अंबाला शहर के मंडोर इलाके में बना डेयरी परिसर आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। यहां रहने वाले पशुपालकों का कहना है कि करीब डेढ़ से दो दशक पहले जब शहर की डेयरियों को इस जगह पर बसाया गया था, तब प्रशासन ने कई सुविधाएं देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन वह वादा आज तक पूरी तरह पूरा नहीं हुआ। हल्की सी बारिश होते ही परिसर की गलियां तालाब जैसी दिखने लगती हैं और पशुपालकों को गंदे पानी के बीच से गुजरकर आना-जाना पड़ता है।
150 प्लॉट से घटकर सिर्फ 35 डेयरियां
पशुपालक हनी के अनुसार, इस परिसर में शुरुआत में करीब 150 प्लॉट डेयरी संचालकों को दिए गए थे। लेकिन बदइंतजामी और लगातार बढ़ती दिक्कतों के चलते धीरे-धीरे लोग यहां से पलायन करते गए। हनी बताते हैं कि अब यहां मुश्किल से 35 डेयरियां ही बची हैं, बाकी पशुपालक या तो वापस अपने गांवों में लौट गए या उन्होंने डेयरी का व्यवसाय ही छोड़ दिया। हनी खुद पिछले 16 साल से यहीं डेयरी चला रहे हैं और उनका कहना है कि जब से यह परिसर बना है, पानी की सही निकासी कभी हो ही नहीं पाई। इलाके में अब तक कोई बड़ा और पक्का नाला नहीं बनाया गया, जिस वजह से बारिश का पानी और रोजमर्रा का गंदा पानी मुख्य रास्तों पर ही जमा रहता है और आगे बह नहीं पाता। सड़कों पर गोबर और कीचड़ फैला रहता है, जिससे आने-जाने में दिक्कत तो होती ही है, साथ ही पशुओं के इसी गंदगी की वजह से बीमार पड़ने का डर भी बना रहता है।
जलभराव से पशुओं में संक्रमण का खतरा
पशुपालक रामकुमार बताते हैं कि परिसर में सफाई व्यवस्था बेहद लचर है। लगातार जमा रहने वाले पानी और गंदगी की वजह से पशुओं में संक्रमण और अन्य बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है, जिससे उनके इलाज का बोझ भी बढ़ता जाता है। रामकुमार के मुताबिक सड़कों की हालत भी बेहद खस्ता है, गंदा पानी सड़क पर टिका रहता है और लोगों को इसे लांघकर ही हर बार शहर आना-जाना पड़ता है। उनके मुताबिक बीते करीब दो दशक से यह मांग उठाई जा रही है, फिर भी समस्या का कोई स्थायी हल अब तक नहीं निकल पाया।
डॉक्टर की मनमानी फीस, रात में अंधेरा भी परेशानी
पशुपालक दिनेश का कहना है कि खराब रास्तों और गंदगी की वजह से पशु चिकित्सक भी बीमार पशु को देखने आने से कतराते हैं। उनका आरोप है कि इसके चलते डॉक्टर एक बार दिखाने के लिए करीब एक हजार रुपये तक ले लेते हैं। दिक्कतें सिर्फ पानी और सफाई तक सीमित नहीं हैं, परिसर में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी बदहाल है और सूरज ढलते ही ज्यादातर हिस्सों में अंधेरा छा जाता है। इस अंधेरे और गंदगी के चलते यहां काम करने वाले कर्मचारियों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है, और रात के समय पशुओं का ध्यान रखना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाता है।
प्रशासन से पक्का नाला बनाने की मांग
पशुपालकों ने साफ कहा है कि नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को अब ठोस कदम उठाने चाहिए। उनकी पहली प्राथमिकता जलनिकासी के लिए स्थायी नाला बनवाना है, इसके अलावा उखड़ी सड़कों को दुरुस्त करना, नियमित सफाई अभियान चलाना और परिसर की स्ट्रीट लाइट्स को चालू कराना भी उनकी मांगों की सूची में शामिल है, ताकि यहां बची हुई डेयरियों को हर बरसात में एक जैसी परेशानी का सामना न करना पड़े।


















