नीलगिरी जिले के गुडलूर में इंसानी बस्तियों और खेतों में लगातार घुस रहे एक बाघ को पकड़ने के लिए तमिलनाडु वन विभाग ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। यह बाघ गुडलूर वन रेंज के नंबलाकोट्टई इलाके के पास विमलागिरी में घूमता देखा जा रहा है और लगातार मवेशियों पर हमला कर रहा है, जिससे इलाके के लोग दहशत में हैं।
विमलागिरी में दिनदहाड़े बस्तियों में घुसपैठ
वन विभाग के मुताबिक यह बाघ सिर्फ रात में ही नहीं, बल्कि दिन के उजाले में भी आबादी वाले इलाकों में घुस आ रहा है। इसने मक्कामूला, अंबालाकाडु और विमलागिरी गांवों में कई मवेशियों को मार डाला है। यही नहीं, बाघ को एक प्राइमरी स्कूल के आसपास भी देखा गया है, जिसने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक हफ्ते में स्थानीय लोगों ने बस्तियों में घूमते बाघ की तस्वीरें भी शेयर कीं और वन विभाग से तुरंत कार्रवाई की मांग की।
इसे काबू में करने के लिए वन विभाग ने रणनीतिक जगहों पर दो पिंजरे लगाए हैं, जबकि बाघ की हर हरकत पर नजर रखने के लिए 25 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। इंसानों और बाघ के बीच सीधी टक्कर न हो, इसके लिए अतिरिक्त वनकर्मियों को भी मौके पर तैनात किया गया है।
क्या यह वही आदमखोर बाघ है? वन विभाग ने किया साफ
बाघ को लेकर लोगों में एक बड़ा डर यह भी है कि कहीं यह वही जानवर तो नहीं जिस पर ओ-वैली वन रेंज के लॉरिस्टन इलाके में दो लोगों की मौत का शक है। लेकिन अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि विमलागिरी में घूम रहा बाघ, ओ-वैली वाले संदिग्ध आदमखोर बाघ से अलग है। मुख्य वन्यजीव वार्डन राकेश कुमार डोगरा ने दोनों बाघों को पकड़ने के लिए अलग-अलग अनुमति जारी की है, यानी दोनों जगहों पर एक साथ लेकिन स्वतंत्र रूप से पकड़ने का अभियान चल रहा है।
ओ-वैली में संदिग्ध आदमखोर बाघ की तलाश में जुटे वनकर्मियों को स्थानीय लोगों से बाघ की मौजूदगी की सूचना मिली, लेकिन वे यह पक्के तौर पर तय नहीं कर पाए कि यह वही जानवर है जिसने घातक हमले किए थे। गुडलूर के मंडल वन अधिकारी पी. देवराज ने बताया कि टीम को बाघ की सिर्फ आंशिक झलक मिली, उससे पहले ही वह चट्टानों के बीच गायब हो गया।
कम जंगल, ज्यादा आबादी, बढ़ा टकराव का खतरा
पी. देवराज ने बताया कि विभाग ने बिना देरी किए यह अभियान इसलिए शुरू किया क्योंकि विमलागिरी में जंगल का दायरा बेहद कम है। यहां ज्यादातर हिस्सा रिहायशी बस्तियों, खेती की जमीन और छोटे-छोटे कॉफी और चाय के बागानों से घिरा है, जिसकी वजह से बाघ के इंसानों के सामने आने की आशंका कहीं ज्यादा बढ़ जाती है।
अधिकारियों के मुताबिक पशु चिकित्सक मौका मिलते ही बाघ को बेहोश करने की कोशिश कर सकते हैं, बशर्ते उसकी लोकेशन और हालात इसकी सुरक्षित इजाजत दें। यह भी पूरी संभावना जताई जा रही है कि बाघ मुदुमलाई टाइगर रिजर्व की तरफ रुख कर सकता है, जो हवाई दूरी से महज पांच किलोमीटर से भी कम फासले पर है।
किसानों को सतर्क रहने की सलाह
वन विभाग ने आसपास के किसानों को साफ हिदायत दी है कि वे अपने मवेशियों को चरने के लिए खुला न छोड़ें। खासतौर पर उस वक्त जब बाघ के इलाके में मौजूद होने की आशंका हो, तब जानवरों को सुरक्षित शेड के भीतर ही रखा जाए। फिलहाल विमलागिरी और ओ-वैली, दोनों जगहों पर निगरानी अभियान लगातार जारी है और वन विभाग की टीमें स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए दोनों बाघों की पहचान कर उन्हें पकड़ने में जुटी हैं।


















