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ओडिशा के 6 जिलों में सरकारी जमीन पर अवैध गांजा खेती के खिलाफ सख्त आदेश, दोषी अफसरों पर भी गिरेगी गाजओडिशा
14 अग॰ 2026, 8:33 pm (2 दिन पहले)· 4

ओडिशा के 6 जिलों में सरकारी जमीन पर अवैध गांजा खेती के खिलाफ सख्त आदेश, दोषी अफसरों पर भी गिरेगी गाज

ओडिशा सरकार ने 6 जिलों में सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से गांजा उगाने वालों और माफिया की मदद करने वाले या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी जारी की है।

ओडिशा में सरकारी भूखंडों का दुरुपयोग कर अवैध रूप से गांजे की फसल उगाने वालों के खिलाफ राज्य प्रशासन ने आक्रामक रुख अपना लिया है। राज्य सरकार की ओर से जारी एक कड़े दिशा-निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी संपत्ति पर किसी भी प्रकार की नशीले पदार्थों की खेती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस अवैध गतिविधि पर पूरी तरह रोक लगाने के उद्देश्य से राज्य के 6 चिन्हित जिलों में जमीन की निगरानी व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से कड़ा करने के निर्देश दिए गए हैं।

6 संवेदनशील जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र जारी

राजस्व विभाग के सचिव ने राज्य के 6 प्रमुख जिलों के जिलाधिकारियों को आधिकारिक पत्र प्रेषित कर इस विषय में तत्काल और प्रभावी कदम उठाने को कहा है। जिन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने का आदेश जारी हुआ है, उनमें मलकानगिरी, कोरापुट, रायगड़ा, कंधमाल, बौध और गजपति जिले शामिल हैं। इन जिलों के प्रशासनिक प्रमुखों को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आने वाली हर सरकारी भूमि की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने और अवैध खेती की सूचना मिलते ही संबंधित एजेंसियों को सतर्क करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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तहसीलदार और राजस्व निरीक्षकों को सौंपी गई निगरानी की जिम्मेदारी

अवैध खेती की पहचान करने के लिए निचले स्तर के प्रशासनिक अमले को सीधे तौर पर जवाबदेह बनाया गया है। सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, सभी संबंधित क्षेत्रों के तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और राजस्व निरीक्षकों को अपने इलाकों में मौजूद सरकारी जमीनों की गहन जांच करने को कहा गया है। यह प्रशासनिक दल यह सुनिश्चित करेगा कि दूरदराज या सुनसान इलाकों में स्थित सरकारी जमीन पर गांजे के पौधे न उगाए जा रहे हों।

पुलिस और एसटीएफ के साथ त्वरित सूचना साझाकरण

सरकारी जमीन पर अवैध रूप से उगाए गए गांजे की फसल का पता चलते ही त्वरित कार्रवाई के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली तय की गई है। जैसे ही राजस्व अमले को ऐसी किसी खेती की जानकारी मिलेगी, उन्हें बिना किसी विलंब के स्थानीय पुलिस थाने में मामले की औपचारिक सूचना दर्ज करानी होगी। इसके साथ ही, इस घटना की विस्तृत जानकारी विशेष कार्यबल (STF) और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को भी तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। राजस्व विभाग और पुलिस बल के बीच इस बेहतर तालमेल का मुख्य उद्देश्य सूचना मिलने और मौके पर कार्रवाई करने के बीच के समय को न्यूनतम करना है।

माफिया की मदद या लापरवाही पर अफसरों पर होगी कार्रवाई

सरकार ने इस अभियान में केवल अवैध खेती में शामिल तत्वों या गांजा माफिया को ही निशाना नहीं बनाया है, बल्कि प्रशासनिक अमले की जवाबदेही भी तय की है। राजस्व सचिव ने चेतावनी दी है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी जानबूझकर गांजा माफिया का सहयोग करता पाया गया या उसने अवैध खेती की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई करने में ढिलाई बरती, तो उसके खिलाफ अत्यंत कठोर अनुशासनिक और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इन कड़े निर्देशों के लागू होने के बाद सभी 6 जिलों में सरकारी भूखंडों का सर्वेक्षण और निगरानी तंत्र सक्रिय कर दिया गया है।

