उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में जुबानी जंग चरम पर पहुंच गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को एक साथ भारतीय जनता पार्टी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी दोनों ने ही अलग-अलग जनसभाओं में पूर्व मुख्यमंत्री पर जमकर निशाना साधा। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी ने समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर दंगाइयों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, वहीं दूसरी तरफ ओवैसी ने सपा प्रमुख पर मुस्लिम समुदाय को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने का आरोप मढ़ दिया।
योगी आदित्यनाथ के तीखे प्रहार और सांस्कृतिक उपलब्धियों का दावा
कानपुर के बिठूर में आयोजित एक बड़े जनसंबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 441 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस धार्मिक स्थल से जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य की वर्तमान सरकार की सांस्कृतिक विरासत और आस्था के संरक्षण संबंधी उपलब्धियों को रेखांकित किया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प और मथुरा, विंध्याचल, नैमीषारण्य तथा प्रयागराज जैसे पवित्र स्थलों का विकास वर्तमान शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखे राजनीतिक बाण चलाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान राज्य में मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और मथुरा जैसे भीषण दंगे हुए थे। योगी ने दावा किया कि उस दौर में शासन दंगों पर आंखें मूंदकर बैठा रहता था और उपद्रवियों को मुख्यमंत्री आवास पर बुलाकर सम्मानित किया जाता था। उन्होंने कहा कि आज राज्य में कानून व्यवस्था का राज है और पुलिस प्रशासन को सतर्क रखने के लिए दंगा-रोधी मॉक ड्रिल तक कराई जा रही हैं। अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्होंने छोटे मियां और बड़े मियां की शब्दावली का इस्तेमाल किया और कहा कि इन नेताओं को देश के नागरिकों से ज्यादा घुसपैठियों की चिंता सताती है।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप और अखिलेश यादव का पलटवार
मुख्यमंत्री योगी के आरोपों के बाद अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पलटवार किया। उन्होंने उत्तराखंड से आकर उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री बनने का उदाहरण देते हुए घुसपैठिया शब्द की परिभाषा पर सवाल खड़े किए। इसके साथ ही अखिलेश यादव ने एक प्रस्तुति के माध्यम से चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल पर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया।
समाजवादी पार्टी के आंतरिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में भारी फर्जीवाड़ा चल रहा है। उन्होंने आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए बताया कि सूची में राजेश नाम के व्यक्ति की पत्नी सुनीता के नाम से 420 प्रविष्टियां मिली हैं और इसी नाम से पूरे प्रदेश में 2300 से अधिक वोटर दर्ज किए गए हैं। इसी प्रकार राजकुमारी पत्नी राजकुमार नाम से 315 प्रविष्टियां उजागर हुई हैं। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि असली मतदाताओं का नाम हटाकर फर्जी नामों की घुसपैठ कराई जा रही है।
हालांकि, मतदाता सूची में धोखाधड़ी के इन दावों पर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने तुरंत स्पष्टीकरण दिया। निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों या क्षेत्रों में समान नाम और समान पारिवारिक नाम वाले कई मतदाता होना एक सामान्य प्रक्रिया है। केवल नाम की समानता के आधार पर फर्जीवाड़े का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। इस बयान के बाद मुख्यमंत्री योगी ने पुनः तंज कसते हुए कहा कि सत्ता गंवाने के बाद समाजवादी पार्टी मनगढ़ंत आरोपों के सहारे दोबारा गद्दी पाने का सपना देख रही है।
असदुद्दीन ओवैसी का आक्रामक रुख और मुस्लिम राजनीति पर घेराबंदी
दूसरी ओर, मुजफ्फरनगर में आयोजित रैली में असदुद्दीन ओवैसी ने अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। रामपुर में अखिलेश द्वारा खुद की तुलना रावण से किए जाने के बयान का जवाब देते हुए ओवैसी ने मुजफ्फरनगर दंगों का पुराना इतिहास याद दिलाया। उन्होंने कहा कि जब मुजफ्फरनगर में भीषण हिंसा हो रही थी, तब समाजवादी पार्टी के पास 47 मुस्लिम विधायक मौजूद थे, लेकिन किसी ने पीड़ित समुदाय की सुध नहीं ली। उस समय सत्ता के गलियारों में बैठे लोग सैफई में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद ले रहे थे।
ओवैसी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब भी कोई नेता मुस्लिम समाज के हक की बात करता है, तो समाजवादी पार्टी उसे भारतीय जनता पार्टी की बी-टीम करार देने लगती है। उन्होंने कहा कि अब समय बदल चुका है और मुस्लिम समाज केवल दरी बिछाने या चुनाव में किसी परिवार को जिताने के लिए वोट नहीं देगा। अब अब्दुल भी सत्ता की मुख्यधारा में सम्मानजनक कुर्सी पर बैठेगा।
सहयोगियों का समर्थन और गठबंधन में सीट शेयरिंग की खींचतान
असदुद्दीन ओवैसी के इस रुख का समर्थन उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओपी राजभर ने भी किया। आजमगढ़ में होने वाली अपनी रैली से पूर्व उन्होंने बयान दिया कि ओवैसी की बातें पूरी तरह तर्कसंगत हैं। राजभर ने अखिलेश यादव को चुनौती दी कि यदि वे वास्तव में पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हितैषी हैं, तो घोषणा करें कि सपा की सरकार बनने पर किसी मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।
वहीं दूसरी तरफ, इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश में अल्पसंख्यक समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती से खड़ी है और ओवैसी को इस समाज को असहाय दिखाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा, आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने भी गठबंधन की राजनीति को लेकर अखिलेश यादव पर दबाव बना दिया है। चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी को रोकने के लिए भीम आर्मी और अन्य सहयोगी दलों को सम्मानजनक सीटें देनी होंगी, अन्यथा वोटों के ध्रुवीकरण और बिखराव के लिए केवल समाजवादी पार्टी ही जिम्मेदार होगी।























