ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में अपनी रणनीतिक चालों में बड़ा बदलाव किया है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के पास पहुंचे ताजा इनपुट के अनुसार, पीओके को पाकिस्तान की मुख्य भूमि से जोड़ने वाले प्रमुख राजमार्गों के किनारे मस्जिदों और बड़े धार्मिक परिसरों का तेजी से निर्माण और विस्तार किया जा रहा है। ये निर्माण कार्य खासकर उन क्षेत्रों में अंजाम दिए जा रहे हैं जो भारत की सीमा और लाइन ऑफ कंट्रोल यानी एलओसी के बेहद करीब स्थित हैं। एजेंसियों ने ऐसे एक दर्जन से ज्यादा स्थानों को चिन्हित किया है जहां इस तरह की संदिग्ध गतिविधियां लगातार चल रही हैं। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन धार्मिक स्थलों के साथ-साथ वहां रणनीतिक रूप से सैन्य ढांचे का भी विकास किया जा रहा है। अधिकारियों को प्रबल आशंका है कि पाकिस्तान भविष्य में इन मस्जिद परिसरों का इस्तेमाल आतंकी संगठनों के लिए सुरक्षित पनाहगाहों और गुप्त ठिकानों के रूप में कर सकता है। यानी अब किसी एक बड़े और केंद्रीय आतंकी अड्डे पर निर्भर रहने के बजाय कई छोटे-छोटे केंद्रों को तैयार करने का नापाक षड्यंत्र रचा जा रहा है।
प्रमुख राजमार्गों पर चल रहा है निर्माण का जाल
खुफिया जानकारियों के मुताबिक, ये निर्माण गतिविधियां उन मुख्य सड़क मार्गों के आसपास देखी गई हैं जो पीओके को पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से आपस में जोड़ती हैं। इन मार्गों में इस्लामाबाद-मुरी-मुजफ्फराबाद रोड से लेकर मुजफ्फराबाद-मानसेहरा-एबटाबाद मार्ग तक के रास्ते शामिल हैं। इनमें से कई सड़कें सीधे तौर पर एलओसी के पास से होकर गुजरती हैं और सामरिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील मानी जाती हैं। अधिकारियों का यह भी आकलन है कि इन परिसरों को इस तकनीकी और सामरिक ढब से विकसित किया जा रहा है जिससे विभिन्न आतंकी संगठन अपने नेटवर्क को अलग-अलग हिस्सों में विभाजित कर सकें। इस विकेंद्रीकृत व्यवस्था के लागू होने से आतंकवादियों को अपने कैडर और रसद को किसी एक जगह पर भारी मात्रा में इकट्ठा करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था, तब उसने पाकिस्तान और पीओके के भीतर मौजूद आतंकी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया था। उसी प्रभावी कार्रवाई से सबक लेते हुए या बौखलाहट में अब पाकिस्तान ने अपने इस खतरनाक नेटवर्क को व्यापक स्तर पर फैलाने की सुगबुगाहट शुरू कर दी है।
किन-किन सड़क मार्गों पर हो रहा है निर्माण?
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जुटाई गई विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, कई अहम और रणनीतिक सड़क मार्गों पर इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक किया गया है। इस्लामाबाद-मुरी-कोहाला-मुजफ्फराबाद रोड वह मुख्य मार्ग है जो पीओके के अंदर प्रवेश करने का मुख्य जरिया बनता है। इसके अलावा मुजफ्फराबाद-मानसेहरा-एबटाबाद मार्ग इस पूरे क्षेत्र को खैबर पख्तूनख्वा से जोड़ता है। मुजफ्फराबाद से चकोठी की तरफ जाने वाली सड़क सीधे तौर पर एलओसी के बेहद करीब है जिस कारण इसे सैन्य लिहाज से अत्यंत संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इसके अतिरिक्त, दक्षिणी पीओके में रावलाकोट-आजाद पट्टन, कोटली-कहूटा, मीरपुर-दीना और भीमबर-गुजरात जैसे महत्वपूर्ण सड़क मार्गों पर भी निर्माण कार्यों की जानकारी सामने आई है। ये तमाम रास्ते पीओके को रावलपिंडी, झेलम और गुजरात जैसे पाकिस्तानी जिलों से सीधे तौर पर जोड़ते हैं, जिससे आतंकवादियों की आवाजाही निर्बाध रूप से हो सके।
बड़े अड्डे की जगह छोटे केंद्रों का ताना-बाना
सुरक्षा अधिकारियों को यह पुख्ता शक है कि इनमें से कई मस्जिद परिसरों का इस्तेमाल भविष्य में आतंकी संगठनों के सब-सेंटर यानी उप-केंद्रों के रूप में किया जा सकता है। पूर्व की कार्यप्रणाली को देखें तो आतंकवादी संगठन आमतौर पर अपने लोगों, हथियारों और अन्य संसाधनों को बड़े और पहले से पहचाने जा चुके ठिकानों पर ही सुरक्षित रखते थे। लेकिन अब सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से बदला जा रहा है और इसके स्थान पर दूर-दराज के इलाकों में छोटे-छोटे केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इस पूरी रणनीति का मुख्य उद्देश्य आतंकियों के कैडर, रसद सामग्री और अन्य साजो-सामान को अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में फैलाना है। मुख्य सड़कों के ठीक आसपास इस तरह के ठिकाने होने से उनके बीच आपसी आवाजाही और साजो-सामान की आपूर्ति बेहद आसान हो जाएगी। साथ ही, यदि किसी एक ठिकाने पर सुरक्षा बल कार्रवाई करने में सफल भी हो जाते हैं, तो भी पूरे आतंकी नेटवर्क को एक साथ बड़ा नुकसान नहीं पहुंचेगा। इन नए परिसरों का सैन्य ढांचे के बिल्कुल नजदीक होना भारतीय एजेंसियों की चिंता को और अधिक बढ़ा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर में तबाह हुए थे नौ ठिकाने
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके की सीमा के भीतर सक्रिय आतंकी ठिकानों पर बहुत बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की थी। रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 7 मई 2025 को भारतीय सेना ने पूरी सटीकता के साथ कुल नौ आतंकी ठिकानों को अपना निशाना बनाया था। यह सख्त सैन्य कार्रवाई देश के भीतर हुए पहलगाम आतंकी हमले के ठीक बाद की गई थी ताकि देशविरोधी ताकतों को कड़ा संदेश दिया जा सके। मंत्रालय ने उस समय इस पूरी कार्रवाई को एक सटीक, नपी-तुली और संयमित कार्रवाई बताया था जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में अनावश्यक तनाव को बढ़ाना नहीं बल्कि आतंकवाद के खात्मा करना था। भारत ने जिन विशिष्ट ठिकानों को उस दौरान नेस्तनाबूद किया था, उनमें बहावलपुर और मुरीदके में स्थित ठिकाने भी प्रमुखता से शामिल थे। भारत ने बहावलपुर में स्थित आतंकी ठिकाने का सीधा संबंध जैश-ए-मोहम्मद से जोड़ा था, जबकि मुरीदके के ठिकाने को लश्कर-ए-तैयबा संगठन से संबंधित बताया था। मुरीदके में स्थित लश्कर का मर्कज लंबे समय से उसके मुख्य मुख्यालय के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। अब खुफिया एजेंसियों को इस बात की आशंका सता रही है कि पाकिस्तान एक बड़े मर्कज पर अपनी निर्भरता पूरी तरह खत्म करके विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में छोटे-छोटे केंद्र स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


