सवाल-जवाब

ओडिशा सरकार ने किन 6 जिलों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं?
सरकार ने मलकानगिरी, कोरापुट, रायगड़ा, कंधमाल, बौध और गजपति जिलों में सरकारी जमीन पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी जमीन पर गांजा खेती की सूचना किन एजेंसियों को देनी होगी?
गांजा खेती की जानकारी मिलने पर अधिकारियों को तुरंत स्थानीय पुलिस थाने, एसटीएफ (STF) और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को सूचित करना होगा।
निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी किन अधिकारियों को सौंपी गई है?
जमीन की निगरानी और अवैध खेती की पहचान की मुख्य जिम्मेदारी तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और राजस्व निरीक्षकों को दी गई है।
अवैध खेती में मदद या लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
यदि कोई अधिकारी गांजा माफिया की मदद करता है या जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई नहीं करता, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·1 दिन पहले

ओडिशा सरकार का यह कदम केवल एक स्थानीय प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह संगठित अपराध और नशीले पदार्थों के अवैध नेटवर्क पर लगाम कसने के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव है। जमीनी स्तर के अधिकारियों को सीधे जवाबदेह बनाकर और विशेष कार्यबल के साथ त्वरित सूचना साझा करने की प्रणाली स्थापित करके, राज्य ने यह संकेत दिया है कि आंतरिक मिलीभगत को अब बिल्कुल सहन नहीं किया जाएगा। यदि यह बहु-स्तरीय निगरानी प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने और नार्को-सिंडिकेट्स को नेस्तनाबूद करने का एक कड़ा मॉडल बन सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

ओडिशा सरकार का यह कदम केवल एक कृषि अपराध के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का एक बड़ा उदाहरण है। मलकानगिरी से लेकर गजपति तक के छह संवेदनशील जिलों में राजस्व और पुलिस तंत्र के बीच समन्वय को मजबूत करना और स्थानीय अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराना इस बात का संकेत है कि नेक्सस को तोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर सिस्टम को दुरुस्त करना अनिवार्य हो गया है। भविष्य में यह नीति अन्य राज्यों के लिए भी प्रशासनिक सुधार और नार्कोटिक्स नियंत्रण का एक मॉडल बन सकती है।

Amit Patel@amit-patel·1 दिन पहले

अमित पटेल का मानना है कि राजस्व विभाग और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के बीच सीधा समन्वय स्थापित होने से न केवल आपूर्ति श्रृंखला पर अंकुश लगेगा, बल्कि अवैध वित्तीय नेटवर्क को भी तोड़ा जा सकेगा। जब स्थानीय स्तर पर तहसीलदार और राजस्व निरीक्षकों की सीधी जवाबदेही तय होती है, तो यह प्रशासनिक सुधार का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनता है, जिसका सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता पर पड़ेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

यह प्रशासनिक कदम केवल गांजा माफिया के खिलाफ नहीं, बल्कि अंदरूनी मिलीभगत पर करारा प्रहार है। जब तक तहसीलदार और राजस्व निरीक्षकों की जवाबदेही तय कर उन्हें पुलिस और एसटीएफ से सीधे नहीं जोड़ा जाता, तब तक रिमोट इलाकों में ऐसी खेती रोकना मुश्किल था। अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन इन छह संवेदनशील जिलों में केवल नोटिस तक सीमित रहता है या भ्रष्ट अधिकारियों पर बर्खास्तगी जैसी वास्तविक कानूनी कार्रवाई भी होती है।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

यह प्रशासनिक सख्ती वित्तीय और आर्थिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अवैध ड्रग्स से जुड़ा काला धन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के समानांतर एक अनियोजित समानांतर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है। जब तक मलकानगिरी, कोरापुट और कंधमाल जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में जमीन की डिजिटल मैपिंग और वित्तीय लेन-देन की कड़ी निगरानी नहीं की जाती, तब तक माफिया नेटवर्क अपनी जड़ें मजबूत बनाए रखेगा। प्रशासनिक जवाबदेही तय होना सही दिशा में कदम है, लेकिन यदि संलिप्त अधिकारियों की संपत्ति की जब्ती जैसी वित्तीय कार्रवाई नहीं की गई, तो इस अभियान का प्रभाव लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा।

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