चल रहे थे और पुलिस की टीमें लगातार उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं। आखिरकार निहालगंज थाना पुलिस ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए 29 सितंबर को इन तीनों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।
नेटवर्क की कड़ियां खंगालने में जुटी पुलिस
तीनों वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद निहालगंज थाना पुलिस अब इस संगठित तंत्र की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच अधिकारी यह बारीकी से समझने में जुटे हैं कि वॉट्सऐप ग्रुप्स और पर्सनल चैट्स के जरिए ऑनलाइन दांव लगाने का यह ढांचा कैसे काम करता था और इसमें शहर या जिले के कुल कितने लोग सक्रिय थे। मुख्य आरोपी के फोन से मिली डिजिटल जानकारियों को आधार बनाकर अब नए पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि इस गैरकानूनी सट्टा कारोबार के हर सूत्र को उजागर किया जा सके।



















