असम प्रशासन में मंत्रियों और स्थानीय विधायकों के बीच बेहतर कामकाजी तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को सभी मंत्रियों को एक औपचारिक संवाद भेजकर स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे अपने फील्ड दौरों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और आधिकारिक गतिविधियों के बारे में संबंधित विधानसभा क्षेत्र के विधायकों को पहले से सूचित करें। यह कदम उन स्थितियों को समाप्त करने के लिए उठाया गया है जहां मंत्रियों के दौरों की जानकारी स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों को नहीं मिल पा रही थी।
विधायकों को अनदेखा करने पर मुख्यमंत्री ने जताई असंतोष
जारी किए गए आधिकारिक पत्र में मुख्यमंत्री ने इस बात पर असंतोष व्यक्त किया कि कई निर्वाचन क्षेत्रों के विधायकों को उनके इलाके में होने वाले मंत्री स्तरीय दौरों और सरकारी आयोजनों की समय पर जानकारी नहीं दी जा रही थी। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कुछ मंत्रियों ने स्थानीय विधायकों को भरोसे में लिए बिना अथवा उन्हें शामिल किए बिना ही कई इलाकों का दौरा पूरा कर लिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की इस प्रकार की अनदेखी प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से उचित नहीं है।
सार्वजनिक आयोजनों में आमंत्रण और शिष्टाचार सूचना का नियम
मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को परामर्श दिया कि वे अपने दौरों की पूर्व सूचना संबंधित विधायकों को अवश्य भेजें। इसके साथ ही विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित होने वाले सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों और सरकारी समारोहों में स्थानीय विधायकों को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया जाना चाहिए। निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी विभागीय बैठक या आंतरिक समीक्षा सत्र में विधायकों की प्रत्यक्ष भागीदारी आवश्यक न भी हो, तब भी शिष्टाचार के नाते उन्हें इन गतिविधियों की जानकारी पहले ही दे दी जानी चाहिए ताकि वे अपने क्षेत्र में प्रशासनिक हलचलों से पूरी तरह अवगत रहें।
निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर बेहतर तालमेल का लक्ष्य
इस नई व्यवस्था को लागू करने के पीछे का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार के मंत्रियों और स्थानीय स्तर पर जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों के बीच परस्पर समन्वय को मजबूत बनाना है। मुख्यमंत्री का मानना है कि इस व्यवस्था के पालन से सरकारी दौरों और आधिकारिक आयोजनों का संचालन अधिक सुचारू और प्रभावी ढंग से हो सकेगा। खासकर निर्वाचन क्षेत्र के स्तर पर जब मंत्री और विधायक मिलकर काम करेंगे, तो सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की निगरानी अधिक पारदर्शी तरीके से की जा सकेगी।



















