पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां दो अलग-अलग महिलाओं का नाम भी एक जैसा निकला और उनका आधार नंबर भी अंक-दर-अंक एक समान बताया जा रहा है। नतीजा यह हुआ कि एक महिला खुद अपने आधार कार्ड और फिंगरप्रिंट के सहारे बैंकिंग सेवा केंद्र गई, लेकिन रकम कट गई दूसरी महिला के खाते से, जिसका नाम भी संयोग से वही निकला। यह पूरा मामला खंडघोष ब्लॉक के बादुलिया गांव और रायना-1 ब्लॉक स्थित पलाशन इलाके से जुड़ा है, जहां दोनों महिलाओं का नाम झर्णा दास है।
कैसे पकड़ में आई यह गड़बड़ी
पलाशन गांव में रहने वाली झर्णा दास 10 जुलाई को अपना आधार कार्ड लेकर स्थानीय बाजार में मौजूद साबिर मोबाइल प्वाइंट के ग्राहक सेवा केंद्र यानी सीएसपी पहुंची थीं। वहां उन्होंने अपने आधार नंबर और फिंगरप्रिंट के इस्तेमाल से 10, 11 और 12 जुलाई के तीन दिनों में मिलाकर 27 हजार रुपये निकाले। इसके करीब तीन हफ्ते बाद, 3 अगस्त को भारतीय रिजर्व बैंक ने इसी सीएसपी का खाता अचानक निलंबित कर दिया। यह सूचना मिलते ही सीएसपी चलाने वाले शेख जाहिरुल हरकत में आ गए और उन्होंने बैंक अधिकारियों के साथ-साथ अपनी कंपनी से भी संपर्क किया। पड़ताल में उन्हें पता चला कि उनके केंद्र के जरिए 27 हजार रुपये की एक गड़बड़ी हुई है, जिसके चलते खाता रोका गया।
पहले तो निकासी सही ठहराई गई
इसके बाद जाहिरुल ने सीधे पलाशन की झर्णा दास से संपर्क साधा। महिला ने साफ कहा कि वह खुद सीएसपी पहुंची थीं और अपने ही आधार व फिंगरप्रिंट का उपयोग कर रकम निकाली थी, यानी किसी गलत इंसान को पैसा नहीं गया था। लेकिन पड़ताल यहीं नहीं रुकी। आगे की जांच में सामने आया कि ठीक इतनी ही यानी 27 हजार रुपये की रकम खंडघोष के बादुलिया गांव में रहने वाली एक और झर्णा दास के बैंक खाते से भी उसी सीएसपी के रिकॉर्ड में कटी दिख रही थी। एक ही ट्रांजैक्शन दो अलग-अलग महिलाओं के खातों से जुड़ गया, जिसने सबको चौंका दिया।
आधार नंबर मिलने से बढ़ी उलझन
असल गुत्थी सुलझाने के लिए जाहिरुल बादुलिया स्थित वेस्ट बंगाल ग्रामीण बैंक की शाखा पहुंचे। वहां छानबीन में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि बादुलिया वाली झर्णा दास और पलाशन वाली झर्णा दास, दोनों का बारह अंकों का आधार नंबर पूरी तरह एक जैसा है। सीएसपी यानी ग्राहक सेवा केंद्र वह जगह होती है जहां गांव-कस्बों में बैंकिंग एजेंट आधार और फिंगरप्रिंट के सहारे ग्राहकों को नकद निकासी व जमा जैसी सुविधाएं देते हैं, और यह पूरा सिस्टम इसी भरोसे पर टिका होता है कि हर व्यक्ति का आधार नंबर व फिंगरप्रिंट अनोखा होता है। एक ही नाम और एक जैसा आधार नंबर दो अलग-अलग नागरिकों के पास आखिर कैसे पहुंचा, इसे लेकर अब तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे चिंता की बात यह रही कि बायोमेट्रिक सत्यापन जैसा सुरक्षा कवच मौजूद होने के बावजूद एक महिला के फिंगरप्रिंट पर दूसरी महिला के खाते से पैसा निकल गया, जिसने सीएसपी के जरिए होने वाले पूरे लेनदेन तंत्र पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।
बैंक पहुंचकर आपस में सुलझाया मामला
दोनों महिलाओं को जब यह पूरी स्थिति बताई गई, तो 3 सितंबर को दोनों झर्णा दास एक साथ वेस्ट बंगाल ग्रामीण बैंक की बादुलिया शाखा पहुंचीं। वहां आपसी बातचीत के बाद विवाद शांति से सुलझा लिया गया और पलाशन वाली झर्णा दास ने बादुलिया वाली झर्णा दास के खाते में 27 हजार रुपये वापस जमा करा दिए। फिलहाल पैसों का हिसाब तो बराबर हो गया है, लेकिन इलाके में यह चर्चा थमी नहीं है कि आखिर दो अलग-अलग महिलाओं को एक जैसा आधार नंबर कैसे मिल गया और बायोमेट्रिक मिलान के बावजूद यह चूक कैसे हो गई। इन सवालों का ठोस जवाब अब तक सामने नहीं आया है।


















