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ओडिशा के भद्रक में मिले लावारिस बच्चे को मिला गोवा का परिवार, अब साईं विजयनाथ के नाम से होगी पहचानभारत
23 जुल॰ 2026, 1:41 am (45 दिन पहले)· 3

ओडिशा के भद्रक में मिले लावारिस बच्चे को मिला गोवा का परिवार, अब साईं विजयनाथ के नाम से होगी पहचान

भद्रक रेलवे स्टेशन पर साल 2023 में लावारिस हालत में मिले आठ वर्षीय मासूम को तीन साल के लंबे प्रशासनिक प्रयास के बाद एक नया घर मिल गया है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद गोवा के एक दंपत्ति ने उसे गोद लिया है और अब उसे ‘साईं विजयनाथ’ का नया नाम मिला है।

साल 2023 में ओडिशा राज्य के भद्रक रेलवे स्टेशन पर एक आठ वर्षीय बच्चा पूरी तरह से लावारिस अवस्था में मिला था। उस समय इस बच्चे का न तो कोई ज्ञात नाम था और न ही कोई पहचान पत्र मौजूद था। करीब तीन साल के लंबे और जटिल प्रशासनिक इंतजार के बाद अब इस मासूम के जीवन में एक बड़ा बदलाव आया है। इतने वर्षों की कानूनी प्रक्रिया और खोजबीन के बाद अंततः गोवा के एक दंपत्ति ने उसे अपना लिया है। इस नई शुरुआत के साथ ही इस बच्चे को ‘साईं विजयनाथ’ के रूप में एक बिल्कुल नई पहचान भी मिल गई है।

स्टेशन पर बेसहारा मिलने की घटना

जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह मामला साल 2023 का है। उस वक्त यह आठ वर्षीय मासूम भद्रक रेलवे स्टेशन पर लावारिस हालत में पाया गया था। जब अधिकारियों ने उसे देखा, तो वह एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के पास बैठा हुआ था। इस स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने तुरंत पूछताछ शुरू की। हालांकि इस प्रारंभिक जांच में न तो वह मासूम बच्चा और न ही वह ट्रांसजेंडर व्यक्ति उसके घर, परिवार या माता-पिता के बारे में कोई भी ठोस जानकारी दे सके। इस निराशाजनक स्थिति के बाद बाल कल्याण समिति (CWC) ने तत्काल कदम उठाया। समिति ने अपनी ओर से इस बेसहारा बच्चे का नाम ‘शुभम’ रखा और उसे कांजियापाल इलाके में स्थित महापुरुष आश्रम में रहने के लिए भेज दिया। इस आश्रम में पहले से ही कई अनाथ बच्चे रह रहे थे, जिनके बीच उसने अपने दिन बिताने शुरू किए।

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परिवार की तलाश में चला लंबा अभियान

बच्चे को सुरक्षित आश्रम में भेजने के बाद जिला प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी खत्म नहीं मानी। अधिकारियों ने उसके असली माता-पिता और जैविक परिवार का पता लगाने के लिए एक सघन अभियान शुरू किया। इसके तहत हर संभव सरकारी और सार्वजनिक प्रयास किए गए। प्रशासन की तरफ से स्थानीय अखबारों में बच्चे की तस्वीरें और विवरण प्रकाशित करवाए गए। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी व्यापक रूप से उपयोग किया गया ताकि बच्चे की जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके। प्रशासन को उम्मीद थी कि कोई न कोई व्यक्ति उसकी पहचान कर लेगा, लेकिन महीनों तक चले इस लंबे अभियान के बावजूद कोई भी शख्स उसके परिवार से जुड़ी कोई भी जानकारी लेकर अधिकारियों के सामने नहीं आया।

कानूनी प्रक्रिया और नया परिवार

जब जैविक परिवार को खोजने की तमाम कोशिशें और इंतजार नाकाम साबित हुए, तो प्रशासन ने बच्चे के सुरक्षित भविष्य के लिए अगला कदम उठाया। कानूनी रूप से बच्चे को गोद देने की प्रक्रिया विधिवत शुरू की गई। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के कड़े नियमों के तहत कई स्तरों पर पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच की गई। इस पारदर्शी और सख्त जांच के बाद गोवा के रहने वाले एम.के. विजयनाथ और गीता विजयनाथ को इस बच्चे के पालन-पोषण के लिए सबसे उपयुक्त माता-पिता के रूप में चुना गया। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि बच्चे को एक सुरक्षित और प्यार करने वाला घर मिले।

अंतिम मंजूरी और नई शुरुआत

गोद लेने की इस पूरी प्रक्रिया को बेहद संवेदनशील तरीके से पूरा किया गया। अंतिम कानूनी मुहर लगने से पहले शुभम ने करीब पंद्रह दिन अपने इन नए माता-पिता के साथ बिताए। इस विशेष समय का उद्देश्य यह था कि बच्चा और दंपत्ति दोनों एक-दूसरे के स्वभाव को समझ सकें और उनके बीच एक भावनात्मक जुड़ाव बन सके। पंद्रह दिन की यह अवधि सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। इस प्रक्रिया के अंतिम चरण में बच्चे और गोवा के दंपत्ति को भद्रक के जिलाधिकारी दिलीप राउत्रे के सामने पेश किया गया। जिलाधिकारी ने सभी दस्तावेजों की जांच के बाद गोद लेने की अंतिम मंजूरी दे दी। इस आधिकारिक मुहर के बाद गोवा के दंपत्ति ने बच्चे का नाम बदलकर ‘साईं विजयनाथ’ रख दिया और अब वह अपने नए परिवार के साथ एक सुरक्षित जीवन की तरफ बढ़ चला है।

सवाल-जवाब

भद्रक स्टेशन पर मिले बच्चे को नया नाम क्या दिया गया है?
गोद लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गोवा के दंपत्ति ने बच्चे का नाम बदलकर ‘साईं विजयनाथ’ रख दिया है।
बाल कल्याण समिति ने शुरुआत में बच्चे का क्या नाम रखा था?
बाल कल्याण समिति (CWC) ने शुरुआत में बच्चे को ‘शुभम’ नाम दिया था और उसे महापुरुष आश्रम में भेज दिया था।
बच्चे को गोद लेने की पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगा?
बच्चा साल 2023 में मिला था, जिसके बाद परिवार खोजने और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने में करीब तीन साल का समय लगा।
गोद लेने की अंतिम मंजूरी किस अधिकारी ने दी?
इस पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप से भद्रक के जिलाधिकारी दिलीप राउत्रे ने अपनी मंजूरी दी।
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