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नीट विरोध प्रदर्शनों की एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तुषार मेहता से मांगी श्रेणीबद्ध सूचीभारत
18 अग॰ 2026, 1:56 pm (44 दिन पहले)· 2

नीट विरोध प्रदर्शनों की एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तुषार मेहता से मांगी श्रेणीबद्ध सूची

नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में दर्ज एफआईआर की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्ट सूची मांगी है।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान कथित पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकियों (FIR) से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस देखने को मिली। सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत की पीठ के प्रमुख CJI सूर्यकांत ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को एक सुव्यवस्थित और स्पष्ट सूची सौंपने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि बिना किसी ठोस आधार और मामलों के वर्गीकरण के कोई भी न्यायिक आदेश जारी करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

होमवर्क में कमी पर शीर्ष अदालत ने जताया ऐतराज

मामले की सुनवाई करते हुए CJI सूर्यकांत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की ओर से प्राथमिकियों की पहचान का काम पहले ही पूरा कर लिया जाना चाहिए था। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्र को कम से कम इतना बुनियादी अभ्यास करना चाहिए था कि किन मामलों को आगे चलाया जाना आवश्यक है और किन्हें समाप्त किया जा सकता है। पीठ ने जोर देकर कहा कि जब तक सरकार उन प्राथमिकियों का स्पष्ट ब्योरा पेश नहीं करती जिन पर कार्रवाई जारी रखनी है, तब तक अदालत के लिए कोई भी आदेश पारित करना केवल एक सैद्धांतिक कवायद बनकर रह जाएगा।

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सॉलिसिटर जनरल ने अज्ञात आरोपियों से जुड़ी चुनौतियां गिनाईं

सुप्रीम कोर्ट के सवालों का जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को प्रशासनिक और कानूनी जटिलताओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनों के दौरान दर्ज की गई कई प्राथमिकियां अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ हैं। केवल प्राथमिकियों की संख्या या सूची देख लेने मात्र से यह तय कर पाना कठिन है कि कौन से लोग केवल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थे और किन तत्वों ने प्रदर्शनकारियों की आड़ लेकर गंभीर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया। सॉलिसिटर जनरल ने शीर्ष अदालत को आश्वस्त किया कि वे दर्ज सभी मामलों की गहन जांच करेंगे और जल्द ही एक विश्लेषणात्मक सूची तैयार करके अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

अनुच्छेद 142 के तहत राहत और गंभीर मामलों में सख्ती

प्रकरण में पूर्व की कार्यवाहियों का उल्लेख करते हुए अदालत ने पुनः संकेत दिया कि प्रदर्शनों में शामिल निर्दोष छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्रदत्त असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए रद्द किया जा सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि जिन लोगों के खिलाफ गंभीर आपराधिक कृत्यों के आरोप हैं, उन्हें छात्रों के समान रियायत नहीं दी जाएगी। अदालत ऐसे असामाजिक तत्वों और सामान्य छात्र प्रदर्शनकारियों के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचकर ही अंतिम निर्णय सुनाएगी।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल से क्या मांगा है?
सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से उन प्राथमिकियों (FIR) की एक स्पष्ट और श्रेणीबद्ध सूची मांगी है जिनमें सरकार आगे कार्रवाई जारी रखना चाहती है।
CJI सूर्यकांत ने केंद्र सरकार की दलीलों पर क्या टिप्पणी की?
CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि सरकार को बुनियादी होमवर्क करके प्राथमिकियों की पहचान करनी चाहिए थी, क्योंकि सूची के बिना कोई भी आदेश देना केवल सैद्धांतिक रहेगा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या कठिनाई बताई?
सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि कई प्राथमिकियां अज्ञात लोगों के नाम पर दर्ज हैं, जिससे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और गंभीर अपराध करने वाले उपद्रवियों में अंतर करना मुश्किल हो रहा है।
छात्रों के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने किस संवैधानिक प्रावधान का उल्लेख किया?
अदालत ने संकेत दिया कि केवल छात्रों के शामिल होने वाले मामलों को समाप्त करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग किया जा सकता है।
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