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नीलगिरी में यात्रियों की जान बचाने वाले ड्राइवर जनगराज का निधन, भूस्खलन ने छीनी जिंदगीभारत
26 अक्तू॰ 2026, 12:23 pm (15 घंटे पहले)· 0

नीलगिरी में यात्रियों की जान बचाने वाले ड्राइवर जनगराज का निधन, भूस्खलन ने छीनी जिंदगी

तमिलनाडु के नीलगिरी में भारी बारिश और भूस्खलन के बीच बस खराब होने पर ड्राइवर जनगराज ने सभी यात्रियों को सुरक्षित दूसरी बस में भेज दिया, लेकिन खुद वाहन की सुरक्षा करते वक्त पहाड़ी से गिरे मलबे की चपेट में आ गए जिससे उनका निधन हो गया।

तमिलनाडु के नीलगिरी जिले से एक बेहद मार्मिक घटना सामने आई है जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश के बीच एक सरकारी बस रास्ते में तकनीकी खराबी के चलते बंद हो गई थी, जिससे यात्रियों की जान पर संकट मंडराने लगा था। ऐसे विकट और चुनौतीपूर्ण माहौल में बस चालक जनगराज ने अपनी परवाह किए बिना सबसे पहले यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए सभी यात्रियों को एक अन्य सुरक्षित बस में बैठाकर उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया, लेकिन खुद अपनी बस को छोड़कर जाने से इनकार कर दिया। उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यात्रियों की हिफाजत करने का यह नेक फैसला उनके जीवन का अंतिम संघर्ष साबित होगा। अचानक पहाड़ की ऊंचाई से एक विशाल चट्टान और भारी-भरकम पेड़ सीधे बस पर आ गिरे, जिससे वाहन बुरी तरह चकनाचूर हो गया और जनगराज की मौके पर ही जान चली गई। उनके इस असाधारण त्याग और बलिदान ने पूरे तमिलनाडु को शोक में डुबो दिया है।

प्राप्त विवरण के अनुसार, जनगराज नीलगिरी जिले के दुराट्टी गांव के निवासी थे और राज्य परिवहन निगम में बस चालक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। गत 23 तारीख की रात वह कुन्नूर से कोयंबटूर की तरफ जाने वाली सरकारी बस का संचालन कर रहे थे। इस बस में उनके साथ कंडक्टर केशवन और अन्य कई यात्री भी सवार थे। इलाके में हो रही भारी वर्षा के कारण परलियार के नजदीक अचानक बस खराब हो गई। उस समय रात का वक्त था और चारों तरफ घना अंधेरा और जंगल फैला हुआ था। ऐसे कठिन हालात में यात्रियों को सड़क पर रोकना बेहद खतरनाक साबित हो सकता था। चालक जनगराज ने तत्परता दिखाते हुए सभी यात्रियों को सुरक्षित वाहन से रवाना कर दिया और खुद अपनी बस की सुरक्षा में जुट गए। अगली सुबह जब राहत और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर तलाशी अभियान चलाया, तो उन्हें ड्राइवर की सीट पर जनगराज का मृत शरीर मिला। वह अपनी सीट पर बस के तारों को मजबूती से पकड़े हुए अवस्था में पाए गए।

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यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद जनगराज अकेले ही बस के पास रुक गए थे। बताया गया है कि वह अपनी सरकारी बस को लावारिस या असुरक्षित छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे और लगातार उसकी हिफाजत के उपाय कर रहे थे। ठीक उसी समय पहाड़ी की चोटी से एक भारी पत्थर और एक विशाल पेड़ सीधे नीचे आ गिरे। इस अप्रत्याशित हादसे में बस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। लगातार जारी बारिश और भूस्खलन की घटनाओं के कारण बचाव कार्यों को शुरू करने में भी काफी विलंब हुआ। सुबह के वक्त जब बचाव दल ने तेजी से अभियान चलाया, तब जाकर जनगराज का शव बरामद किया जा सका। उनके पार्थिव शरीर को आगे की प्रक्रिया के लिए मेट्टुपलयम सरकारी अस्पताल भेज दिया गया। इस भीषण दुर्घटना में बस के कंडक्टर केशवन को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक और बड़ी जान बचाई जा सकी।

चालक जनगराज के निधन की दुखद सूचना मिलते ही उनका पूरा परिवार गहरे सदमे में डूब गया। अपने पिता को खोने के अथाह दर्द में उनके बेटे का रो-रोकर बुरा हाल था, जिसे देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। बेटे ने मीडिया को बताया कि उनके पिता ही उसकी शिक्षा और भविष्य में शिक्षक बनने के बड़े सपने को पूरा करने की एकमात्र प्रेरणा थे। परिवार के भरण-पोषण के लिहाज से जनगराज केवल घर के कमाने वाले सदस्य ही नहीं थे, बल्कि वह पूरे परिवार के उज्ज्वल भविष्य की इकलौती उम्मीद थे। उनके निधन के बाद उनके साथी सहकर्मियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए सरकार से पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता प्रदान करने और परिवार के एक सदस्य को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी देने की पुरजोर मांग की है।

इस हृदय विदारक घटना के बाद से परलियार के आसपास की पर्वतीय सड़कों पर यातायात सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों और संगठनों ने उन संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क मार्ग को चौड़ा करने तथा मजबूत सुरक्षा दीवारें बनाने की जोरदार मांग उठाई है जहां अक्सर भूस्खलन का खतरा बना रहता है। भारी बारिश के मौसम में पहाड़ी रास्तों पर सफर करना कितना जोखिम भरा हो सकता है, यह दर्दनाक हादसा इस बात की एक गंभीर चेतावनी देता है। जनगराज ने अपनी ड्यूटी निभाते हुए यात्रियों की हिफाजत की जो मिसाल पेश की, वह हमेशा याद रखी जाएगी। उनकी असमय मौत ने उनके परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दिया है, लेकिन उनके साथियों और स्थानीय अंचल के लोगों के दिलों में उनका यह अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के प्रति समर्पण हमेशा अमर रहेगा।

सवाल-जवाब

यह दुर्घटना किस जिले में हुई?
यह दुर्घटना तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में परलियार के पास हुई।
बस ड्राइवर जनगराज किस वाहन का संचालन कर रहे थे?
वह कुन्नूर से कोयंबटूर जाने वाली एक सरकारी बस चला रहे थे।
हादसे के समय बस में और कौन मौजूद था?
बस में कंडक्टर केशवन और अन्य यात्री भी सवार थे जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया।
जनगराज का पार्थिव शरीर कहां भेजा गया?
उनका शव बरामद होने के बाद मेट्टुपलयम सरकारी अस्पताल भेजा गया।
सहकर्मियों ने सरकार से क्या मांग की है?
सहकर्मियों ने पीड़ित परिवार को राहत राशि देने और परिवार के एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 3

Divya Reddy@divya-reddy·13 घंटे पहले

ड्राइवर जनगराज का यह बलिदान रोंगटे खड़े कर देता है। यात्रियों की जान बचाने के लिए उन्होंने अपनी परवाह नहीं की, ऐसी कर्तव्यनिष्ठा और इंसानियत आज के दौर में बहुत बड़ी बात है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 घंटे पहले

ड्राइवर सीट पर तारों को पकड़े हुए मिलना दिल दहला देने वाला है।

Rohan Verma@rohan-verma·14 घंटे पहले

करण भाई, सच में दिल चीर देने वाली बात है। पर क्या उस वक्त वहां कोई और मदद के लिए नहीं था जो उन्हें अकेले छोड़ना पड़ा?

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