देश की राजधानी में हर रोज सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए घंटों जाम में फंसे रहना आम बात बन चुकी है। व्यस्त समय में चंद किलोमीटर की दूरी नापने में भी लोगों का काफी कीमती वक्त और ईंधन बर्बाद होता है। सड़कों की इसी अस्त-व्यस्त स्थिति को सुधारने और सफर को सुगम बनाने के लिए अब तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए कैबिनेट ने दिल्ली के लिए ₹1,789.52 करोड़ की लागत वाले इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहर के ट्रैफिक सिग्नल, निगरानी कैमरों और यातायात नियमों के क्रियान्वयन को एक एकीकृत आधुनिक तंत्र से जोड़ना है।
यह व्यापक परियोजना दिल्ली के 42 सबसे व्यस्त और प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर पर चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। तय योजना के अनुसार, इस पूरे काम को तीन अलग-अलग चरणों में करीब 24 महीने के भीतर जमीन पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही, परियोजना पूरी होने के बाद आगामी पांच वर्षों तक सिस्टम के सुचारू संचालन और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी भी तय की गई है। इस नेटवर्क के दायरे में राजधानी की 1,092 सिग्नल लोकेशन शामिल होंगी, जिन्हें आधुनिक अडैप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम से सीधे जोड़ा जाएगा।
वाहन दबाव भांपकर अपने आप बदलेंगी ट्रैफिक लाइटें
इस आधुनिक प्रणाली का सबसे अहम पहलू स्मार्ट और अडैप्टिव ट्रैफिक लाइटें हैं, जो परंपरागत टाइमर व्यवस्था को पूरी तरह बदल देंगी। ये उन्नत सिग्नल सड़क पर वाहनों की वास्तविक संख्या और दबाव को देखकर अपनी बत्ती का समय खुद तय करेंगे। इससे वाहन चालकों को देर रात या खाली सड़कों पर बेवजह लाल बत्ती पर रुकना नहीं पड़ेगा, जबकि भारी भीड़ वाली लेन को अधिक ग्रीन टाइम देकर कतारों को तेजी से खाली कराया जा सकेगा।
इसके अलावा, यह सिस्टम चौराहों से लगातार रियल-टाइम डेटा कंट्रोल रूम तक पहुंचाएगा। कहीं पर भारी जाम लगने, गाड़ियों की रफ्तार अचानक बहुत धीमी होने या किसी सड़क हादसे की स्थिति में तुरंत ट्रैफिक पुलिस को अलर्ट मिलेगा। इस सटीक सूचना के आधार पर पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे बिना ही आवश्यकतानुसार अन्य रास्तों पर वाहनों को डायवर्ट करने का त्वरित निर्णय ले सकेंगे।
आपातकालीन वाहनों और एंबुलेंस के लिए बनेगा ग्रीन कॉरिडोर
गंभीर मरीजों और आपातकालीन सेवाओं के लिए जाम में फंसना कई बार जानलेवा साबित होता है। इस चुनौती से निपटने के लिए नए सिस्टम में इमरजेंसी वाहनों को स्वचालित प्राथमिकता देने का विशेष प्रावधान जोड़ा गया है। यदि कोई एंबुलेंस या अन्य आपातकालीन वाहन किसी मार्ग से गुजर रहा होगा, तो यह सिस्टम तुरंत उसके आगे के सिग्नलों को हरा करके एक ग्रीन कॉरिडोर तैयार कर देगा। इससे आपात स्थिति में बिना किसी रुकावट के अस्पतालों तक पहुंचने के समय में खासी कमी आएगी।
लापरवाह चालकों पर एआई कैमरों से सीधी कार्रवाई
सड़क सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए सिस्टम में बड़े स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। राजधानी के करीब 1,029 चुनिंदा स्थानों पर ट्रैफिक नियमों के ऑटोमेटेड एनफोर्समेंट की मजबूत व्यवस्था की जा रही है। यह नेटवर्क मानवीय हस्तक्षेप के बिना ही रेड लाइट जंप करने, स्टॉप लाइन पार करने, तेज गति से वाहन चलाने और गलत दिशा में गाड़ी दौड़ाने जैसी गलतियों को रिकॉर्ड करेगा।
इसके साथ ही बिना हेलमेट दोपहिया चलाने, कार में सीट बेल्ट न लगाने, अवैध पार्किंग करने और गाड़ी चलाते समय हाथ में मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले चालकों के ई-चालान अपने आप कटेंगे। एआई तकनीक की मदद से चोरी की गाड़ियों, ब्लैकलिस्टेड वाहनों और आदतन बार-बार कानून का उल्लंघन करने वाले वाहनों को भी तुरंत पहचान लिया जाएगा।
सड़क पर चालकों को मिलेगी रियल-टाइम नेविगेशन सूचना
सफर को आसान बनाने के लिए सड़कों के किनारे बड़े डिजिटल साइन बोर्ड लगाए जाएंगे और सूचनाओं को मोबाइल ऐप प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा जाएगा। इनके माध्यम से वाहन चालकों को आगे लगने वाले जाम, संभावित डायवर्जन, पार्किंग में खाली जगह और सड़कों की ताजा स्थिति की लाइव जानकारी पहले ही मिल जाएगी। यह लाइव ट्रैफिक डेटा नेविगेशन सेवाएं प्रदान करने वाले प्लेटफॉर्म के साथ भी साझा किया जाएगा, ताकि लोग पहले से ही जाममुक्त वैकल्पिक रास्तों का चुनाव कर सकें।
























