नोएडा और देश की राजधानी के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों कामकाजी लोगों के लिए सफर का अनुभव अक्सर परेशानी भरा साबित हो रहा है। सीमा से जुड़े दोनों शहरों के बीच आवागमन के लिए विस्तृत सड़क नेटवर्क तैयार किया गया था, मगर एक विशिष्ट दो किलोमीटर का गलियारा यात्रियों के समय और ईंधन दोनों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। चौड़ी खुली सड़क पर तेज गति से दौड़ती गाड़ियां जैसे ही एक खास मोड़ पर पहुंचती हैं, वहां मार्ग का स्वरूप सिकुड़ जाता है। गति की यही अचानक रुकावट पूरे मार्ग पर वाहनों की बेहद लंबी कतारों की वजह बन जाती है।
क्षमता से तीन गुना अधिक गाड़ियों का निरंतर दबाव
इस पूरे मार्ग के बुनियादी ढांचे को जब तैयार किया गया था, तब इसका प्रारूप रोजाना केवल 1.50 लाख वाहनों के सुरक्षित और सुगम आवागमन को ध्यान में रखकर गढ़ा गया था। इसके विपरीत, वर्तमान समय में नोएडा ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक इस स्ट्रेच से हर दिन करीब 4.50 लाख वाहन गुजरते हैं। इसके अलावा सीमावर्ती इलाकों की बात करें तो चिल्ला बॉर्डर पर प्रतिदिन लगभग 3.50 लाख तथा डीएनडी बॉर्डर पर करीब 4 लाख वाहनों की भारी आवाजाही दर्ज की जा रही है। शहर के रिहायशी और व्यावसायिक विस्तार ने इस दबाव को कई गुना बढ़ा दिया है। खासतौर पर सेक्टर 105, 108, 110, 128, 132, 134, 135 और 150 जैसे नए रिहायशी और कॉरपोरेट हब बनने के बाद निजी वाहनों और कैब की तादाद अप्रत्याशित रूप से बढ़ चुकी है।
चौड़ी सड़क का अचानक संकरी गलियों में तब्दील होना
शुरुआती सफर के दौरान ज्यादातर हिस्सों में चार लेन की मुख्य सड़क के साथ-साथ दोनों किनारों पर सर्विस लेन होने के कारण गाड़ियां सामान्य गति से आगे बढ़ती रहती हैं। आगे चलकर जब सेक्टर 37 तथा कालिंदी कुंज से आने वाला वाहनों का प्रवाह इसमें शामिल होता है, तो सड़क का विस्तार छह लेन तक हो जाता है। वास्तविक संकट इसके तुरंत बाद उत्पन्न होता है, जहां सड़क की चौड़ाई अचानक घटने लगती है। राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल के गेट नंबर 2 के नजदीक पहुंचते ही छह लेन वाला यह रास्ता सिमटकर चार लेन का रह जाता है। इसके कुछ ही फासले पर जब गाड़ियां फिल्म सिटी फ्लाईओवर के करीब पहुंचती हैं, तो यह और संकरा होकर केवल तीन लेन में तब्दील हो जाता है।
सड़क संगम पर लेनों का अत्यधिक दबाव
फिल्म सिटी फ्लाईओवर के पास केवल तीन लेन शेष रह जाने की इस विकट स्थिति के बीच एक और बड़ा व्यवधान जुड़ जाता है। इसी संकरे स्थान पर सेक्टर 62-18 एलिवेटेड रोड से नीचे उतरने वाला तीन लेन का अतिरिक्त ट्रैफिक भी सीधे मुख्य मार्ग में समाहित होने लगता है। दो अलग-अलग दिशाओं से आने वाला भारी ट्रैफिक जब एक ही संकरे मुहाने पर मिलता है, तो वहां आगे बढ़ने के लिए जगह ही खत्म हो जाती है। इसके चलते फिल्म सिटी फ्लाईओवर से पीछे की तरफ सेक्टर 126 स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी तक लगभग चार किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लग जाना आम दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। बरसात के मौसम में यह धीमी गति कई बार पूरी तरह ठप पड़ जाती है और जाम कई किलोमीटर दूर तक फैल जाता है।
अवैध पार्किंग और निगरानी के सीमित परिणाम
स्थिति को काबू में रखने के लिए यातायात पुलिस अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती करती है और रुक-रुक कर गाड़ियों को निकालने वाली व्यवस्था अपनाती है। इसके अतिरिक्त फिल्म सिटी फ्लाईओवर पर बैरिकेडिंग के कारण दो लेन बंद रहती हैं। राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल के टिकट काउंटर के निकट खड़े होने वाले अनाधिकृत वाहन और चालकों द्वारा लेन अनुशासन का पालन न करना स्थिति को और अधिक उलझा देता है। व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से लेन नियमों के उल्लंघन पर चालान काटने की कार्रवाई भी शुरू की गई है, मगर भौतिक जगह की भारी कमी के सामने ये प्रशासनिक कदम नाकाफी साबित हो रहे हैं।
अधूरी परियोजनाएं और राहत की भावी उम्मीदें
जाम से निजात दिलाने के लिए पहले भी कई विकल्पों पर विचार किया गया था। जून 2025 में नोएडा प्राधिकरण की ओर से सेक्टर 95 से डीएनडी तक 600 मीटर नई सड़क निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया था, परंतु वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलने के चलते उसे रद्द करना पड़ा। वर्तमान में यातायात विश्लेषक छह लेन वाली चिल्ला एलिवेटेड रोड परियोजना को ही स्थायी समाधान मान रहे हैं। 893 करोड़ रुपये की लागत वाली यह अहम परियोजना वर्ष 2019 में आरंभ की गई थी, लेकिन गैस पाइपलाइन विस्थापन तथा महामारी के दौर जैसी बाधाओं के चलते इसका कार्य लंबा खिंच गया। मौजूदा समय में इस परियोजना का 47 प्रतिशत निर्माण कार्य संपन्न हो चुका है और इसे पूरा करने की नई समयसीमा जुलाई 2027 निर्धारित की गई है। इस एलिवेटेड सड़क के संचालन में आने के बाद ही मुख्य कैरिजवे पर गाड़ियों का बोझ कम होने की ठोस आशा है।



















